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    जमीयत उलेमा-ए-हिंद का केंद्र सरकार पर हमला, वंदे मातरम फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी

    News DeskBy News DeskMay 17, 2026No Comments4 Mins Read
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    जमीयत उलेमा-ए-हिंद का केंद्र सरकार पर हमला, वंदे मातरम फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी
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    नई दिल्ली

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने की केंद्रीय कार्यसमिति के दो दिवसीय अधिवेशन में सरकार की नीतियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने और मुस्लिम धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने के खिलाफ उनका संगठन अदालत का दरवाजा खटखटाएगा.

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने केंद्र सरकार के वंदे मातरम को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के बराबर दर्जा दिया जाने के फैसले को खारिज कर दिया है. मदनी ने वंदे मातरम को 'विवादित गीत' और 'मुसलमानों के खिलाफ' करार दिया है.

    बता दें सरकार ने सभी सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों में वंदे मातरम के छह बंद गाना अनिवार्य किया है. इस पर मौलाना अरशद मदनी ने कहा, 'एक नोटिफिकेशन के जरिए वंदे मातरम जैसे विवादित गीत को राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया है. बीजेपी शासित राज्यों में इसे अनिवार्य भी किया जा रहा है.'

    मदरसों-मस्जिदों पर अतिक्रमण का विरोध
    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अरशद मदनी ने कहा, 'दूसरी ओर मस्जिदों, मकबरों और मदरसों को अवैध बताकर गिराया जा रहा है. मदरसों के खिलाफ रोज नए-नए आदेश जारी किए जा रहे हैं, मानो वो शैक्षणिक संस्थान न होकर गैरकानूनी गतिविधियों के केंद्र हों.'

    मदनी ने बताया कि वंदे मातरम् को अनिवार्य किए जाने के खिलाफ भी अब कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी. उनके मुताबिक, 'ये गीत हमारे धार्मिक विश्वासों के खिलाफ है और इसे अनिवार्य बनाकर हमारी धार्मिक स्वतंत्रता को छीनने की कोशिश की जा रही है.'

    देश के राजनीतिक माहौल पर बात करते हुए जमीयत ने आरोप लगाया कि पहले सिर्फ मुसलमान ही सांप्रदायिक ताकतों के निशाने पर थे, लेकिन अब सीधे इस्लाम धर्म को निशाना बनाया जा रहा है.

    'शांति और एकता के साथ खतरनाक खेल खेला जा…'
    अरशद मदनी ने दावा किया कि देश में नफरत की पॉलिटिक्स अब डराने-धमकाने की पॉलिटिक्स में बदल गई है. इसका मकसद मुसलमानों को डराना और उन्हें थोपी हुई शर्तों के तहत जीने के लिए मजबूर करना है. सत्ता के लिए शांति और एकता के साथ एक खतरनाक खेल खेला जा रहा है, जिससे धार्मिक कट्टरता और नफरत लगातार बढ़ रही है, जबकि कानून के रखवाले चुपचाप देखते रहते हैं.

    मदनी ने लिखा, 'हाल के चुनावों के बाद, कुछ नेताओं का नफरत के ज़रिए सत्ता पाने का जुनून और बढ़ गया है और धार्मिक भावनाओं को भड़काकर मेजोरिटी को माइनॉरिटी के खिलाफ खड़ा किया जा रहा है, जबकि सरकारें इंसाफ और निष्पक्षता से चलती हैं, डर और धमकियों से नहीं.'

    शुभेंदु अधिकारी पर मदनी का निशाना
    मदनी ने शुभेंदु अधिकारी को लेकर कहा, 'पश्चिम बंगाल के नए चुने गए मुख्यमंत्री का ये बयान कि वो सिर्फ हिंदुओं के लिए काम करेंगे पूरी तरह से संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. क्योंकि हर मुख्यमंत्री सभी नागरिकों के लिए न्याय बनाए रखने की शपथ लेता है. सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी हर नागरिक के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है, न कि किसी खास समुदाय के खिलाफ नफरत और बांटने वाली राजनीति को बढ़ावा देना.'

    मदनी ने आरोप लगाया है कि देश को एक सोची-समझी सोच वाले देश में बदलने की एक सोची-समझी कोशिश है. यूनिफॉर्म सिविल कोड, वंदे मातरम को जरूरी बनाना, मस्जिदों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाई और SIR की आड़ में असली नागरिकों को वोट देने के अधिकार से रोकना, ये सब एक ही कड़ी की कड़ी हैं.

    'इस्लाम खुद निशाना बन गया है'
    उन्होंने साफ किया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद ऐसे सभी कदमों के खिलाफ अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी. पिछली सरकारों ने भी मुसलमानों को सामाजिक, शैक्षणिक, राजनीतिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाया, लेकिन आज हालात कहीं ज्यादा खतरनाक हो गए हैं. पहले सिर्फ मुसलमानों को निशाना बनाया जाता था, अब इस्लाम खुद निशाना बन गया है.

    मदनी ने लिखा, '2014 के बाद बनाए गए कानून और हाल के कदम इस बात का साफ सबूत हैं कि मौजूदा सरकार सिर्फ मुसलमानों को ही नहीं, बल्कि इस्लाम को भी नुकसान पहुंचाना चाहती है. दुनिया भर में भी इस्लाम के खिलाफ संगठित प्रोपेगैंडा चलाया जा रहा है. हालांकि, इतिहास गवाह है कि जो लोग इस्लाम को मिटाना चाहते थे, वो खुद ही मिट गए. इस्लाम जिंदा था, जिंदा है, और कयामत तक जिंदा रहेगा.'

    आखिर में उन्होंने अपील करते हुए कहा कि हम सभी इंसाफ पसंद पार्टियों, सामाजिक संगठनों और देशभक्त नागरिकों से अपील करते हैं कि वो डेमोक्रेटिक और सामाजिक लेवल पर सांप्रदायिक और फासिस्ट ताकतों के खिलाफ एकजुट हों और देश में भाईचारे, सहनशीलता, इंसाफ और संविधान के लिए मिलकर संघर्ष करें.

    News Desk

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