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    140 साल का गर्मी का रिकॉर्ड तोड़ेगा ‘सुपर अल नीनो’! इस बार क्या होगा खास?

    News DeskBy News DeskMay 1, 2026No Comments5 Mins Read
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    140 साल का गर्मी का रिकॉर्ड तोड़ेगा ‘सुपर अल नीनो’! इस बार क्या होगा खास?
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    नई दिल्ली

    गर्मियों का मौसम आते ही हम सभी चिलचिलाती धूप और पसीने से परेशान होने लगते हैं। लेकिन, इस बार की गर्मी कोई आम गर्मी नहीं होने वाली है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस बार 'सुपर अल नीनो' के कारण गर्मी अपने पिछले 140 सालों के सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है। वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है और दुनिया के कई हिस्सों में चरम मौसम की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। आखिर यह 'सुपर अल नीनो' कैसे असर करता है? यह इतना खतरनाक क्यों माना जा रहा है? और भारत सहित पूरी दुनिया पर इसका क्या असर पड़ने वाला है? आइए समझते हैं।

    अल नीनो (El Niño) क्या है?

        स्पेनिश भाषा में 'अल नीनो' का मतलब 'छोटा लड़का' होता है, लेकिन मौसम विज्ञान में इसका असर बहुत विशाल है।

        यह प्रशांत महासागर से जुड़ी एक मौसमी घटना है।

        सामान्य परिस्थितियों में, समुद्र की सतह का गर्म पानी एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ बहता है।

        लेकिन, अल नीनो के दौरान यह चक्र उलटा या कमजोर पड़ जाता है। भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है और यह गर्म पानी दक्षिण अमेरिका की तरफ बहने लगता है।

        समुद्र के इस बढ़ते तापमान का असर पूरी दुनिया के मौसम चक्र (हवाओं, बारिश और तापमान) पर पड़ता है।

    फिर यह 'सुपर अल नीनो' क्या है?

    जब प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से थोड़ा बढ़ता है, तो उसे 'अल नीनो' कहते हैं। लेकिन जब यह तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह घटना बेहद उग्र हो जाती है। इसे ही वैज्ञानिकों ने 'सुपर अल नीनो' का नाम दिया है।

    मुख्य कारण: जब ग्लोबल वार्मिंग (ग्रीनहाउस गैसों के कारण लगातार बढ़ती पृथ्वी की गर्मी) और अल नीनो दोनों आपस में मिल जाते हैं, तो यह एक 'डबल अटैक' बन जाता है। यही वजह है कि वैज्ञानिक 140 साल से भी ज्यादा समय के बाद ऐसी भयंकर गर्मी की भविष्यवाणी कर रहे हैं।

    यह स्थिति बेहद दुर्लभ होती है- 1950 के बाद केवल कुछ बार ही ऐसा हुआ है। जैसे 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में भी कुछ असर देखने को मिला था। इस बार वैज्ञानिकों का अनुमान है कि नीनो 3.4 क्षेत्र में तापमान वृद्धि 2°C से ज्यादा पहुंच सकती है। न्यूयॉर्क के एट अल्बानी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पॉल राउंडी का कहना है कि 'पिछले 140 साल में सबसे मजबूत एल नीनो बनने की वास्तविक संभावना है।'

    140 साल पुराना खतरा?
    तापमान जितना ज्यादा बढ़ता है, अल नीनो के असर के और भी ज्यादा तेज होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। अल्बानी में स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क में वायुमंडलीय और पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. पॉल राउंडी ने लिखा कि '140 सालों में सबसे मजबूत अल नीनो घटना होने की वास्तविक संभावना है।' मियामी विश्वविद्यालय के एसोसिएट वैज्ञानिक डॉ. एंडी हेजल्टन ने लिखा कि सभी मॉडल और अवलोकन एक ही दिशा की ओर इशारा कर रहे हैं: इस साल एक बहुत मजबूत अल नीनो आएगा, जिसका वैश्विक जलवायु पर काफी असर पड़ेगा।

    इस बार ऐसा क्या होने वाला है?
    सुपर अल नीनो का असर सिर्फ गर्मी तक सीमित नहीं है; यह एक चेन रिएक्शन की तरह काम करता है। इसके मुख्य प्रभाव इस प्रकार होंगे-

    रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और भीषण लू
    ग्लोबल वार्मिंग पहले से ही धरती को गर्म कर रही है। 'सुपर अल नीनो' इस आग में घी का काम करेगा। भारत के कई हिस्सों, खासकर उत्तर और मध्य भारत में, दिन का तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर जा सकता है। भीषण लू (हीटवेव) का दौर लंबा और ज्यादा जानलेवा हो सकता है।

    मॉनसून पर ब्रेक- सूखे का खतरा

    भारत की पूरी कृषि व्यवस्था मॉनसून पर निर्भर है। अल नीनो का भारतीय मानसून से सीधा और उल्टा रिश्ता है।

        जब भी अल नीनो मजबूत होता है, भारत में मॉनसून कमजोर पड़ जाता है।
        इस साल बारिश कम होने और कई राज्यों में सूखे जैसे हालात पैदा होने की गहरी आशंका है।

    खेती और महंगाई पर सीधा असर

    बारिश कम होने और भयंकर गर्मी पड़ने से:

        धान और गन्ने जैसी फसलों की पैदावार गिर सकती है।
        खाद्य पदार्थों की कमी के कारण महंगाई आसमान छू सकती है।
        पीने के पानी का संकट गहरा सकता है क्योंकि नदियां और डैम सूखने लगेंगे।

    दुनिया भर में चरम मौसम

    अल नीनो सिर्फ भारत को नहीं रुलाएगा। इसके कारण:

        दक्षिण अमेरिका में भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।
        ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में भयंकर सूखा और जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ने की आशंका है।

    क्यों इस बार ‘सुपर’ एल नीनो की बात हो रही है?
    अप्रैल 2026 तक स्थिति ENSO-neutral यानी न तो एल नीनो, न ला नीना वाली है, लेकिन प्रशांत महासागर के नीचे के पानी में गर्मी तेजी से बढ़ रही है। यूरोपीय मॉडल NOAA, ECMWF और अन्य संस्थानों के पूर्वानुमान बताते हैं कि मई-जुलाई 2026 से एल नीनो उभर सकता है और सर्दियों (2026-27) तक मजबूत रहेगा। कुछ मॉडल बहुत मजबूत या सुपर स्तर का संकेत दे रहे हैं। 2024 पहले ही रिकॉर्ड गर्म साल था। मजबूत एल नीनो के साथ 2026 या 2027 नए रिकॉर्ड बना सकते हैं। कुछ अनुमान कहते हैं कि तापमान अस्थायी रूप से 1.5°C या उससे भी ज्यादा (कुछ मामलों में 2°C तक) पूर्व-औद्योगिक स्तर से ऊपर जा सकता है।

    News Desk

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