Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    CG News
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    CG News
    Home»देश»बिजली बिल मामले में रेलवे को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की 10 साल पुरानी दलील; देना होगा ₹15,000 करोड़ सरचार्ज
    देश

    बिजली बिल मामले में रेलवे को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की 10 साल पुरानी दलील; देना होगा ₹15,000 करोड़ सरचार्ज

    News DeskBy News DeskMay 20, 2026No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    बिजली बिल मामले में रेलवे को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की 10 साल पुरानी दलील; देना होगा ₹15,000 करोड़ सरचार्ज
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    नई दिल्ली
     सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे बड़े बिजली उपभोक्ताओं में से एक भारतीय रेलवे को बड़ा वित्तीय झटका दिया है. अदालत ने साफ किया है कि रेलवे बिजली कानून के तहत कोई विशेष दर्जा पाने का हकदार नहीं है. उसे अन्य औद्योगिक इकाइयों की तरह ही अपनी बिजली खपत पर सभी तरह के सरचार्ज देने होंगे. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने रेलवे की आठ अपीलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. कोर्ट ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के पुराने फैसले को सही ठहराया है. इस फैसले से राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन रेलवे के बजट पर इसका बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका है। 

    रेलवे पर क्यों फूटा 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बम?
    भारतीय रेलवे हर साल करीब 33 अरब यूनिट से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करती है. इस बड़े फैसले के बाद रेलवे को बैकडेटेड एरियर यानी पुराना बकाया भी चुकाना होगा. राज्यों के हिसाब से यह क्रॉस-सब्सिडी सरचार्ज 50 पैसे से लेकर 2.5 रुपये प्रति यूनिट तक है। 

    सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की डिस्कॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे रेलवे के ओपन एक्सेस इस्तेमाल की अवधि और क्षेत्र के हिसाब से बकाया राशि का आकलन करें. रेलवे के आंतरिक अनुमानों के अनुसार यह कुल बकाया राशि कम से कम 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. यह रकम रेलवे के चालू वित्त वर्ष के बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकती है। 

    10 साल पुराने कानूनी दांवपेंच में कहां मात खा गई रेलवे?

        रेलवे साल 2015 से अदालत में यह दलील दे रही थी कि वह एक ‘डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी’ है. इस रणनीति के पीछे रेल मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय का साल 2014 का एक पत्र था। 

        रेलवे का दावा था कि रेलवे एक्ट 1989 की धारा 11 के तहत उसे खुद का बिजली नेटवर्क और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बनाने का अधिकार प्राप्त है. इसलिए वह ग्रिड से सीधे बिजली लेते समय किसी भी तरह का सरचार्ज देने के लिए उत्तरदायी नहीं है। 

        सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि कानूनन डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी होने के लिए दूसरों को बिजली बेचना जरूरी है, जबकि रेलवे पूरी बिजली खुद ही कंज्यूम करती है। 

    रेलवे डिस्ट्रीब्यूटर है या सिर्फ एक कंज्यूमर?
    सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि रेलवे का पूरा ओवरहेड इक्विपमेंट और ट्रैक्शन सबस्टेशन उसका आंतरिक सिस्टम है. यह कोई पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम नहीं है. बिजली कानून के तहत लाइसेंसी कहलाने के लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए। 

        पहली शर्त यह कि आपके पास डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम हो.
        दूसरी यह कि आप किसी तीसरे पक्ष को बिजली की सप्लाई करते हों.

    रेलवे जो भी बिजली खरीदती है, उसका इस्तेमाल केवल इंजनों, सिग्नलों और स्टेशनों को चलाने में होता है. वह इसे किसी बाहरी उपभोक्ता को नहीं बेचती है. इसी आधार पर कोर्ट ने रेलवे को बिजली कानून की धारा 2(15) के तहत सिर्फ एक कंज्यूमर माना है। 

    क्या अब फेल हो जाएगी रेलवे की महा-बचत योजना?
    रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य मोहम्मद जमशेद के अनुसार, इस अदालती आदेश में रेलवे की पूरी वित्तीय बचत को खत्म करने की क्षमता है. रेलवे ने साल 2015 के आसपास एक बड़ी नीतिगत पहल शुरू की थी. इसके तहत ओपन एक्सेस से सस्ती बिजली खरीदकर एक दशक में 41,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बचाने का लक्ष्य था. यह नया फैसला उस पूरी योजना पर पानी फेर सकता है। 

    रेलवे ने अपने ब्रॉड-गेज नेटवर्क का लगभग 100% इलेक्ट्रिफिकेशन पूरा कर लिया है. इस मिशन पर करीब 46,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. डीजल पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण को बचाने की यह मुहिम अब ओपन एक्सेस मार्केट के महंगे सरचार्ज के जाल में फंस गई है। 

    News Desk

    Related Posts

    भगवान जगन्नाथ पर बनी एनिमेशन फिल्म पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिका खारिज

    July 29, 2026

    E20 Petrol से गाड़ियों पर कितना पड़ेगा असर? नितिन गडकरी ने बताया- क्या इंजन बदलने की पड़ेगी जरूरत

    July 29, 2026

    कोयला घोटाला केस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, मिली क्लीन चिट

    July 29, 2026

    राज्यसभा में पास हुआ वंदे मातरम् बिल, अपमान करने पर 3 साल तक की जेल का प्रावधान

    July 29, 2026

    Anti Paper Leak Bill लोकसभा से पास, ध्वनिमत से मिली मंजूरी; अब राज्यसभा में कब होगी चर्चा?

    July 29, 2026

    शिक्षा मंत्री विवाद पर बाबा रामदेव का बयान, बोले- ‘सड़क नहीं, संसद और PM तय करेंगे फैसला’

    July 29, 2026
    GAM
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    15 अगस्त से Boycott की धमकी! बेंगलुरु में Swiggy-Zomato की बढ़ी टेंशन, शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर

    July 29, 2026

    श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने कोपाबेड़ा शिव मंदिर में की पूजा-अर्चना

    July 29, 2026

    भगवान जगन्नाथ पर बनी एनिमेशन फिल्म पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, याचिका खारिज

    July 29, 2026

    Uttarakhand News- उत्तराखंड में विकास को रफ्तार: CM धामी ने सड़क, मंदिर सौंदर्यीकरण समेत कई परियोजनाओं के लिए जारी की करोड़ों की राशि….

    July 29, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    Owner - Rakhi Roy
    Editor - Rahul Shende
    Mobile - 7089782411
    Email - cgnewsllive24@gmail.com
    Office - F 188, Aakash Ganga, Supela, Bhilai, Chhattisgarh
    July 2026
    M T W T F S S
     12345
    6789101112
    13141516171819
    20212223242526
    2728293031  
    « Jun    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.