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    जीएसटी के 10 साल: सरकार एआई आधारित टैक्स सिस्टम और डेटा इंटीग्रेशन पर फोकस कर रही है

    News DeskBy News DeskJune 28, 2026No Comments4 Mins Read
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    जीएसटी के 10 साल: सरकार एआई आधारित टैक्स सिस्टम और डेटा इंटीग्रेशन पर फोकस कर रही है
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     नई दिल्ली
     देश में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सिस्टम लागू होने के 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में अब सरकार का ध्यान केवल कर संग्रह बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एआई आधारित अनुपालन, तेज रिफंड, डेटा इंटीग्रेशन और टैक्स प्रोसेस को सरल बनाने पर केंद्रित हो गया है। इसका उद्देश्य कारोबार क्षेत्रों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अनुपालन लागत कम करना और कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना है। सरकार जीएसटी, आयकर और सीमा शुल्क के डेटाबेस को आपस में जोड़ रही है ताकि जोखिम का बेहतर आकलन किया जा सके, टैक्स चोरी की पहचान आसान हो और मैन्युअल हस्तक्षेप कम किया जा सके।

    सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिनती
    एआई और डेटा विश्लेषण के जरिये अनुपालन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एफिशिएंट बनाया जा रहा है। जीएसटी को देश के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में गिना जाता है। इसने अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को सरल बनाया है, करदाताओं का दायरा बढ़ाया है, अनुपालन को मजबूत किया है और सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
    एक जुलाई, 2017 को आधी रात में संसद के केंद्रीय कक्ष में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जीएसटी की शुरुआत की थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ‘गुड एंड सिंपल टैक्स’ बताते हुए कहा था कि इससे व्यापारियों और छोटे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।

    'एक राष्ट्र, एक टैक्स' की अवधारणा
    जीएसटी लागू करने से पहले देश में केंद्र और राज्यों के 17 प्रकार के कर तथा 13 तरह के उपकर (सेस) लागू थे। जीएसटी में इन्हें समाहित कर पूरे देश के लिए एक समान अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू की गई, जिससे 'एक राष्ट्र, एक कर' की अवधारणा को बल मिला।
    इस व्यापक सुधार को लागू करने में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने राज्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने के लिए लंबी बातचीत की थी। जेटली ने इसे दुनिया की सबसे जटिल अप्रत्यक्ष कर प्रणालियों में से एक के पुनर्गठन की बड़ी उपलब्धि बताया था।

    टैक्स रेट में बदलाव
    जीएसटी लागू होने के समय देश में पंजीकृत करदाताओं की संख्या करीब 66.5 लाख थी, जो वर्ष 2026 तक बढ़कर लगभग 1.6 करोड़ हो गई है। इसे अर्थव्यवस्था के तेजी से संगठित होने का संकेत माना जा रहा है। शुरुआत में जीएसटी में चार कर स्लैब-5, 12, 18 और 28 प्रतिशत थे।
    वहीं विलासिता वाली वस्तुओं और अहितकर उत्पादों मसलन तंबाकू आदि पर 28 प्रतिशत के कर के अलावा अतिरिक्त उपकर भी लगाया गया। बाद में कर प्रणाली में सुधार के तहत 22 सितंबर, 2025 से नई दो-स्तरीय जीएसटी व्यवस्था लागू की गई।
    इसके तहत अधिकांश आवश्यक वस्तुओं को पांच प्रतिशत और सामान्य वस्तुओं एवं सेवाओं को 18 प्रतिशत कर स्लैब में रखा गया। वहीं केवल लक्जरी और अहितकर वस्तुओं पर 40 प्रतिशत की उच्च दर लागू रखी गई। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से अधिकांश वस्तुएं सस्ती हुई हैं और उपभोक्ताओं के हाथ में अधिक नकदी बच रही है।

    एवरेज जीएसटी कलेक्शन 1.84 लाख करोड़ रुपये
    वित्त मंत्री निमला सीतारमण के अनुसार नई जीएसटी व्यवस्था का उद्देश्य आम लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाना है। जीएसटी की दरों का निर्धारण जीएसटी परिषद करती है, जिसमें केंद्र और सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
    वर्ष 2017-18 में जीएसटी लागू होने के समय औसत मासिक जीएसटी संग्रह 89,700 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.85 लाख करोड़ रुपये प्रति माह पर पहुंच गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में औसत मासिक संग्रह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा था।

    पेट्रोलियम उत्पादों पर चर्चा जारी
    वित्त वर्ष 2025-26 में सकल जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यह 9.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22.08 लाख करोड़ रुपये रहा था। जीएसटी लागू करते समय केंद्र और राज्यों के बीच इस बात पर सहमति बनी थी कि पेट्रोलियम उत्पादों को भी संविधान संशोधन के तहत जीएसटी के दायरे में शामिल किया जाएगा।

    हालांकि, यह फैसला जीएसटी परिषद पर छोड़ दिया गया था कि कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन (एटीएफ) और प्राकृतिक गैस को किस तारीख से जीएसटी के तहत लाया जाए। इस संबंध में जीएसटी परिषद में विमान ईंधन (एटीएफ) को जीएसटी के दायरे में लाने पर कुछ चर्चा हुई थी, लेकिन राज्यों ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। ऐसे में इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
    सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार इस मुद्दे पर फिलहाल राज्यों की पहल का इंतजार कर रही है। यानी जब तक राज्य इस संबंध में प्रस्ताव नहीं लाते, तब तक पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना नहीं है।

     

    News Desk

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