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    बिना सुनवाई 1 साल तक हिरासत का प्रावधान! शुभेंदु सरकार के प्रस्तावित कानून पर छिड़ा सियासी घमासान

    News DeskBy News DeskJune 27, 2026No Comments4 Mins Read
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    बिना सुनवाई 1 साल तक हिरासत का प्रावधान! शुभेंदु सरकार के प्रस्तावित कानून पर छिड़ा सियासी घमासान
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    कलकत्ता
    पश्चिम बंगाल में शु
    भेंदु अधिकारी की सराकार अगले सप्ताह विधानसबा में दो अहम विधेयक पेश करने वाली है। इन विधेयकों के जरिए समाज विरोधी गतिविधियों की परिभाषा को विस्तार दिया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इन विधेयकों में बिना किसी सुनवाई के 12 महीने तक की हिरासत का प्रावधान होगा। इसके अलावा अपराधियों की संपत्ति की नीलामी करके पीड़ितों की भरवाई का भी प्रावधान किया गया है।

    अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण विधेयक 2026 और पश्चिम बंगाल कानून व्यवस्था (संशोधन) विधेयक अगले सप्ताह विधानसभा में पेश किए जाएंगे। इसी तरह के कानून उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी बनाए गए थे जिनपर विवाद भी हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य सुनियोजित अपराध, उगाही, अवैध खनन, तस्करी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना है।

    अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में ऐसा प्रावधान है कि बिना सुनवाई के ही किसी अपराधी को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इसके अलावा अगर कोई अपराधी किसी को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाता है तो उसकी संपत्तियों की नीलामी करके उसकी भरपाई की जाएगी। हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक असामाजिक गतिविधियों में, अवैध खनन, बालू का खनन, उत्खनन, वन्य संपदा का दोहन भी शामिल है।

    विधेयकों पर होने लगा बवाल
    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा है कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा और समाज विरोधी गतिविधियां नियंत्रण विधेयक 2026 विवादास्पद कानून है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम कानुन और मीसा से भी ज्यादा कठोर कानून बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस कानून के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के ही एक साल तक हिरासत में रखा जा सके, उसमें न्यायिक सुरक्षा कहां रही। ऐसे में शक के आधार पर ही पुलिस को बेहिसाब ताकत मिल जाती है।

    सोमवार को यूसीसी विधेयक भी होगा पेश
    पश्चिम बंगाल की सरकार सोमवार को बजट सत्र के दौरान ही यूसीसी विधेयक भी पेश करने वाली है। इसके साथ ही दो अन्य विधेयक पेश किए जाएंगे। इसका उद्देश्य सार्वजनिक अव्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और तोड़फोड़ जैसी गतिविधयों से निपटना बताया गया है। बीजेपी का कहना है कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध और कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को रोकना ही इसका मकसद है।

    मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहले ही इस तरह के कड़े कानून को लेकर घोषणा कर दी थी। यह नया कानून 1972 के पुराने कानून की जगह लेने वाला है। अधिकारियों ने कहा कि यह विधेयक उन घटनाओं के लिए तैयार किया गया है जिनमें हिंसक भीड़ पुलिस स्टेशनों और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाती थी।

    विधेयक में क्या प्रावधान है
    इस प्रस्तावित कानून में कई अपराधों को गैरजमानती श्रेणी में रखा जाएगा। इसके अलावा संगठित अपराध, उनकी फंडिंग करने वालों, अवैध हथियार, विस्फोटक, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को परिभाषित किया गया है। इस विधेयक में 'गुंडा' ऐसे व्यक्ति को बताया गया है जो कि आदतन असामाजिक गतिविधियों का हिस्सा होता है और किसी गिरोह या फिर सिंडिकेट में शामिर रहता है। इसके अलावा बीएनए, शस्त्र अधिनियम, अनैतिक व्यापार रोकथाम अधिनियम, एनडीपीएस ऐक्ट के तहत जिसके खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई हो उसे भी गुंडा माना जाएगा।

    इस विधेयक में हिरासत के नियमें में बदलाव के साथ ही एक साल तक प्रतिबंध, आवागमन पर रोक, पुलिस के पास नियमित रिपोर्टिंग, असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने पर धन, संपत्ति और दस्तावेजों की तलाशी का अधिकारी भी दिया गया है। अगर कोई इसका विरोध करता है तो यह संज्ञेय या फिर गैर जमानती अपराध माना जाएगा। चर्चा है कि यूसीसी कानून बनाने से पहले ही सरकार विरोध प्रदर्शनों और हिंसा को रोकने के लिए कड़े कानून ला रही है।

     

    News Desk

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