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    धामी सरकार का बड़ा फैसला, ‘हनुमान अंश’ होगी टैक्स-फ्री

    News DeskBy News DeskSeptember 5, 2026No Comments8 Mins Read
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    धामी सरकार का बड़ा फैसला, ‘हनुमान अंश’ होगी टैक्स-फ्री
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    देहरादून। उत्तराखंड की पहचान केवल हिमालय, नदियों और प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है। यह धरती सदियों से संतों, साधकों और आध्यात्मिक परंपराओं की तपोभूमि रही है। इसी आध्यात्मिक विरासत को बड़े पर्दे पर सामने लाने वाली फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि आध्यात्मिक गुरु नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित इस फिल्म को उत्तराखंड में टैक्स-फ्री किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं फिल्म देखने के बाद इसके संदेश से प्रभावित नजर आए। देहरादून के एक सिनेमा हॉल में उन्होंने अपनी पत्नी गीता धामी, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, प्रदीप बत्रा और कई विधायकों के साथ फिल्म देखी। इसके बाद उन्होंने फिल्म की विषयवस्तु और नीम करौली बाबा के जीवन-दर्शन की सराहना करते हुए इसे उत्तराखंड की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाला माध्यम बताया।

    फिल्म से सामने आया बाबा का जीवन-दर्शन
    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हनुमान अंश’ के माध्यम से लोगों को बाबा नीम करौली महाराज की तपस्या, त्याग, सेवा और भगवान हनुमान के प्रति उनकी अटूट आस्था को समझने का अवसर मिलता है। बाबा का जीवन केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं था, बल्कि मानव सेवा और समाज कल्याण को भी उन्होंने अपने जीवन का प्रमुख उद्देश्य बनाया। धामी ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बाबा नीम करौली महाराज का जीवन आज भी समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देता है—भक्ति केवल पूजा और साधना का नाम नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानव कल्याण का मार्ग भी है। यही संदेश ‘हनुमान अंश’ को सामान्य फिल्म से अलग एक आध्यात्मिक अनुभव का रूप देता है। फिल्म के माध्यम से एक ऐसे संत की जीवन-यात्रा को समझने का अवसर मिलता है, जिनकी शिक्षाओं और सेवा भाव ने देश ही नहीं, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को प्रभावित किया।

    कैंची धाम से जुड़ी आस्था को नई पहचान
    नीम करौली बाबा का नाम आते ही उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम की तस्वीर सामने आती है। आज कैंची धाम देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। बाबा के प्रति श्रद्धा रखने वाले लोगों के लिए कैंची धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति और सेवा की भावना से जुड़ा स्थान है। ऐसे में ‘हनुमान अंश’ के जरिए बाबा के जीवन और कैंची धाम से जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाना उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी फिल्म के संदर्भ में इसी व्यापक पहचान को रेखांकित किया। उनका मानना है कि ऐसी फिल्में उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया के सामने रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    टैक्स-फ्री करने के फैसले के पीछे संदेश
    ‘हनुमान अंश’ को उत्तराखंड में टैक्स-फ्री करने का मुख्यमंत्री का निर्णय केवल एक फिल्म को प्रोत्साहन देने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने का संदेश भी दिखाई देता है। उत्तराखंड लंबे समय से धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र रहा है। चारधाम यात्रा से लेकर हरिद्वार, ऋषिकेश, देवप्रयाग, नैनीताल और कैंची धाम तक राज्य की धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान बेहद व्यापक है। ऐसे में जब किसी फिल्म के केंद्र में उत्तराखंड से जुड़ी संत परंपरा और आध्यात्मिक विरासत हो, तो उसका राज्य में प्रोत्साहन पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान—दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण हो सकता है। धामी सरकार पहले से ही उत्तराखंड को धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर देती रही है। ‘हनुमान अंश’ को टैक्स-फ्री करने का फैसला इसी व्यापक सोच से जोड़कर देखा जा सकता है।

    दुखी युवक से संत बनने तक की यात्रा
    फिल्म की कहानी लक्ष्मी नारायण नाम के एक दुखी युवक के इर्द-गिर्द घूमती है। मां की मृत्यु के बाद उसके मन में जीवन, मृत्यु, ईश्वर और इंसानी दुखों को लेकर अनेक सवाल पैदा होते हैं। इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए वह उत्तर भारत की आध्यात्मिक यात्रा पर निकलता है। यह यात्रा केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि उसके भीतर चल रहे आत्मिक संघर्ष की यात्रा भी बन जाती है। यही यात्रा आगे चलकर उसे संत नीम करौली बाबा के रूप में स्थापित करती है। फिल्म बाबा के जीवन में प्रेम, सेवा, करुणा और मानव कल्याण की भावना को प्रमुखता से सामने लाती है। इस तरह फिल्म केवल एक संत की जीवनी बताने का प्रयास नहीं करती, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि मनुष्य के जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है और दुख, मृत्यु तथा ईश्वर जैसे प्रश्नों के बीच सेवा और करुणा का रास्ता किस तरह इंसान को नई दिशा दे सकता है।

    शुरुआत धीमी, लेकिन दर्शकों ने बदली तस्वीर
    ‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस यात्रा भी दिलचस्प रही है। फिल्म 7 अगस्त को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज हुई। शुरुआती दौर में फिल्म को बहुत तेज प्रतिक्रिया नहीं मिली और पहले दो सप्ताह में इसकी कमाई अपेक्षाकृत कम रही। लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों की प्रतिक्रिया बदली। सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच चर्चा बढ़ी और वर्ड-ऑफ-माउथ के जरिए फिल्म ने रफ्तार पकड़ ली। दिए गए ट्रेड आंकड़ों के अनुसार फिल्म ने बाद के दिनों में बेहतर प्रदर्शन किया और बॉक्स ऑफिस पर करीब ₹97.77 करोड़ का ग्रॉस तथा ₹82.88 करोड़ का नेट कलेक्शन दर्ज किया। यानी जिस फिल्म की शुरुआत अपेक्षाकृत धीमी रही, उसने दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के दम पर बाद में मजबूत पकड़ बनाई।

    सशक्त कलाकारों ने निभाई अहम भूमिका
    विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म में शोभिनव सत्य मुख्य भूमिका में हैं। उनके साथ विहान शेडगे, चंदन के आनंद, पूर्णिमा तिवारी, अनिल रस्तोगी, गुलशन पांडे और भगवानदास पटेल जैसे कलाकार भी फिल्म का हिस्सा हैं। फिल्म की कहानी और अभिनय के साथ इसका आध्यात्मिक विषय भी दर्शकों के बीच चर्चा का कारण बना। विशेष रूप से ऐसे समय में जब फिल्मों में आध्यात्मिक और वास्तविक जीवन से जुड़े पात्रों को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ रही है, ‘हनुमान अंश’ ने एक अलग तरह की कहानी को सामने रखा है।

    उत्तराखंड की आध्यात्मिक ब्रांडिंग का अवसर
    उत्तराखंड के लिए इस फिल्म का महत्व केवल सिनेमा तक सीमित नहीं है। यह राज्य की आध्यात्मिक ब्रांडिंग का भी एक अवसर है। आज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लोग योग, ध्यान, अध्यात्म और भारतीय दर्शन को समझने के लिए भारत आते हैं। उत्तराखंड इस क्षेत्र में पहले से ही एक मजबूत पहचान रखता है। ऋषिकेश को योग की वैश्विक राजधानी के रूप में पहचान मिली है, हरिद्वार धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है और चारधाम यात्रा उत्तराखंड की धार्मिक पहचान का सबसे बड़ा आधार है। इसी कड़ी में कैंची धाम और नीम करौली बाबा की परंपरा भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा में आई है। ऐसे में ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्में इस पूरी विरासत को कहानी और सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम कर सकती हैं।

    धामी का संदेश—भक्ति के साथ सेवा भी
    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का फिल्म को लेकर दिया गया संदेश इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। बाबा नीम करौली के जीवन को उन्होंने सेवा, समर्पण और मानव कल्याण से जोड़कर देखा। यही वह विचार है जो बाबा की शिक्षाओं को आज के दौर में भी प्रासंगिक बनाता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में जहां व्यक्ति लगातार तनाव, प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत उपलब्धियों के बीच उलझा हुआ है, वहां सेवा और करुणा का संदेश समाज को एक अलग दिशा देने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री ने फिल्म की टीम को प्रेरणादायक और आध्यात्मिक फिल्म बनाने के लिए बधाई दी। टैक्स-फ्री करने की घोषणा के जरिए सरकार ने इस विषय को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के लिए एक सकारात्मक संदेश भी दिया है।

    आस्था से पर्यटन तक, बढ़ सकता है प्रभाव
    किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान जब फिल्मों, साहित्य और कला के माध्यम से सामने आती है तो उसका प्रभाव पर्यटन तक भी पहुंच सकता है। ‘हनुमान अंश’ के मामले में यह संभावना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिल्म का संबंध उत्तराखंड की एक ऐसी आध्यात्मिक परंपरा से है, जिसकी अपनी वैश्विक पहचान बन चुकी है। कैंची धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बाबा नीम करौली का जीवन पहले से ही प्रेरणा का स्रोत है। फिल्म के माध्यम से उन लोगों तक भी यह कहानी पहुंच सकती है जो अभी कैंची धाम या उत्तराखंड की इस आध्यात्मिक परंपरा से परिचित नहीं हैं। इस दृष्टि से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का टैक्स-फ्री करने का फैसला संस्कृति, अध्यात्म, सिनेमा और पर्यटन—चारों क्षेत्रों को जोड़ने वाला कदम बन सकता है।

    एक फिल्म से आगे की कहानी
    ‘हनुमान अंश’ की कहानी अंततः एक संत के जीवन की कहानी जरूर है, लेकिन इसका संदेश इससे कहीं व्यापक है। यह कहानी मनुष्य के भीतर उठने वाले सवालों, जीवन के संघर्ष, ईश्वर की खोज और अंततः सेवा एवं करुणा के रास्ते तक पहुंचने की यात्रा है। उत्तराखंड सरकार का इसे टैक्स-फ्री करने का निर्णय इस कहानी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लिए भी यह पहल उत्तराखंड की उस पहचान को मजबूत करने का अवसर है, जिसमें हिमालय की शांति, गंगा की पवित्रता, संतों की साधना और सेवा की परंपरा एक साथ दिखाई देती है। कैंची धाम की बढ़ती वैश्विक पहचान और नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म के जरिए उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। ऐसे में ‘हनुमान अंश’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उत्तराखंड की उस आध्यात्मिक चेतना की कहानी भी बन रही है, जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार व्यापक स्तर पर देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अवसर के रूप में देख रही है।

    News Desk

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