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    Home»विदेश»ईरान के बाद अब अमेरिका-सऊदी में तनातनी! ट्रंप की एक शर्त से बिगड़ा पूरा समीकरण
    विदेश

    ईरान के बाद अब अमेरिका-सऊदी में तनातनी! ट्रंप की एक शर्त से बिगड़ा पूरा समीकरण

    News DeskBy News DeskMay 27, 2026No Comments4 Mins Read
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    ईरान के बाद अब अमेरिका-सऊदी में तनातनी! ट्रंप की एक शर्त से बिगड़ा पूरा समीकरण
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    वाशिंगटन

    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अब एक नई जंग पर्दे के पीछे शुरू होती दिख रही है. इस बार मामला सीधे वॉशिंगटन और उसके सबसे पुराने अरब सहयोगी सऊदी अरब के बीच का है. वजह बनी है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वह नई रणनीति, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को अब्राहम अकॉर्ड्स से जोड़ दिया।

    25 मई को ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए एक बड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किसी भी शांति समझौते का हिस्सा बनने के लिए मुस्लिम देशों को एक साथ अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने होंगे. ट्रंप ने खास तौर पर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान का नाम लेते हुए इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने की बात कही।

    लेकिन ट्रंप की यह अपील खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब को बिल्कुल पसंद नहीं आई. कुछ ही घंटों बाद रियाद की तरफ से संकेत दिया गया कि सऊदी का पुराना रुख नहीं बदला है. सऊदी अधिकारियों ने साफ कहा कि जब तक फिलिस्तीनी राष्ट्र के गठन के लिए "स्पष्ट रास्ता" तय नहीं होता, तब तक इजरायल के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं हैं।

    कई अरब देशों ने इजरायल संग स्थापित किए रिश्ते
    इस प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया कि गाजा युद्ध के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति पहले जैसी नहीं रही. 2020 में जब अब्राहम अकॉर्ड्स हुए थे, तब कई अरब देशों ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य किए थे. बाद के दौर में सऊदी अरब ने भी इजरायल के साथ संबंध स्थापित करने की कोशिश की।

    हालांकि, इस बीच गाजा से हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया और फिर एक बड़ी जंग शुरू हो गई. यही वजह रही कि सऊदी-इजरायल के बीच रिश्ते स्थापित नहीं हो पाए, लेकिन मौजूदा हालात में सऊदी अरब किसी जल्दबाजी में कदम उठाने के मूड में नहीं दिख रहा।

    होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सऊदी की नाराजगी
    यह विवाद सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है. इसके पीछे होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता तनाव भी बड़ा कारण है. मई की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने "प्रोजेक्ट फ्रीडम" नाम से एक सैन्य मिशन शुरू करने की कोशिश की थी. इसका मकसद होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था, क्योंकि ईरान वहां अपनी पकड़ मजबूत कर चुका है।

    लेकिन अमेरिकी प्रशासन की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उसने इस ऑपरेशन की घोषणा खाड़ी सहयोगियों से पूरी सहमति लिए बिना कर दी. इससे सऊदी नेतृत्व नाराज हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी सेना को अपने एयरस्पेस और सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया. प्रिंस सुल्तान एयरबेस से अमेरिकी उड़ानों पर रोक लगा दी गई. इसके बाद अमेरिकी ऑपरेशन को भारी झटका लगा और "प्रोजेक्ट फ्रीडम" सिर्फ 36 घंटे के भीतर ठप पड़ गया।

    अब सोच-समझकर फैसला लेगा सऊदी अरब!
    सऊदी अरब अब अमेरिका की हर रणनीति का आंख बंद करके समर्थन नहीं करना चाहता. इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान का सीधा खतरा है. तेहरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर किसी खाड़ी देश ने अमेरिकी या इजरायली सैन्य कार्रवाई के लिए अपना एयरस्पेस इस्तेमाल करने दिया, तो उसे भी जवाबी हमले का सामना करना पड़ेगा।

    2019 में सऊदी अरब के अबकैक और खुरैस तेल प्लांट्स पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमले अब भी रियाद के लिए बड़ी चेतावनी बने हुए हैं. यही कारण है कि सऊदी नेतृत्व किसी सीधे सैन्य टकराव से बचना चाहता है. इसके अलावा सऊदी अरब खुद को इस्लाम की सबसे पवित्र जगहों मक्का और मदीना का संरक्षक मानता है. ऐसे में फिलिस्तीन मुद्दे को नजरअंदाज करके इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करना उसके लिए आसान नहीं है. गाजा युद्ध के बाद अरब देशों की जनता में इजरायल के खिलाफ गुस्सा भी काफी बढ़ा है।

    उधर ईरान इस पूरी घटना को अपने लिए रणनीतिक मौके की तरह देख रहा है. अमेरिका जहां एक बड़ा एंटी-ईरान गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान खाड़ी देशों और वॉशिंगटन के बीच बढ़ती दूरी का फायदा उठाने में लगा है. विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की "अब्राहम अकॉर्ड्स फर्स्ट" वाली रणनीति ने उल्टा असर किया है. इससे अमेरिका के सहयोगी देश ही असहज हो गए हैं और वे अब अपने सुरक्षा हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

     

    News Desk

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