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    Home»विदेश»Iran-US War: ईरान ने अमेरिकी बेस पर बरसाईं मिसाइलें, जवाबी कार्रवाई में ट्रंप ने मचाई तबाही, सामने आईं सैटेलाइट तस्वीरें
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    Iran-US War: ईरान ने अमेरिकी बेस पर बरसाईं मिसाइलें, जवाबी कार्रवाई में ट्रंप ने मचाई तबाही, सामने आईं सैटेलाइट तस्वीरें

    News DeskBy News DeskJuly 13, 2026No Comments5 Mins Read
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    Iran-US War: ईरान ने अमेरिकी बेस पर बरसाईं मिसाइलें, जवाबी कार्रवाई में ट्रंप ने मचाई तबाही, सामने आईं सैटेलाइट तस्वीरें
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    तेहरान 
    ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक बड़े संघर्ष का रूप ले चुका है. हाल के दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं, जिसमें ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिका ने ईरान के अंदर सैन्य और अन्य सुविधाओं पर हमले कर तबाही मचा दी. सैटेलाइट इमेजरी इन घटनाओं की सच्चाई सामने ला रही है. ये तस्वीरें कम रिजोल्यूशन वाली हैं, लेकिन इनसे स्पष्ट होता है कि दोनों तरफ काफी नुकसान हुआ है। 

    ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले शुरू किए. ईरान ने पर्सियन गल्फ क्षेत्र में कई अमेरिकी सुविधाओं को टारगेट किया. इनमें जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर MQ-4C ट्राइटन ड्रोन हैंगर पूरी तरह नष्ट हो गया. कतर के अल-उदैद एयर बेस पर एक हैंगर को नुकसान पहुंचा। 

    बहरीन में यूएस 5th फ्लीट हेडक्वार्टर के पास स्टोरेज फैसिलिटी पर हमला हुआ. इसके अलावा, कुवैत में एक पुरानी यूएन बेस पर आग लगी, जिसे ईरान अमेरिका द्वारा HIMARS मिसाइल हमलों के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाता है. इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। 

     हमले ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई थे. अमेरिका और इजराइल के पहले के हमलों के बाद ईरान ने अपनी सेना को सक्रिय किया. सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि अमेरिकी बेस पर संरचनाएं क्षतिग्रस्त हुईं, हैंगर टूटे और उपकरण नष्ट हुए. हालांकि अमेरिका ने इन नुकसानों को कम करके बताया, लेकिन ओपन सोर्स इंटेलिजेंस और मीडिया विश्लेषण से ज्यादा व्यापक क्षति सामने आई. ईरान की मिसाइलें सटीक साबित हुईं, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा पर सवाल उठे। 

    दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान में भारी हमले किए. सैटेलाइट इमेजरी में बूशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट कॉम्प्लेक्स के अंदर एक बिल्डिंग पूरी तरह नष्ट दिख रही है. यह बिल्डिंग दो अतिरिक्त रिएक्टरों के निर्माण क्षेत्र का हिस्सा थी. मुख्य ऑपरेटिंग रिएक्टर से सिर्फ कुछ मीटर दूर थी। 

    EGYOSINT जैसे विश्लेषकों ने इन तस्वीरों का अध्ययन किया. IAEA चीफ राफेल ग्रॉसी ने पहले चेतावनी दी थी कि बूशहर पर सीधा हमला बड़े रेडियोलॉजिकल आपदा का कारण बन सकता है, जिसमें सैकड़ों किलोमीटर तक इलाके प्रभावित हो सकते हैं, जिसमें खाड़ी के अन्य देश भी शामिल हैं। 

    अमेरिकी हमलों में ईरान के तटीय ठिकानों, मिसाइल साइटों, ड्रोन सुविधाओं और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाया गया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों के जवाब में अमेरिका ने ये कार्रवाई की. ईरान के अनुसार, बूशहर प्रांत में सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर, फिशिंग पियर और मिलिट्री बेस भी प्रभावित हुए. अमेरिका का कहना है कि हमले सिर्फ सैन्य लक्ष्यों पर थे. सैटेलाइट तस्वीरें दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि और खंडन दोनों करती हैं। 

    इस संघर्ष के पीछे के कारण
    यह संघर्ष 2026 की शुरुआत में तेज हुआ, जब अमेरिका-इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू किए. ईरान ने जवाब में क्षेत्रीय ठिकानों पर मिसाइल दागे. जून में एक अस्थाई सीजफायर हुआ, लेकिन जुलाई में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमलों के बाद फिर तनाव बढ़ गया. ईरान इस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, जहां दुनिया का 20% तेल गुजरता है. अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय नौवहन की आजादी के लिए खतरा मानता है। 

    दोनों देशों की रणनीति अलग है. ईरान एसिमेट्रिक वॉरफेयर पर भरोसा करता है – मिसाइल, ड्रोन और प्रॉक्सी ग्रुप्स का इस्तेमाल. अमेरिका एयर सुपीरियरिटी और सटीक हमलों पर निर्भर है. सैटेलाइट इमेजरी इस युद्ध को पारदर्शी बना रही है, जहां पहले की तरह दावों को आसानी से छिपाया नहीं जा सकता। 

    इस संघर्ष से पूरा मध्य पूर्व प्रभावित है. जॉर्डन, कतर, बहरीन, कुवैत जैसे देशों के बेस प्रभावित होने से इनकी सुरक्षा चिंता बढ़ गई है. बूशहर के पास हमले से रेडियोलॉजिकल रिस्क की आशंका है, जो पड़ोसी देशों के लिए भी खतरा है. तेल की कीमतें बढ़ी हैं. शिपिंग प्रभावित हुई है. अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। 

    IAEA और अंतरराष्ट्रीय समुदाय न्यूक्लियर सुरक्षा पर चिंतित हैं. अगर बूशहर रिएक्टर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होता तो बड़े पैमाने पर निकासी की जरूरत पड़ सकती थी. फिलहाल प्लांट ऑपरेशनल है, लेकिन जोखिम बना है। 

    यह संघर्ष डिप्लोमेसी की जरूरत को रेखांकित करता है. दोनों पक्ष बातचीत चाहते हैं, लेकिन विश्वास की कमी और क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं रुकावट हैं. सैटेलाइट तस्वीरें सबूत के रूप में काम आ रही हैं, जो भविष्य में जवाबदेही तय करने में मदद करेंगी। 

    ईरान-अमेरिका टकराव न सिर्फ दो देशों का मुद्दा है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा है. सैटेलाइट इमेजरी जैसे टूल्स से युद्ध की सच्चाई सामने आ रही है, जो पारंपरिक मीडिया से ज्यादा प्रभावी साबित हो रही है। 

    दुनिया इस स्थिति पर नजर रखे हुए है. अगर तनाव और बढ़ा तो बड़े स्तर का युद्ध हो सकता है, जिसके आर्थिक और मानवीय नुकसान बहुत ज्यादा होंगे. शांति वार्ता और संयम ही इस संकट का समाधान लगता है. दोनों पक्षों को समझना होगा कि युद्ध से कोई भी पक्ष पूरी तरह विजेता नहीं बन सकता। 

    News Desk

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