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    लाहौर से इस्‍लामाबाद और कराची तक एक ही अटैक में साफ, मुनीर का कुनबा सुरक्षित नहीं, चीन भी तनाव में

    News DeskBy News DeskMay 12, 2026No Comments8 Mins Read
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    लाहौर से इस्‍लामाबाद और कराची तक एक ही अटैक में साफ, मुनीर का कुनबा सुरक्षित नहीं, चीन भी तनाव में
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    नई दिल्ली

    भारत ने पिछले दिनों ओडिशा के तट पर एक विनाशकारी मिसाइल का सफल ट्रायल किया है. इससे पहले डीआरडीओ की तरफ से तीन हजार किलोमीटर से भी ज्‍यादा के क्षेत्र के लिए हवाई कर्फ्यू यानी NOTAM जारी किया था. अब इसको लेकर विस्‍तृत जानकारी सामने आई है. दरअसल, भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने ऐसी मिसाइल का परीक्षण किया है, जो 5000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. खास बात यह है कि इस मिसाइल में ऐसी तकनीक का इस्‍तेमाल किया गया है, जो एक साथ अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग टार्गेट को एक साथ तबाह करने में सक्षम है. इस मिसाइल की जद में पूरा पाकिस्‍तान है, ज‍बकि उसके यार चीन के कई महत्‍वपूर्ण ठिकाने भी इस मिसाइल की नोंक पर होंगे. इसका मतलब यह हुआ कि इस मिसाइल से लाहौर से लेकर इस्‍लामाबाद, रावलपिंडी, कराची, पेशावर जैसे शहरों को कुछ ही मिनटों में मलबे में तब्‍दील किया जा सकता है। 

    दरअसल, डीआरडीओ ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल रीएंट्री व्हीकल यानी MIRV टेक्‍नोलॉजी से लैस एडवांस अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया है. हालांकि, डीआरडीओ की तरफ से अग्नि मिसाइल के इस वैरिएंट के बारे में कुछ नहीं बताया गया है, लेकिन मुद्दे की बात यह है कि यह मिसाइल MIRV तकनीक से लैस है. MIRV टेक्‍नोलॉजी की मदद से एक ही मिसाइल से कई टार्गेट पर निशाना साधा जा सकता है. इस तकनीक से लैस मिसाइल को इसी वजह से ‘मिसाइल बस’ भी कहा जाता है. भारत ने 8 मई 2026 को ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण कर सामरिक मोर्चे पर बड़ा संदेश दिया है. इस उपलब्धि के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास लंबी दूरी की MIRV क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं। 

    हिन्‍द महासागर में बादशाहत!
    रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 9 मई को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए परीक्षण की सफलता की पुष्टि की. बाद में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि जमीन और समुद्र आधारित कई ट्रैकिंग स्टेशनों से प्राप्त टेलीमेट्री डेटा ने मिसाइल की पूरी ऑपरेशनल ट्रैजेक्टरी को सफल बताया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस परीक्षण को भारत की बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा कि देश बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण के अनुरूप अपनी रणनीतिक क्षमता को मजबूत कर रहा है. हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि परीक्षण अग्नि-5 का था या अग्नि-6 संस्करण का, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे अग्नि-5 परिवार का एडवांस MIRV अपग्रेड मान रहे हैं, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है. माना जा रहा है कि यह मिसाइल हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग लक्ष्यों को साधने में सक्षम है, जिससे भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और ‘सेकेंड स्ट्राइक’ क्षमता दोनों मजबूत हुई हैं। 

    MIRV से लैस मिसाइल इस वजह से खास

    •     भारत ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल फ्लाइट ट्रायल किया.
    •     रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल में MIRV (Multiple Independently Targeted Reentry Vehicle) तकनीक का इस्तेमाल किया गया.
    •     इस तकनीक के जरिए एक ही मिसाइल से कई अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है.
    •     परीक्षण में मिसाइल ने कई पेलोड को अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों तक सफलतापूर्वक पहुंचाया.
    •     सभी लक्ष्यों को हिंद महासागर क्षेत्र में बड़े भौगोलिक दायरे में चुना गया था.
    •     मिसाइल की पूरी उड़ान पर ग्राउंड और जहाज आधारित ट्रैकिंग सिस्टम से नजर रखी गई.
    •     रक्षा मंत्रालय ने कहा कि लॉन्च से लेकर सभी पेलोड के लक्ष्य पर पहुंचने तक मिशन सफल रहा.
    •     इस परीक्षण के साथ भारत ने फिर साबित किया कि वह एक मिसाइल से कई रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है.
    •     मिसाइल का विकास DRDO की लैब्स ने देश की विभिन्न इंडस्ट्रीज के सहयोग से किया है.
    •     परीक्षण के दौरान DRDO के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी मौजूद रहे.
    •     इससे पहले 11 मार्च 2024 को भारत ने पहली बार स्वदेशी अग्नि-5 मिसाइल का MIRV तकनीक के साथ सफल परीक्षण किया था.
    •     हालांकि सरकार ने मिसाइल की आधिकारिक रेंज नहीं बताई, लेकिन NOTMAR नोटिस के आधार पर इसकी मारक क्षमता करीब 3,600 किलोमीटर मानी जा रही है.

    MIRV टेक्‍नोलॉजी के क्‍या फायदे?
    MIRV तकनीक रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल जहां एक वारहेड ले जाती है, वहीं MIRV तकनीक वाली मिसाइल एक साथ कई वारहेड लेकर अलग-अलग दिशाओं में हमला कर सकती है. इसमें डिकॉय और पेनिट्रेशन एड्स का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेदना आसान हो जाता है. यही वजह है कि अमेरिका, रूस और चीन जैसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों ने इस तकनीक को अपनी रणनीतिक क्षमता का अहम हिस्सा बनाया हुआ है. अब भारत भी इस श्रेणी में मजबूती से शामिल होता दिखाई दे रहा है. यह परीक्षण मुख्य रूप से चीन को रणनीतिक संदेश देने वाला है. हाल के वर्षों में चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम में तेजी लाई है. शिनजियांग क्षेत्र में मिसाइल साइलो निर्माण, DF-41 जैसी MIRV मिसाइलों की तैनाती, हाइपरसोनिक हथियारों का विकास और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं. ऐसे में भारत का यह परीक्षण सामरिक संतुलन कायम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

    MIRV तकनीक आखिर होती क्या है?
    MIRV यानी Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle ऐसी मिसाइल तकनीक है, जिसमें एक ही बैलिस्टिक मिसाइल कई परमाणु वारहेड लेकर जाती है. अंतरिक्ष में पहुंचने के बाद ये वारहेड अलग-अलग दिशाओं में जाकर अलग-अलग लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं. यानी एक मिसाइल से कई ठिकानों पर हमला संभव हो जाता है.

    भारत के हालिया परीक्षण की सबसे बड़ी खासियत क्या रही?
    भारत ने उन्नत अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए MIRV तकनीक का सफल परीक्षण किया है. इस परीक्षण ने दिखाया कि भारत अब लंबी दूरी तक कई लक्ष्यों पर एक साथ सटीक हमला करने की क्षमता हासिल कर चुका है. इसे भारत की सामरिक ताकत में बड़ा इजाफा माना जा रहा है.

    चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में यह तकनीक क्यों महत्वपूर्ण है?
    चीन पहले से ही MIRV क्षमता वाली मिसाइलें तैनात कर चुका है, जबकि पाकिस्तान भी अपनी परमाणु क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है. ऐसे में भारत का यह परीक्षण क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन बनाए रखने और अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

    MIRV तकनीक से सैन्य रणनीति में क्या बदलाव आता है?
    इस तकनीक से दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेदना आसान हो जाता है. क्योंकि एक ही मिसाइल से कई वारहेड अलग-अलग दिशाओं में जाते हैं, इसलिए उन्हें रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है. इससे किसी देश की ‘सेकेंड स्ट्राइक क्षमता’ यानी जवाबी हमले की ताकत और मजबूत होती है.

    किन देशों के पास पहले से MIRV तकनीक मौजूद है?
    अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे बड़े परमाणु शक्ति संपन्न देशों के पास पहले से MIRV तकनीक है. अब भारत भी इस सूची में शामिल हो गया है, जिससे वैश्विक सामरिक मंच पर उसकी स्थिति और मजबूत मानी जा रही है.

    पाकिस्‍तान की क्‍या स्थिति?
    भारत की नो फर्स्ट यूज नीति के तहत यह तकनीक प्रतिशोधात्मक हमले की विश्वसनीयता बढ़ाती है. यदि किसी परमाणु हमले की स्थिति बनती है तो भारत के पास जवाबी कार्रवाई में अधिक प्रभावी क्षमता होगी. MIRV तकनीक सीमित मिसाइल भंडार के बावजूद अधिकतम प्रभाव पैदा करने में मदद करती है और कम लॉन्चरों से ज्यादा लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है. इस परीक्षण का असर पाकिस्तान पर भी पड़ना तय माना जा रहा है. पाकिस्तान पहले से अपने ‘अबाबील’ MIRV कार्यक्रम पर काम कर रहा है. भारत की इस सफलता के बाद पाकिस्तान अपने मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम में और तेजी ला सकता है. हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को गाइडेंस सिस्टम, इंजीनियरिंग, टेलीमेट्री और सर्वाइवेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट बढ़त हासिल है.

    चीन को जवाब
    हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग लक्ष्यों पर परीक्षण को भारत की समुद्री रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. यह क्षेत्र ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक मार्गों और नौसैनिक गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है. चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी और ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति के बीच भारत अब समुद्री प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत कर रहा है. भारत का यह कदम केवल सैन्य शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का भी प्रतीक है. DRDO, घरेलू रक्षा उद्योग और निजी कंपनियों जैसे Tata Group और Larsen & Toubro की भागीदारी ने रणनीतिक हथियार निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता को नई पहचान दी है.

    मार्च 2024 को पहला परीक्षण
    भारत ने मार्च 2024 में मिशन दिव्यास्त्र के जरिए MIRV तकनीक का पहला प्रदर्शन किया था. अब ताजा परीक्षण ने यह संकेत दे दिया है कि भारत तेजी से उन्नत परमाणु प्रतिरोधक क्षमता की दिशा में आगे बढ़ रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार अग्नि-5I या उसके उन्नत संस्करण में तीन से छह वारहेड ले जाने की क्षमता हो सकती है और यह कैनिस्टर आधारित कोल्ड लॉन्च तकनीक से लैस है, जिससे इसे तेजी से तैनात किया जा सकता है. रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यह परीक्षण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन की नई बहस को जन्म देगा. चीन और पाकिस्तान जहां अपने परमाणु आधुनिकीकरण को आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं भारत भी अब बहुस्तरीय प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाता दिखाई दे रहा है.

    News Desk

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