Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    CG News
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    CG News
    Home»देश»केंद्र सरकार की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, TMC को लगा बड़ा झटका
    देश

    केंद्र सरकार की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, TMC को लगा बड़ा झटका

    News DeskBy News DeskMay 2, 2026No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    केंद्र सरकार की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, TMC को लगा बड़ा झटका
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    नई दिल्ली

    केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची टीएमसी को अदालत से झटका लगा है. चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ पहुंची ममता बनर्जी की पार्टी से शीर्ष अदालत ने कहा कि हम चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ नहीं जाएंगे और इसपर कोई आदेश जारी नहीं करेंगे. कोर्ट ने साफ कहा कि ईसी को अपना अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है. शीर्ष अदालत ने कहा कि हम उनके काम में कोई दखल नहीं देंगे. बता दें कि टीएसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पैरवी कर रहे थे. कोर्ट ने आगे कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारी के साथ एक राज्य सरकार के कर्मचारी की भी तैनाती की जाएगी। 

    पश्चिम बंगाल में 4 मई को होने वाली मतगणना से ठीक पहले सियासी माहौल और गरमा गया है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) को राहत नहीं मिली। अदालत ने उस याचिका पर कोई दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें Election Commission of India के फैसले को चुनौती दी गई थी। मामला मतगणना केंद्रों पर केंद्रीय सरकार और पीएसयू कर्मचारियों की तैनाती को लेकर था। टीएमसी चाहती थी कि इस व्यवस्था पर रोक लगे, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

    कोर्ट का साफ संदेश, नियमों के खिलाफ नहीं
    सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति नियमों के दायरे में आती है। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी नए आदेश की जरूरत नहीं है। यानी चुनाव आयोग का फैसला फिलहाल बरकरार रहेगा। कोर्ट ने आयोग के उस भरोसे को भी रिकॉर्ड में लिया, जिसमें कहा गया था कि जारी सर्कुलर को पूरी तरह लागू किया जाएगा।

    सिब्बल ने उठाए सवाल
    इससे पहले टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने निर्वाचन आयोग की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमें उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। 

    जब कपिल सिब्बल ने हर टेबल पर एक केंद्रीय कर्मचारी की अनिवार्यता पर सवाल उठाए, तो बेंच ने नियमों का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट की. अदालत ने कहा, “आइए, हम इस प्रावधान को दोबारा पढ़ते हैं. यदि हम यह मान लें कि काउंटिंग सुपरवाइज़र और सहायक केंद्र सरकार के कर्मचारी होंगे, तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि प्रावधान में स्पष्ट है कि इनकी नियुक्ति राज्य या केंद्र, किसी भी पूल से की जा सकती है। 

    कोर्ट ने सिब्बल की दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ऐसा नहीं है जैसा आप बता रहे हैं.” सिब्बल ने अदालत के सामने चार मुख्य मुद्दे उठाए:

    सूचना का अभाव: सिब्बल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बैठकें कर रहा है लेकिन उनके बारे में जानकारी साझा नहीं की जा रही है। 

    अतिरिक्त पर्यवेक्षक पर सवाल: उन्होंने कहा कि पहले से ही केंद्र सरकार का नामांकित माइक्रो ऑब्जर्वर मौजूद है, तो अब हर टेबल पर एक और केंद्रीय कर्मचारी की क्या आवश्यकता है?

    नियमों की अनदेखी: सिब्बल ने दलील दी कि सर्कुलर के अनुसार राज्य सरकार का नामांकित व्यक्ति होना चाहिए, लेकिन चुनाव आयोग अपनी मर्जी से नियुक्तियां कर रहा है। 

    क्या है पूरा विवाद?
    चुनाव आयोग ने 30 अप्रैल को एक निर्देश जारी किया था जिसके अनुसार मतगणना की हर टेबल पर सुपरवाइजर या असिस्टेंट में से कम से कम एक कर्मचारी केंद्र सरकार या पब्लिक सेक्टर (PSU) का होना अनिवार्य है. टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार के कर्मचारी बीजेपी के प्रभाव में काम कर सकते हैं, जबकि कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस आशंका को खारिज करते हुए आयोग के फैसले को वैध बताया था। 

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
    केंद्रीय कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ पहुंची टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी आदेश की जरूरत नहीं है. सर्कुलर का पूरी तरह से पालन होगा. इलेक्शन कमीशन को अधिकारी चुनने का हक है. चुनाव आयोग अपने कर्मचारी पर खुद नियंत्रण कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ इस मामले पर दखल देने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की तैनाती नियमों के खिलाफ नहीं है. चुनाव आयोग का सर्कुलर ही लागू होगा। 

    जस्टिस जे. बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि केवल एक ही पूल से चयन करना गलत नहीं कहा जा सकता. कपिल सिब्बल ने जवाब देते हुए कहा कि चयन राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से यादृच्छिक (रैंडम) तरीके से होना चाहिए. तब जस्टिस बागची ने कहा कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट में से कम से कम एक केंद्र सरकार का कर्मचारी होना चाहिए. कपिल सिब्बल ने तब कहा कि तो फिर दूसरा राज्य सरकार का होना चाहिए, लेकिन यहां तो राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं है. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यहां एक और गलतफहमी यह है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार के कर्मचारी अलग‑अलग माने जा रहे हैं, जबकि वे सभी सरकारी कर्मचारी ही हैं। 

    वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास ओवरऑल अधिकार होते हैं और वह राज्य सरकार कैडर से होता है.प्रत्येक उम्मीदवार के पास अपना अलग काउंटिंग एजेंट भी होगा इसलिए इसको लेकर जताई जा रही आशंका पूरी तरह गलत और निराधार है. अदालत ने कहा कि किसी अतिरिक्त आदेश की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि नायडू के बयान को दोहराते हुए 13 अप्रैल 2026 का सर्कुलर पूरी तरह लागू किया जाएगा। 

    'चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई?'
    चुनाव आयोग के PSU कर्मचारियों को काउंटिंग सुपरवाइजर नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ टीएमसी की ओर से कपिल सिब्बल ने ममता सरकार का पक्ष रखा. तृणमूल कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसी चीजें पहले नहीं हुईं. चुनाव आयोग को कहां से आशंका हो गई? कपिल सिब्बल ने कहा कि सर्कुलर में खुद ही कहा गया है कि राज्य सरकार के नोमिनी होने चाहिए,लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. सिब्बल ने कहा कि इस बात की आशंका है कि आयोग के इस कदम से चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होगी.
    'डर है कि हर एक बूथ में दिक्कत होगी….'

    कपिल सिब्बल ने कहा कि यह सर्कुलर DEO को जारी किया गया है और हमें 29 अप्रैल को पता चला. इसके उलट, पहले से नोटिस दिया गया है.उनका कहना है कि उन्हें डर है कि हर एक बूथ में दिक्कत होगी. एक सेंट्रल गवर्नमेंट नॉमिनी है और अब उन्हें एक और चाहिए.सर्कुलर में कहा गया है कि स्टेट गवर्नमेंट नॉमिनी की जरूरत है लेकिन वे उसे अपॉइंट नहीं करेंगे. आर्टिकल 324 इस बारे में नहीं है कि आप जो चाहें और जैसा चाहें करें। 
     
    कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ गई थी टीएमसी
    सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई से पहले ममता बनर्जी की पार्टी कलकत्ता हाई कोर्ट में भी चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ पहुंची थी. वहां भी अदालत ने इसपर दखल देने से मना करते हुए कहा था कि अधिकारी केंद्रीय या राज्य सेवाओं, जिनमें PSU भी शामिल हैं, से कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं. जस्टिस कृष्णा राव की कोर्ट ने लागू हैंडबुक के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो यह जरूरी करे कि चुनाव सिर्फ राज्य सरकार के कर्मचारियों में से ही किया जाए. कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले को खारिज कर दिया था. कलकत्ता हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि ऐसी नियुक्तियां पूरी तरह से चुनाव आयोग के अपने अधिकार क्षेत्र में आती हैं और इनमें कोई भी गैर-कानूनी बात या अधिकार क्षेत्र की कमी नहीं है. कोर्ट ने ये भी कहा था कि चुनाव आयोग को इसे तय करने का पूरा अधिकार है कि मतों की गणना के समय सेंटर पर कौन होगा।

    News Desk

    Related Posts

    Flipkart-Amazon समेत 150 कंपनियों पर FSSAI का शिकंजा, भ्रामक विज्ञापन और गलत लेबलिंग पर नोटिस

    August 23, 2026

    पुतिन के भारत दौरे में बड़े रक्षा सौदे की तैयारी, सुखोई-57 और ‘सुपर सुखोई’ पर हो सकती है डील

    August 23, 2026

    मां से नाराज होकर घर से निकली विधायक रोहित पवार के PA की बेटी, अगले दिन नाले में मिली लाश

    August 23, 2026

    यूपी-राजस्थान के स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री और वीडियोग्राफी पर रोक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

    August 23, 2026

    होर्मुज नहीं, इस बार बाब अल-मंदेब रूट से भारत पहुंचा क्रूड ऑयल से भरा टैंकर

    August 23, 2026

    आईफोन की EMI बनी जानलेवा! बाप-बेटे पहाड़ी से गिरे, हादसे के सदमे में मां की भी मौत

    August 23, 2026
    GAM
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    संत समाज से बोले शिवराज, ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के लिए करें जनजागरण

    August 23, 2026

    पुतिन के भारत दौरे में बड़े रक्षा सौदे की तैयारी, सुखोई-57 और ‘सुपर सुखोई’ पर हो सकती है डील

    August 23, 2026

    Flipkart-Amazon समेत 150 कंपनियों पर FSSAI का शिकंजा, भ्रामक विज्ञापन और गलत लेबलिंग पर नोटिस

    August 23, 2026

    छत्तीसगढ़ पर्यटन बुकिंग के नाम पर फर्जीवाड़े से सावधान, पर्यटन बोर्ड की पर्यटकों से अपील—फर्जी वेबसाइट, बुकिंग लिंक, मोबाइल नंबर और सोशल मीडिया से रहें सतर्क….

    August 23, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    Owner - Rakhi Roy
    Editor - Rahul Shende
    Mobile - 7089782411
    Email - cgnewsllive24@gmail.com
    Office - F 188, Aakash Ganga, Supela, Bhilai, Chhattisgarh
    August 2026
    M T W T F S S
     12
    3456789
    10111213141516
    17181920212223
    24252627282930
    31  
    « Jul    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.