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    हिमाचल में मॉनसून का कहर: जिस्पा में बादल फटा, मंडी में भूस्खलन से महिला की मौत

    News DeskBy News DeskJuly 1, 2026No Comments9 Mins Read
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    हिमाचल में मॉनसून का कहर: जिस्पा में बादल फटा, मंडी में भूस्खलन से महिला की मौत
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    शिमला
     हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की एंट्री के साथ ही कई इलाकों में भारी बारिश हुई है. इस वजह से कई सड़कें बंद हो गई हैं. वहीं, लाहौल स्पीति के जिस्पा में बीती रात को बादल फटलने से लेह मनाली नेशनल हाईवे बंद हो गया. इस वजह से सैंकड़ों गाड़ियां फंस गई। 

    मनाली की ओर से जाने वाले वाहनों को केलांग के पास ही रोक दिया गया था.  मंडी जिले के औट में शनि मंदिर के पास नालागढ़ की एक महिला पर पत्थर गिरने से मौत हो गई. एएसपी मंडी अभिमन्यू ने मौत की पुष्टि की और बताया कि सभी से अनुरोध है, सुरक्षित स्थानों पर ही वाहन रोकें और सुरक्षित यात्रा करें। 

    धराली-हर्षिल में पूरी रात जागकर नदी को ताक रहे लोग
    बीते साल वर्ष अगस्त में उत्तराखंड के धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा की भयावह यादें अभी ताजा हैं. उस आपदा में खीर गंगा से न केवल धराली बाजार और आसपास के क्षेत्र में भारी तबाही मची थी, बल्कि हर्षिल स्थित सेना का कैंप भी मलबे और बाढ़ की चपेट में आ गया था. कई सैनिक लापता हुए थे और बाद में कुछ जवानों के शव भी बरामद हुए. इसके बावजूद अब तक स्थायी सुरक्षात्मक कार्य नहीं होने से एक बार फिर पूरे हर्षिल क्षेत्र पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। 

    इसी गंभीर चिंता को लेकर हर्षिल क्षेत्र के आठ ग्राम प्रधानों और पूर्व जनप्रतिनिधियों का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी प्रशांत आर्य को ज्ञापन सौंपकर तत्काल प्रभावी सुरक्षा कार्य कराने की मांग की। 

    ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष की आपदा के बाद से हर्षिल के ऊपर बनी अस्थायी झील और भागीरथी नदी की बदलती धारा लगातार खतरा पैदा कर रही है. हाल ही में नदी का जलस्तर बढ़ने से जीएमवीएन का टीनशेड बह गया, कई बड़े पेड़ नदी में समा गए और कटाव लगातार बढ़ रहा है। 

    उन्होंने कहा कि अब जीएमवीएन परिसर, पुलिस थाना, लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस, सेब के बगीचे, आवासीय भवन, होटल और होमस्टे सीधे खतरे की जद में हैं. स्थिति इतनी गंभीर है कि रात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही स्थानीय लोगों को पूरी रात चौकसी करनी पड़ रही है। 

    ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में हर्षिल का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन को यह भी याद दिलाया कि अगस्त 2025 की धराली-हर्षिल आपदा में भारी जन-धन की क्षति हुई थी. अनेक होटल, मकान, सड़कें और अन्य ढांचे मलबे में समा गए थे. इस भीषण त्रासदी में लोगों की जानें गईं, बड़ी संख्या में लोग लापता हुए और हर्षिल स्थित सेना का कैंप भी आपदा की चपेट में आ गया, जहां राहत कार्य के लिए तैयार सैनिक भी मलबे में फंस गए थे. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 

    जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वह बुधवार को हर्षिल क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करेंगे और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुरक्षात्मक कार्य शीघ्र शुरू कराने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। 

    बुधवार सुबह शिमला के मेहली शोघी रोड पर हैप्पी होम के पास लैंडस्लाइड से रोड़ बंद हो गई है। 

    जानकारी के अनुसार, बीते रोज मंगलवार को हिमाचल प्रदेश के सात जिलों में मॉनसून की एंट्री हुई और फिर बीती रात को प्रदेशभर में मूसलाधार बारिश देखने को मिली.जिला चंबा में चंबा-तीसा मुख्य सड़क पागोला नाला के पास बंद हो गई. यहां पर लगातार बारिश के कारण पागोला नाला के पास भूस्खलन और मलबा आने से बंद हो गई है और मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है. सलूणी उपमंडल की ग्राम पंचायत लनोट के लनोट और फगड़ोग गांवों में मूसलाधार बारिश के कारण मलबा और पानी कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। 

    जिला चंबा में चंबा-तीसा मुख्य सड़क पागोला नाला के पास बंद हो गया। 

    हिमाचल प्रदेश पुलिस ने अपने सोशल मीडिया पेज पर जिस्पा में बादल फटने की जानकारी दी. हालांकि, इससे कोई जान माल का नुकसान नहीं हुआ है. लेकिन नाले में फ्लैश फ्लड की वजह से लेह मनाली हाईवे पर गाड़ियों की आवाजाही थम गई. गौर रहे कि जिस्पा मनाली से करीब 100 किमी दूर है। 

    इसके अलावा, मंडी जिले के धर्मपुर में भारी बारिश की वजह से सिद्धपुर धर्मपुर रोड हाजरी क्रशर के पास और धर्मपुर-जोगिन्द्रनगर सड़क भंडारी मिक्सर प्लांट के पास अवरुद्ध हो गया है. कांढापतन–रखेड़ा मार्ग पर सड़क पर मलबा गिरा है और आवागमन प्रभावित हुआ है। 

    फिलहाल, सड़कों की बहाली की कोशिश की जा रही है. वहीं, मंडी जिले में ब्य़ास नदी का जलस्तर बढ़ गया है. लगातार बर्फ पिघलने और बारिस की वजह से पानी का लेवल बढ़ा है और लोगों को नदी नालों के पास ना जाने की अपील की गई है. लाहौल स्पीति के जाहलमा नाले में फ्लैश फ्लड की वजह से लोगों को रस्सी डालकर पार करवाया जा रहा है. इस वजह से किसानों की मटर और गोभी की फसलें फंस गई हैं. लाहौल की पंचायत रानिका के पढ़ाक गांव में बाढ़ से लगभग 5 बीघा गोभी की फसल तबाह हो गई है. इससे पहले, मंगलवार को शिमला के चक्कर बाइपास के पास लैंडस्लाइड हुआ था। 

    पहली ही बारिश में 45 रोड बंद

    हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन ने बुधवार रिपोर्ट में बताया कि बारिश की वजह से 30 जून को 45 सड़कें बंद हो गई थी. इसमें सबसे अधिक 28 रोड मंडी, कुल्लू में 12, ऊना में दो और लाहौल स्पीति में एक रोड बंद थे, हालांकि, अब 16 रोड ही बहाल होने से बची हैं और बारिश की वजह से 84 ट्रांसफार्मर बंद हैं. उधर, बरसात का सीजन शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश में धान की रिपोई का काम भी शुरू हो गया है। 

    ऊना में स्कूलों की टाइमिंग बदली

    ऊना जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में एक जुलाई से सामान्य समय के अनुसार पढ़ाई होगी. डीसी जतिन लाल ने मंगलवार को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं और भीषण गर्मी के मद्देनज़र पांच मई को स्कूलों के समय में किए गए बदलाव संबंधी आदेश भी वापस ले लिए गए हैं. अब जिले के सभी प्री-प्राइमरी, प्राइमरी, मिडिल और सेकेंडरी स्कूल अब सुबह 9 बजे से दोपहर बाद 3 बजे तक खुलेंगे. डीसी ने एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी निर्देश दिए हैं कि स्कूलों के संशोधित समय के अनुरूप बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों और शिक्षकों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। 

    मौसम विभाग ने अगले छह दिन के लिए भारी बारिश का अनुमान लगाया है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिक संदीप शर्मा ने बताया कि इस बार मानसून सामान्य से करीब एक सप्ताह की देरी से प्रदेश पहुंचा है. सामान्य तौर पर शिमला में मानसून 22 जून के आसपास पहुंच जाता है, जबकि 24 से 25 जून तक पूरे प्रदेश को कवर कर लेता है. इस बार 30 जून तक ही मानसून प्रदेश के कुछ हिस्सों में पहुंच पाया है। 

    संदीप शर्मा ने बताया कि सोमवार को शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति के कई क्षेत्रों, सिरमौर के कुछ इलाकों, कांगड़ा के बड़ा भंगाल क्षेत्र और शिमला जिला के आसपास के कुछ हिस्सों में मानसून का आगमन हो चुका है. वहीं शिमला के ऊपरी क्षेत्र, नारकंडा सहित अन्य हिस्सों के अलावा चंबा, किन्नौर, सोलन, बिलासपुर, हमीरपुर और प्रदेश के अन्य शेष क्षेत्रों में अगले दो से तीन दिनों के भीतर मानसून पहुंचने की संभावना है. परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं और जल्द ही पूरा हिमाचल मानसून से कवर हो जाएगा। 

    उन्होंने बताया कि इस बार जून महीने में प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है. केवल कांगड़ा और एक अन्य जिले में सामान्य के आसपास वर्षा हुई, जबकि बाकी 10 जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकॉर्ड की गई. मौसम विभाग का अनुमान है कि पूरे मानसून सीजन के दौरान भी प्रदेश में कुल वर्षा सामान्य से कम रह सकती है. मौसम विभाग के अनुसार, 1 जुलाई से बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी और 6 जुलाई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहेगा। 

    विभाग ने 1 जुलाई के लिए ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और मंडी जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. 2 जुलाई को चंबा, मंडी और सिरमौर में भारी बारिश का येलो अलर्ट, जबकि ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर में बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. 3 जुलाई को बिलासपुर और कांगड़ा में भारी बारिश का येलो अलर्ट रहेगा, जबकि ऊना, मंडी, शिमला और सिरमौर में बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. 4 जुलाई को भी कांगड़ा, मंडी, शिमला, कुल्लू, ऊना और हमीरपुर सहित कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. इसके बाद 5 और 6 जुलाई को भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है. संदीप शर्मा ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2022 में भी मानसून 29 जून के आसपास हिमाचल पहुंचा था. वहीं सबसे अधिक देरी वर्ष 2010 में हुई थी, जब मानसून ने 5 जुलाई को प्रदेश में प्रवेश किया था. यानी वर्ष 2026 में मानसून का आगमन वर्ष 2010 के बाद सबसे देर से हुआ है। 

    प्री मॉनसन में भी 128 लोगों की मौत

    राज्य आपदा प्रबंधन की ओर से जारी प्री-मानसून सीजन (1 मार्च से 30 जून 2026) की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण 128 लोगों की मौत, 398 लोग घायल हुए हैं, जबकि 354 पशुओं की भी जान गई. इसके अलावा प्रदेशभर में निजी और सरकारी संपत्तियों को मिलाकर करीब 29.84 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं में 75 लोगों की मौत पेड़ या चट्टान गिरने, 30 लोगों की डूबने, 5 लोगों की करंट लगने, 4 मौतें आग, 2 सर्पदंश, 1 व्यक्ति की आकाशीय बिजली गिरने और 11 लोगों की अन्य कारणों से मौत हुई है. इस दौरान सड़क हादसों में 270 लोगों की जान गई.  शिमला में सबसे अधिक 7.32 करोड़ रुपये, सोलन में 4.64 करोड़ रुपये, कुल्लू में 4.26 करोड़ रुपये और मंडी में 2.63 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। 

     

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