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    Home»देश»एक करोड़ लोग अगर हफ्ते में 3 दिन वर्क फ्रॉम होम करें, ₹70,000 करोड़ बचेंगे!
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    एक करोड़ लोग अगर हफ्ते में 3 दिन वर्क फ्रॉम होम करें, ₹70,000 करोड़ बचेंगे!

    News DeskBy News DeskMay 11, 2026No Comments4 Mins Read
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    एक करोड़ लोग अगर हफ्ते में 3 दिन वर्क फ्रॉम होम करें, ₹70,000 करोड़ बचेंगे!
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    मुंबई 
    भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है. देश अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में जब भी पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें उछलती हैं तो उसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, महंगाई और आम आदमी की जेब पर पड़ता है. इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील बेहद अहम मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने लोगों से ईंधन की बचत के लिए कोरोना काल की तरह वर्क फ्रॉम होम अपनाने की बात कही। 

    प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ एक अस्थायी सलाह नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी मुद्रा बचत और शहरी ट्रैफिक संकट से जुड़ा बड़ा आर्थिक संदेश है. अगर देश में बड़े पैमाने पर कंपनियां हफ्ते में 2 से 3 दिन वर्क फ्रॉम होम लागू कर दें, तो इसका असर सिर्फ कर्मचारियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हो सकता है। 

    दरअसल भारत के बड़े शहरों- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम में करोड़ों लोग रोज ऑफिस आने-जाने के लिए निजी वाहन इस्तेमाल करते हैं. एक औसत कर्मचारी रोज 20 से 40 किलोमीटर तक सफर करता है. अगर सिर्फ एक करोड़ कर्मचारी भी हफ्ते में 3 दिन घर से काम करें और रोज औसतन 30 किलोमीटर की यात्रा बच जाए तो हर दिन करीब 30 करोड़ किलोमीटर की वाहन आवाजाही कम हो सकती है. सामान्य माइलेज के हिसाब से यह रोज लगभग दो करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की बचत के बराबर बैठता है। 

    70,000 करोड़ रुपये की बचत
    इसी गणना को सालभर के स्तर पर देखें तो करीब 700 से 750 करोड़ लीटर ईंधन की बचत संभव है. मौजूदा कीमतों के हिसाब से इसकी आर्थिक वैल्यू 70,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है. यह रकम कई राज्यों के सालाना बजट के बराबर है. यानी सिर्फ काम करने के तरीके में बदलाव से भारत हजारों करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा सकता है। 

    प्रधानमंत्री मोदी ने बीती रात देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि पेट्रोल, डीजल और गैस का इस्तेमाल संयम के साथ करना समय की जरूरत है. उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए वर्क फ्रॉम होम मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां कंपनियां और संस्थान घर से काम करने की व्यवस्था पर फिर से विचार करें. पीएम का संकेत साफ था कि ऊर्जा बचत अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है। 

    कोरोना काल में हो चुका है सफल प्रयोग
    कोरोना काल में भारत ने पहली बार बड़े स्तर पर देखा कि डिजिटल इकोनॉमी और रिमोट वर्किंग मॉडल कैसे लाखों लोगों के लिए प्रभावी साबित हो सकते हैं. आईटी, मीडिया, बैंकिंग, कंसल्टिंग और कई सर्विस सेक्टर कंपनियों ने बिना ऑफिस आए भी कामकाज जारी रखा. उस दौर में शहरों की सड़कों पर ट्रैफिक कम हुआ, प्रदूषण घटा और ईंधन की खपत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई थी. अब सरकार उसी अनुभव को सीमित लेकिन रणनीतिक रूप में फिर अपनाने की बात कर रही है। 

    वर्क फ्रॉम होम का सबसे बड़ा फायदा केवल ईंधन बचत नहीं है. इससे ट्रैफिक जाम कम होंगे, सार्वजनिक परिवहन पर दबाव घटेगा और शहरों में प्रदूषण का स्तर नीचे आएगा. कर्मचारी रोज के सफर में खर्च होने वाला समय परिवार या उत्पादक काम में लगा सकेंगे. कंपनियों के लिए भी ऑफिस स्पेस, बिजली और ऑपरेशन कॉस्ट में कमी संभव है। 

    हाइब्रिड मॉडल में हो सकती करोड़ों नौकरियां
    हालांकि, यह मॉडल हर सेक्टर में लागू नहीं हो सकता. मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन, रिटेल, हेल्थकेयर और फिजिकल सर्विस सेक्टर में कर्मचारियों की मौजूदगी जरूरी रहती है. लेकिन भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में करोड़ों नौकरियां ऐसी हैं जिन्हें हाइब्रिड मॉडल में आसानी से चलाया जा सकता है। 

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर केंद्र सरकार कंपनियों को प्रोत्साहन दे, राज्यों के साथ मिलकर ग्रीन वर्क पॉलिसी जैसी पहल शुरू करे और बड़े शहरों में हाइब्रिड ऑफिस संस्कृति को बढ़ावा दिया जाए, तो भारत अपने तेल आयात बिल में बड़ी कमी ला सकता है. इससे चालू खाते के घाटे पर दबाव घटेगा और रुपया भी मजबूत हो सकता है। 

    News Desk

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