Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    CG News
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    CG News
    Home»देश»1984 के लोकसभा चुनाव में 2 सीटें, 1990 में आडवाणी की रथ यात्रा; फिर कैसे देश में खिलता गया कमल…
    देश

    1984 के लोकसभा चुनाव में 2 सीटें, 1990 में आडवाणी की रथ यात्रा; फिर कैसे देश में खिलता गया कमल…

    By February 4, 2024No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    1984 के लोकसभा चुनाव में 2 सीटें, 1990 में आडवाणी की रथ यात्रा; फिर कैसे देश में खिलता गया कमल…
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति की वह शख्सियत हैं, जिन्होंने अपने दौर की राजनीति को अपने प्रखर राष्ट्रवादी विचारों और अपनी रथ यात्राओं से प्रभावित किया।

    साथ ही उन्होंने धर्मनिरपेक्षता के विमर्श के मुकाबले हिंदुत्व की राजनीति के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय फलक पर मजबूती से स्थापित करने में मदद की।

    आडवाणी को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 9 वर्ष बाद यह सम्मान दिया गया है। दोनों नेताओं ने मिलकर 5 दशकों से अधिक समय तक जनसंघ और फिर भाजपा का नेतृत्व किया। 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 96 वर्षीय आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किये जाने की घोषणा की। इसी साल अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ है।

    राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा भाजपा के लिए अत्यंत भावनात्मक मुद्दे के विजयी समापन का प्रतीक है, जिसे 1990 में आडवाणी की राम रथ यात्रा के माध्यम से जनता में लोकप्रियता मिली।

    साथ ही हिंदुत्वादी पार्टी भाजपा के लगातार आगे बढ़ने का रास्ता खुला।  भाजपा के एक नेता ने कहा कि यह बहुत उपयुक्त है कि मंदिर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार को इस वर्ष मोदी सरकार ने सम्मान दिया है।

    आडवाणी की रथ यात्रा कैसे बनी जन आंदोलन
    भाजपा की ओर से राम मंदिर का मुद्दा उठाए जाने से पहले विश्व हिंदू परिषद सहित अन्य हिंदूवादी समूह मंदिर के लिए आंदोलन कर रहे थे। आडवाणी की रथ यात्रा को इसे एक जन आंदोलन बनाने का श्रेय दिया जाता है।

    मोदी स्वयं इस यात्रा के प्रमुख आयोजक थे। आडवाणी ने छद्म धर्मनिरपेक्षता और तुष्टिकरण की राजनीति जैसे वाक्यांश गढ़े हों या न गढ़े हों, लेकिन उन्होंने ही इन्हें हिंदुत्व की राजनीति के लोकप्रिय मुहावरे में बदल दिया।

    आडवाणी के समकालीनों ने राजनीतिक रणनीतिकार और संगठन-निर्माता के रूप में उनकी प्रशंसा की।

    उनकी अध्यक्षता में भाजपा ने 1989 में अपने पालमपुर सम्मेलन के दौरान मंदिर निर्माण के समर्थन में प्रस्ताव अपनाकर रामजन्मभूमि आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देने का फैसला किया, जिसे भक्त भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं।

    भाजपा के निश्चित रूप से दक्षिणपंथ की ओर मुड़ने की राजनीतिक क्षेत्र में चौतरफा निंदा हुई, लेकिन 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के बेहद खराब प्रदर्शन ने इसके कार्यकर्ताओं को निराशा कर दिया, जब वह केवल 2 सीटें जीत सकी।

    वर्ष 1990 में आडवाणी की रथ यात्रा को जबरदस्त समर्थन मिला।

    विभिन्न स्थानों पर सांप्रदायिक दंगे होने के बावजूद रथ यात्रा की लोकप्रियता ने भाजपा को पहली बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अपने दम पर सत्ता में ला दिया। पार्टी को अन्य राज्यों की एक प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित किया।
     
    जीवन का सबसे दुखद दिन किसे बताया 
    1992 में भीड़ की ओर से अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस को आडवाणी ने अपने जीवन का सबसे दुखद दिन करार दिया था, क्योंकि केंद्र में कांग्रेस सरकार द्वारा भाजपा शासित सभी 4 राज्यों की सरकारों को बर्खास्त करने से पार्टी को राजनीतिक अलगाव और कानूनी परेशानियों का डर था।

    आडवाणी की संगठनात्मक क्षमताओं और वैचारिक स्पष्टता ने नरम और अधिक लोकप्रिय वाजपेयी के साथ आदर्श तालमेल बिठाया। पार्टी सहयोगी ही नहीं, आलोचक भी आडवाणी की सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी पर जोर देने के लिए प्रशंसा करते हैं।

    कुख्यात हवाला डायरी में आडवाणी का नाम आने के बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था। कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा सहित उनके कुछ सहयोगियों के गंभीर आरोपों का सामना करने के बाद आडवाणी ने उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा था।

    एक नेता ने कहा कि 1995 में जब पार्टी पूरी तरह से उनके पीछे थी, तब वाजपेयी को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में नामित करने का उनका निर्णय वास्तव में पार्टी को खुद से पहले रखने का एक कदम था।

    विडंबना यह है कि जिस व्यक्ति ने हिंदुत्व की राजनीति को हाशिये से मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उन्हें खुद ही इसकी राजनीतिक वापसी का संदेह हो गया और जब ऐसा लगा कि 2004 के चुनाव में कांग्रेस के हाथों अप्रत्याशित हार के बाद भाजपा एक स्थिर स्थिति में पहुंच गई है, तो उन्होंने अधिक उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष छवि बनाने की कोशिश की।

    जिन्ना की मजार पर उनकी जमकर प्रशंसा
    2005 में अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान आडवाणी ने कराची में पाकिस्तान के संस्थापक एम.ए. जिन्ना की मजार पर उनकी बहुत प्रशंसा की।

    उन्होंने दावा किया कि दो-राष्ट्र सिद्धांत के प्रस्तावक धर्मनिरपेक्ष और हिंदू-मुस्लिम एकता के दूत थे। कराची ही आडवाणी का जन्मस्थान भी है।

    आडवाणी की टिप्पणियों से उनकी हिंदुत्ववादी छवि को भारी नुकसान पहुंचा। कई लोगों का मानना है कि आरएसएस के साथ उनके संबंधों पर स्थायी रूप से असर पड़ा।

    कई बार वह भाजपा की राजनीति में हिंदुत्ववादी संगठन के हस्तक्षेप की भी आलोचना करते थे। यह श्रेय भी पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को जाता है, जिसके तहत उन्होंने 2002 के दंगों के बाद मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री बने रहने के लिए समर्थन देने सहित नेताओं की एक पीढ़ी को तैयार किया।

    वह 2009 के आम चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, लेकिन भरपूर समर्थन नहीं मिला। आरएसएस की सक्रिय भूमिका वाली पार्टी ने अंततः उन्हें बाहर करने का फैसला किया और 2014 के चुनाव से पहले मोदी को अपने राष्ट्रीय चेहरे के रूप में आगे किया।

    मोदी के उत्थान और रणनीतिक कौशल को लेकर आडवाणी की नाराजगी ने उन्हें पार्टी के भीतर और भी कमजोर कर दिया। पार्टी कार्यकर्ता गुजरात के इस नेता (मोदी) के इर्द-गिर्द लामबंद हो गए, जिनके विकास और हिंदुत्व की राजनीति के कुशल उपयोग ने भाजपा को उस ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जिसे अनुभवी नेता ने असंभव माना होगा।

    हालांकि, आडवाणी को भारत रत्न सम्मान सत्तारूढ़ दल के भीतर उनकी और देश की राजनीति में निभाई गई मौलिक भूमिका की स्वीकार्यता को दिखाती है। 

    Related Posts

    RBI का नया नियम: किन लोगों को मिलेंगे ₹25,000? जानिए कौन उठा सकेगा इस सुविधा का लाभ

    June 26, 2026

    भारत-जापान शिखर सम्मेलन के लिए 1 जुलाई को भारत आएंगी जापान की प्रधानमंत्री, कई अहम समझौतों पर रहेगी नजर

    June 26, 2026

    ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक, वॉर मेमोरियल पर किया गया अंकित

    June 26, 2026

    केतन अग्रवाल हत्याकांड: फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस, पीड़ित परिवार से मिले CM फडणवीस

    June 26, 2026

    Pune Fort Case: सिया की WhatsApp चैट से बड़ा खुलासा! ट्रैकिंग का प्लान केतन का था या चेतन का? माता-पिता ने की कड़ी सजा की मांग

    June 26, 2026

    Passport Rule Change: 14 साल बाद पासपोर्ट बनवाना हुआ महंगा, 1 जुलाई से बढ़ेंगी फीस, जानें नई रेट लिस्ट

    June 26, 2026
    GAM
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    उत्तराखंड: पीएम सूर्य घर योजना के वेंडर्स पर कसेगा शिकंजा, लापरवाही या अधूरी फिटिंग पर बंद होगा पोर्टल अकाउंट

    June 26, 2026

    Uttarakhand News: शिवराज सिंह चौहान ने किया पूर्व छात्र सम्मेलन का उद्घाटन, सीएम धामी बोले- विकास की राह पर तेजी से बढ़ रहा उत्तराखंड…..

    June 26, 2026

    Uttarakhand News: शिवराज सिंह चौहान ने किया पूर्व छात्र सम्मेलन का उद्घाटन, सीएम धामी बोले- विकास की राह पर तेजी से बढ़ रहा उत्तराखंड…..

    June 26, 2026

    ​’जनता के द्वार, डिजिटल सरकार’: छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया चेहरा बना ‘सेवा सेतु’, ​धमतरी की लोमेश्वरी साहू की जुबानी, डिजिटल सशक्तिकरण और भरोसे की अनकही कहानी….

    June 26, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    Owner - Rakhi Roy
    Editor - Rahul Shende
    Mobile - 7089782411
    Email - cgnewsllive24@gmail.com
    Office - F 188, Aakash Ganga, Supela, Bhilai, Chhattisgarh
    June 2026
    M T W T F S S
    1234567
    891011121314
    15161718192021
    22232425262728
    2930  
    « May    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.