Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    CG News
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    CG News
    Home»विदेश»एक्वेरियम से फैला किलर एल्गी, अमेरिका में मची पर्यावरणीय तबाही
    विदेश

    एक्वेरियम से फैला किलर एल्गी, अमेरिका में मची पर्यावरणीय तबाही

    News DeskBy News DeskAugust 3, 2026No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    एक्वेरियम से फैला किलर एल्गी, अमेरिका में मची पर्यावरणीय तबाही
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    वॉशिंगटन
     कई बहुत बड़ी पारिस्थितिक आपदाएं बहुत अप्रत्याशित स्थानों से शुरू होती हैं। अमेरिका में एक बड़े क्षेत्र के पानी से जुड़ी एक एक ऐसी ही आपदा की शुरुआत घरेलू एक्वेरियम से हुई। सेंटर फॉर इनवेसिव स्पीशीज रिसर्च की एक ऑनलाइन रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सजावटी समुद्री शैवाल कैलेरपा टैक्सिफोलिया (किलर एल्गी) 2000 में दक्षिणी कैलिफोर्निया के तटीय जल में फैल गया था। इसकी वजह एक एक्वेरियम मालिक के अवैध रूप से समुद्री पौधों को इसमें लगाना थी।

    एक्वेरियम से समुद्र में किलर एल्गी के पहुंचने की घटना एक पर्यावरणीय आपातकाल और 7 मिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत वाले छह साल के उन्मूलन अभियान में बदल गई। यह इस बात का सबसे नाटकीय उदाहरण है कि कैसे एक गैर-खतरनाक एक्वेरियम प्रजाति एक विनाशकारी आक्रामक खतरा बन सकती है।

    जानलेवा शैवाल का प्रकोप
    कैलेरपा टैक्सिफोलिया, जिसे आमतौर पर किलर एल्गी के नाम से जाना जाता है, कैरिबियन, हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों के उष्णकटिबंधीय जल में उत्पन्न होता है। इसकी आक्रामक कहानी यूरोप में शुरू हुई। 1980 के दशक में जर्मनी के स्टटगार्ट स्थित विल्हेल्मा चिड़ियाघर के एक्वेरियम प्रबंधकों ने प्रदर्शन टैंकों के लिए ठंडे वातावरण में उगने वाली एक किस्म विकसित की।

    साल 1984 में मोनाको के समुद्र विज्ञान संग्रहालय से यह संशोधित किस्म गलती से भूमध्य सागर में पहुंच गई और हजारों हेक्टेयर समुद्री तल पर फैल गई। कई समुद्री पौधों के विपरीत यह किस्म ठंडे पानी में उगती है। नम परिस्थितियों में 10 दिनों तक पानी के बाहर जीवित रह सकती है और चट्टानी रीफ, रेतीले तल, कीचड़ वाले मैदान, समुद्री घास के मैदानों और जलमग्न आवासों में पाई जाती है।

    यह इतनी तेजी से क्यों फैली?
    कैलेरपा टैक्सिफोलिया की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक इसकी प्रजनन क्षमता है। यह आक्रामक किस्म अलैंगिक विखंडन से प्रजनन करती है। यहां तक कि एक सेंटीमीटर का सबसे छोटा टुकड़ा नए पौधे में विकसित हो सकता है। समुद्री धाराओं, नावों के लंगरों, मछली पकड़ने के उपकरणों और जहाजों से निकले गिट्टी वाले पानी के माध्यम से टुकड़ों को अनजाने में लंबी दूरी तक ले जाया जा सकता है। इससे नई बस्तियां तेजी से स्थापित हो सकती हैं।

    एक बार जम जाने के बाद मजबूती की वजह से इस प्रजाति को कंट्रोल करना बहुत मुश्किल हो जाता है। शैवाल (एल्गी) के घने पानी के नीचे के मैदान सूरज की रोशनी को रोककर और कॉलर्पेनाइन नाम के जहरीले कंपाउंड छोड़कर स्थानीय समुद्री शैवाल, समुद्री घास और समुद्री अकशेरुकी जीवों का दम घोंट देते हैं। इससे स्थानीय आवास कम हो जाते हैं और मछलियां घट जाती हैं। इससे बायोडायवर्सिटी कम हो जाती है और समुद्री इकोसिस्टम बिगड़ जाता है।

    कैलिफोर्निया की महंगी लड़ाई
    कुछ मछलियां इस शैवाल को खाती हैं, उनके शरीर में जहर जमा हो जाता है। इससे वे इंसानों के खाने लायक नहीं रहतीं और स्थानीय मछली पकड़ने के उद्योग के लिए खतरा पैदा हो जाता है। कॉलर्पा के फैलने से भूमध्य सागर के कुछ इलाकों में तटीय इकोसिस्टम बुरी तरह बदल गए हैं और कमर्शियल रूप से महत्वपूर्ण मछली पकड़ने वाले इलाकों पर भी असर पड़ा है।

    अमेरिका के कैलिफोर्निया में शैवाल को खत्म करने की कोशिश में छह साल लगे और यह आधिकारिक तौर पर 2006 में खत्म हुई। इस पूरे अभियान में 7 मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का खर्च आया। कैलिफोर्निया में सैन डिएगो के पास आगुआ हेडिओंडा लैगून और बाद में लॉस एंजिल्स के पास हंटिंगटन हार्बर में शैवाल मिलने के बाद अधिकारियों ने तेजी से कदम उठाए।

    वैज्ञानिकों का लंबा संघर्ष
    वैज्ञानिकों ने प्रभावित इलाकों को पानी के नीचे बड़े तिरपालों से ढका, उन्हें रेत की बोरियों से सील किया और संक्रमण को खत्म करने के लिए नीचे क्लोरीन पंप किया। घेरे के अंदर क्लोरीन ने शैवाल को तो मार दिया लेकिन साथ ही कवर के नीचे फंसी मछलियों, पौधों और अन्य समुद्री जीवों को भी मार डाला।

    पर्यावरण के लिए कठोर होने के बावजूद इन कदमों को ही कैलिफोर्निया तट पर इस आक्रामक प्रजाति को फैलने से रोकने का एकमात्र व्यावहारिक विकल्प माना गया। इसे खत्म करने की कोशिश में छह साल लगे और यह आधिकारिक तौर पर 2006 में खत्म हुई, जिसमें 7 मिलियन अमेरिकी डॉलर का खर्च आया।

    News Desk

    Related Posts

    सेउटा में बड़ा माइग्रेंट संकट: 60 हजार लोगों की घुसपैठ, 67 की मौत के बाद बढ़ा तनाव

    August 3, 2026

    DR कांगो में इबोला का कहर: 3500 से ज्यादा मामले, WHO ने जताई बड़े खतरे की आशंका

    August 3, 2026

    PoK चुनाव पर बवाल: अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तान सेना पर लगाए गंभीर आरोप

    August 3, 2026

    ट्रंप के दावे को ईरान ने किया खारिज, बोला- हर हालात के लिए तैयार

    August 3, 2026

    भारत-अफगानिस्तान की बढ़ती नजदीकियों से बौखलाया पाकिस्तान, सेना ने दिया विवादित बयान

    August 3, 2026

    यूक्रेन का रूस पर बड़ा ड्रोन हमला, तेल रिफाइनरी में लगी भीषण आग

    August 2, 2026
    GAM
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    आज का मौसम 3 अगस्त: यूपी-बिहार से कश्मीर तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट, कई राज्यों में तेज हवाओं की चेतावनी

    August 3, 2026

    104 विकेट का मिला इनाम! आकिब नबी को पहली बार टीम इंडिया से बुलावा

    August 3, 2026

    दक्षिण भारत में बारिश का कहर, केरल में 8 मौतें; कर्नाटक में भूस्खलन से परिवार खत्म

    August 3, 2026

    एक्वेरियम से फैला किलर एल्गी, अमेरिका में मची पर्यावरणीय तबाही

    August 3, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    Owner - Rakhi Roy
    Editor - Rahul Shende
    Mobile - 7089782411
    Email - cgnewsllive24@gmail.com
    Office - F 188, Aakash Ganga, Supela, Bhilai, Chhattisgarh
    August 2026
    M T W T F S S
     12
    3456789
    10111213141516
    17181920212223
    24252627282930
    31  
    « Jul    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.