Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    CG News
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    CG News
    Home»देश»चारधाम यात्रा में 30 दिन में 55 मौतें, क्या हाई अल्टीट्यूड बन रहा है सबसे बड़ा खतरा?
    देश

    चारधाम यात्रा में 30 दिन में 55 मौतें, क्या हाई अल्टीट्यूड बन रहा है सबसे बड़ा खतरा?

    News DeskBy News DeskMay 20, 2026No Comments7 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    चारधाम यात्रा में 30 दिन में 55 मौतें, क्या हाई अल्टीट्यूड बन रहा है सबसे बड़ा खतरा?
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    देहरादून 

    उत्तराखंड में इस बार चारधाम यात्रा 19 अप्रैल को शुरू हुई थी. यानि इस यात्रा को 30 दिन पूूरे हो चुके हैं. इस दौरान आधिकारिक तौर पर यात्रा में शामिल 55 लोगों की मृत्यु हो चुकी है. ज़्यादातर मौतों की मुख्य वजह स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, विशेषकर दिल की बीमारियां और ऊंचाई पर होने वाली बीमारियां। 

    इसमें 30 लोगों की मृत्यु केदारनाथ यात्रा के रास्ते में हुई तो 10 लोगों की मौत बदरीनाथ यात्रा के दौरान हुई तो यमनोत्री और गंगोत्री धाम के रास्ते में 8 और 7 मौतों का आंकड़ा बताया जा रहा है। 

    उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन अधिकारियों के अनुसार चार धाम यात्रा में मौतों में 70–75% तक मामले खराब स्वास्थ्य यानि प्री‑एक्सिस्टिंग हार्ट डिज़ीज, हाई ब्लडप्रेसर, डायबिटीज, पल्मोनरी एडिमा आदि के कारण होते हैं. कई वृद्ध यात्री या फिटनेस कम वाले लोग ऊंचाई, थकान और तनाव के कारण अचानक हार्ट अटैक, स्ट्रोक या फेफड़ों में सूजन से मर जाते हैं। 

    आमतौर पर लोग यहां के चार धामों की यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करते हैं. इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराना होता है. चूंकि ये यात्रा हाई अल्टीट्यूड पर ही ज्यादा होती है, लिहाजा लोगों को हृदय संबंधी दिक्कतों से भी जूझना होता है. सलाह दी जाती है कि हृदय संबंधी दिक्कतों वाले इन यात्राओं से बचें. आगे ये जानेंगे कि आखिर ऊंचाई वाली जगहें क्यों दिल संबंधी बीमारियों वालों के लिए जानलेवा भी बन जाती हैं। 

    उत्तराखंड के चारों धाम ऊंचाई वाली जगहों पर ही हैं. सभी पहाड़ों की ऊंचाई पर हैं, उनमें मौसम भी ठंडा और बर्फीला रहता है, चाहे यमुनोत्री हो या फिर बद्रीनाथ. वहां गर्मी के मौसम में भी इर्द गिर्द के पहाड़ों पर बर्फ ढंकी नजर आती है. लेकिन ऊंचाई वाली जगहें कैसे हृदय स्वास्थ्य पर असर डालती हैं। 

    अधिक ऊंचाई पर रहना अगर उन व्यक्तियों के लिए फायदेमंद होता है, जिनका हृदय स्वास्थ्य अच्छा होता है. तो उन लोगों के लिए खतरनाक जो मौजूदा तौर पर हृदय जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हों. बहुत से श्रद्धालु बिना पहले से डॉक्टरी जांच, फिटनेस टेस्ट या ऊंचाई के अनुकूलन के बिना सीधे चार धाम के लिए निकल पड़ते हैं। 

    हाई अल्टीट्यूड यानि उच्च ऊंचाई किसे माना जाता है?
    – समुद्र तल से 6,560 फीट से नीचे का कोई भी स्थान कम ऊंचाई वाला माना जाता है. इससे ऊपर की यात्रा मध्यम ऊंचाई और उच्च ऊंचाई वाली मानी जाती है. समुद्र तल से 6,560 से 9,840 फीट के बीच वाले स्थानों को मध्यम ऊंचाई वाला माना जाता है. समुद्र तल से 9,840 फीट से ऊपर की जगहें उच्च ऊंचाई वाली होती हैं. ये वो जगहें हैं जहां आपका शरीर ऊंचाई से संबंधित महत्वपूर्ण प्रभावों का अनुभव करने लगता है। 

    भारत में हाई अल्टीट्यूड एरिया के पैरामीटर्स क्या हैं?

    – भारतीय सेना उच्च ऊंचाई (एचए) क्षेत्रों को 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर के क्षेत्रों के रूप में परिभाषित करती है। इन्हें ऊंचाई के आधार पर तीन चरणों में वर्गीकृत किया गया है:

    स्टेज I: 9,000–12,000 फीट (2,750–3,657 मीटर)
    चरण II: 12,000-15,000 फीट (3,657-4,572 मीटर)
    चरण III: 15,000 फीट से ऊपर (4,572 मीटर)

    चार धाम की यात्रा किन ऊंचाइयों से गुजरती है?
    – छोटा चार धाम के दर्शन के लिए 4000 मीटर से भी ज्‍यादा ऊंचाई तक की चढ़ाई करनी होती है. इसमें कहीं ज्यादा ऊंचाई वाली जगहें होती हैं तो कहीं ज्यादा ऊंचाई वाली जगहें. इसलिए ये यात्रा मुश्किल मानी जाती है। 

    चार धाम यात्रा गढ़वाल हिमालय में ऊंचाई पर होती है, इसलिए इसे उच्च ऊंचाई वाली यात्रा कहा जाता है. चार धाम यात्रा के चार तीर्थस्थल इन ऊंचाइयों पर हैं. भारतीय सेना के हाई अल्टीट्यूड वाले पैरामीटर्स के हिसाब से भी ये सारी जगहें हाई अल्टीट्यूड एरिया हैं। 

    यमुनोत्री: 3,291 मीटर
    गंगोत्री: 3,415 मीटर
    केदारनाथ: 3,553 मीटर
    बद्रीनाथ: 3,300 मीटर
    केदारनाथ: 11,700 फीट
    गंगोत्री: 10,200 फीट

    हाई अल्टीट्यूड वाले इलाके आमतौर पर कैसे होते हैं?
    – उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आमतौर तापमान काफी ठंडा होता है. ज्यादा बारिश होती है, तेज हवाएं चलती हैं. कम वायु दबाव होता है और हवा में ऑक्सीजन का स्तर भी कम होने लगता है। 

    इस ऊंचाई के लिए कई तरह के दिशा निर्देश दिए जाते हैं
    1. धीरे-धीरे चढ़ो
    2. एक दिन में कम ऊंचाई से सीधे 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर जाने से बचें
    3. एक बार 9,000 फीट (2,750 मीटर) से ऊपर सोने की ऊंचाई को प्रतिदिन 1,600 फीट (500 मीटर) से अधिक नहीं बढ़ाएं
    4. प्रत्येक 3,300 फीट (1,000 मीटर) पर अनुकूलन के लिए एक अतिरिक्त दिन की योजना बनाएं.

    उच्च ऊंचाई आपके शरीर को कैसे प्रभावित करती है?
    – जब आप अधिक ऊंचाई पर होते हैं, तो पतली हवा के कारण आपके फेफड़ों को कम ऑक्सीजन प्राप्त होती है. यह आपके फेफड़ों और हृदय पर इसलिए ज्यादा जोर बढ़ा देता है क्योंकि आपके शरीर के बाकी हिस्सों को भी लगातार ऑक्सीजन युक्त रक्त की जरूरत होती है. जिसकी मात्रा पर अशर पड़ने लगता है. इसी वजह से बहुत अधिक ऊंचाई पर बहुत से स्वस्थ लोगों को भी चक्कर आना, सिरदर्द और थकान जैसे दिक्कतें होने लगती हैं। 

    अगर कोई हृदय संबंधी दिक्कतों से गुजर रहा है तो इस ऊंचाई पर क्या अनुभव करता है?

    – यदि आप किसी हृदय संबंधी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का अनुभव करते हैं तो अधिक ऊंचाई का आपके शरीर पर और भी अधिक प्रभाव पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, उच्च रक्तचाप वाले व्यक्तियों को आमतौर पर ऊंचाई वाले स्थान पर पहुंचने के तुरंत बाद हृदय गति और रक्तचाप दोनों में बढोतरी महसूस होगी. ये समस्याएं आमतौर पर रात में और ज्यादा हो जाएंगी। 

    अधिक ऊंचाई पर रहने से हृदय स्वास्थ्य संबंधी लाभ भी होता है क्या?
    – इस बात के प्रमाण हैं कि अधिक ऊंचाई पर रहने से हृदय स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं. हार्वर्ड स्कूल ऑफ ग्लोबल हेल्थ के एक अध्ययन में पाया गया कि अधिक ऊंचाई पर रहने वाले व्यक्तियों में इस्केमिक हृदय रोग से मरने की संभावना कम होती है. उनकी जीवन प्रत्याशा आमतौर पर लंबी होती है। 

    क्या हृदय रोग से पीड़ित रोगी अधिक ऊंचाई पर यात्रा कर सकते हैं?
    – जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में पाया गया कि उच्च रक्तचाप या हृदय रोग वाले व्यक्तियों के लिए ऊंचाई वाले स्थानों पर जाना खतरनाक हो सकता है। 
    अध्ययन के अनुसार, उच्च ऊंचाई वाले स्थानों (9,840 फीट और अधिक) में कठोर शारीरिक गतिविधियों में संलग्न होने से हृदय रोग वाले लोगों के हृदय और रक्त वाहिकाओं पर बहुत अधिक तनाव पड़ सकता है, जिससे कई तरह के लक्षण हो सकते हैं। 

    – सांस लेने में कठिनाई
    – चक्कर आना
    – छाती में दर्द
    – थकान

    हृदय रोगों के साथ अधिक ऊंचाई पर यात्रा करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

    • – हृदय रोग के साथ उच्च ऊंचाई पर पानी पीनाकुछ सामान्य सिफ़ारिशें हैं जिनका उच्च ऊंचाई वाले स्थानों की यात्रा करते समय हृदय रोग से पीड़ित सभी लोगों को पालन करना चाहिए:
    • – अपने उच्च ऊंचाई वाले स्थान पर चढ़ने से पहले मध्यवर्ती ऊंचाई पर एक या अधिक रातें बिताकर धीरे-धीरे उच्च ऊंचाई पर अभ्यस्त हो जाएं
    • – समुद्र तल पर आपकी आदत की तुलना में धीमी गति और कम तीव्रता से व्यायाम करें
    • – उचित रूप से हाइड्रेटेड रहें
    • – पूरी नींद लें
    • – उच्च ऊंचाई पर हृदय और रक्तचाप की दवाओं को संभावित रूप से समायोजित करने की आवश्यकता के बारे में अपने हृदय रोग विशेषज्ञ से बात करें.
    News Desk

    Related Posts

    भगवान जगन्नाथ पर बनी एनिमेशन फिल्म पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिका खारिज

    July 29, 2026

    E20 Petrol से गाड़ियों पर कितना पड़ेगा असर? नितिन गडकरी ने बताया- क्या इंजन बदलने की पड़ेगी जरूरत

    July 29, 2026

    कोयला घोटाला केस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मिली क्लीन चिट

    July 29, 2026

    राज्यसभा में पास हुआ वंदे मातरम् बिल, अपमान करने पर 3 साल तक की जेल का प्रावधान

    July 29, 2026

    Anti Paper Leak Bill लोकसभा से पास, ध्वनिमत से मिली मंजूरी; अब राज्यसभा में कब होगी चर्चा?

    July 29, 2026

    शिक्षा मंत्री विवाद पर बाबा रामदेव का बयान, बोले- ‘सड़क नहीं, संसद और PM तय करेंगे फैसला’

    July 29, 2026
    GAM
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    15 अगस्त से Boycott की धमकी! बेंगलुरु में Swiggy-Zomato की बढ़ी टेंशन, शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर

    July 29, 2026

    श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कोपाबेड़ा शिव मंदिर में की पूजा-अर्चना

    July 29, 2026

    भगवान जगन्नाथ पर बनी एनिमेशन फिल्म पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिका खारिज

    July 29, 2026

    Uttarakhand News- उत्तराखंड में विकास को रफ्तार: CM धामी ने सड़क, मंदिर सौंदर्यीकरण समेत कई परियोजनाओं के लिए जारी की करोड़ों की राशि….

    July 29, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    Owner - Rakhi Roy
    Editor - Rahul Shende
    Mobile - 7089782411
    Email - cgnewsllive24@gmail.com
    Office - F 188, Aakash Ganga, Supela, Bhilai, Chhattisgarh
    July 2026
    M T W T F S S
     12345
    6789101112
    13141516171819
    20212223242526
    2728293031  
    « Jun    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.