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    अमेरिका-हूती के बीच गुप्त डील की चर्चा, लाल सागर में बढ़त से सऊदी अरब की बढ़ी चिंता

    News DeskBy News DeskSeptember 18, 2026No Comments4 Mins Read
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    अमेरिका-हूती के बीच गुप्त डील की चर्चा, लाल सागर में बढ़त से सऊदी अरब की बढ़ी चिंता
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    दुबई 
    यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जूझ रहे सऊदी अरब के सामने अब नई मुश्किल खड़ी होती दिख रही है. सऊदी अरब के सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका और ईरान समर्थित हूतियों के बीच सीधे संपर्क की खबर सामने आई है. दोनों पक्षों के बीच ओमान में बातचीत हुई है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका और हूतियों के बीच कोई औपचारिक डील हुई है या नहीं। 

    मामला इसलिए अहम है क्योंकि हूतियों ने पिछले हफ्ते यमन के लाल सागर वाले इलाके में तेजी से बढ़त बनाई और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया. यह रास्ता सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद अहम है. इसी दौरान हूती ड्रोन और मिसाइल सऊदी शहरों और तेल से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बना रहे हैं. यहां तक कि मक्का में भी हूती ड्रोन को लेकर अलर्ट जारी हुआ। 

    अमेरिका-हूती के बीच ओमान में बातचीत
    रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के अधिकारियों और हूती प्रतिनिधियों के बीच पिछले वीकेंड ओमान की राजधानी मस्कट में मुलाकात हुई. यह बैठक ओमान की मध्यस्थता में हुई बताई गई है। 

    हूती प्रतिनिधिमंडल में मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्देलमलिक अल-अजीरी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे. रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया कि वे अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे और 2025 में हुए सीजफायर का पालन करेंगे। 

    बताया गया है कि हूतियों ने इजरायली जहाजों को निशाना बनाने की बात कही, लेकिन सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को निशाना बनाने की धमकी जारी रखी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा है कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को लगता है कि वह हालात पर नजर बनाए हुए है। 

    क्या अमेरिका ने हूतियों से डील कर ली?
    अभी तक अमेरिका या हूतियों की तरफ से किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच किसी तरह की समझ बनने के संकेत जरूर मिले हैं। 

    पूर्व अमेरिकी राजनयिक नबील खौरी ने इसे एक तरह की अनौपचारिक समझ बताया है. उनके मुताबिक, हूती अमेरिकी प्रशासन को यह भरोसा दे सकते हैं कि लाल सागर में अमेरिकी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा. खतरा मुख्य रूप से सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को रहेगा। 

    अमेरिका के लिए भी यह समझ अहम हो सकती है. ईरान के साथ जंग में उलझे अमेरिका के पास हूतियों के खिलाफ लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने के लिए पहले जैसी क्षमता नहीं है. ऐसे में लाल सागर में जहाजों की आवाजाही बनी रहे और अमेरिकी जहाज सुरक्षित रहें, तो वॉशिंगटन के लिए हूतियों से सीधी जंग से बचना अहम हो सकता है। 

    सऊदी अरब पर बढ़ा दबाव
    इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा दबाव सऊदी अरब पर पड़ता दिख रहा है. सऊदी समर्थित यमनी लड़ाके हूतियों को रोकने में अब तक कामयाब नहीं हुए हैं. सऊदी अरब के कई हवाई हमले भी हूतियों की पकड़ को निर्णायक रूप से खत्म नहीं कर पाए। 

    दूसरी तरफ पाकिस्तान और तुर्की ने भी यमन में सीधे लड़ाकू अभियान चलाने से इनकार किया है. अमेरिका और ब्रिटेन ने भी हूती ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की सऊदी मांग को स्वीकार नहीं किया है. यहां तक कि रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सऊदी ने खुफिया मदद के लिए इजरायल से भी संपर्क किया है। 

    ऐसे में अगर अमेरिका और हूतियों के बीच किसी तरह की समझ बनती है और हूती अमेरिकी या दूसरे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को छोड़कर सऊदी जहाजों को निशाना बनाते रहते हैं, तो सऊदी अरब पर दबाव और बढ़ सकता है। 

    यानी फिलहाल यह औपचारिक डील है या सिर्फ एक अनौपचारिक समझ, यह साफ नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि हूतियों के खिलाफ जंग में सऊदी अरब को अपने सबसे बड़े सहयोगियों से अपेक्षित सैन्य मदद नहीं मिल रही है और उसे बढ़ते खतरे का सामना ज्यादा अकेले करना पड़ सकता है। 

    News Desk

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