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    मलक्का में भारत की रणनीतिक एंट्री, सबांग पोर्ट बनेगा हिंद महासागर का नया गेमचेंजर

    News DeskBy News DeskJuly 8, 2026No Comments6 Mins Read
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    मलक्का में भारत की रणनीतिक एंट्री, सबांग पोर्ट बनेगा हिंद महासागर का नया गेमचेंजर
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     नई दिल्ली

    32 किलोमीटर का एक समुद्री पैसेज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की राजनीति और कूटनीति में कैसे उथल-पुथल मचा सकता है. ईरान वॉर के दौरान इसे पूरी दुनिया ने देख लिया. ईरानी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर के मुल्कों का ईंधन सप्लाई चोक कर दिया. कच्चे तेल की कीमतें दनादन बढ़ने लगी. आखिर दुनिया की 20 फीसदी इंधन सप्लाई इसी होर्मुज से होती है। 

    अब भारत और इंडोनेशिया मिलकर हिंद महासागर में अपना 'होर्मुज' बनाएंगे. ये 'होर्मुज' स्ट्रेट ऑफ मलक्का के एंट्री पॉइंट पर स्थित है. यहां से भारत के अंडमान निकोबार द्वीप समूह में स्थित इंदिरा पॉइंट मात्र 100 मील की दूरी पर है. इस कदम के साथ भारत और इंडोनेशिया हिंद महासागर में चीन का सारा गेम प्लान बदल देंगे। 

    दरअसल हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी समुद्री रणनीति को नई धार देते हुए भारत और इंडोनेशिया ने सबांग पोर्ट के संयुक्त विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है.  सूत्रों के अनुसार दोनों देशों ने इंडोनेशिया के सबांग बंदरगाह को विकसित करने पर सहमति बनाई है. इसे आधुनिक रूप दिया जाएगा और इस द्वाप पर भारत का दखल बढ़ेगा। 

    इंडोनेशिया दौरे पर गए पीएम नरेंद्र मोदी ने वहां के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किया है। सबांग बंदरगाह दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के प्रवेश द्वार पर स्थित है.खास बात यह है कि सबांग पोर्ट भारत के महत्वाकांक्षी ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से लगभग 100 मील की दूरी पर है। 

    आइए मलक्का स्ट्रेट को थोड़ा विस्तार से समझें और इसकी अहमियत को जानें

    चन्नई से दक्षिण पूर्व में आगे बढ़ते चले जाएं. एकदम आगे. चेन्नई के तट से समुद्री रास्ते पर आगे बढ़ें, तो जहाज पहले बंगाल की खाड़ी पार करता है, फिर अंडमान सागर की ओर जाता हुआ मलक्का जलडमरूमध्य तक पहुंचता है। 

    हजारों साल पहले, जब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मसालों की खुशबू समुद्री हवाओं के साथ फैल रही थी, तब नाविकों ने एक संकरे लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ते को पहचानना शुरू किया. यह स्ट्रेट यानी कि जलडमरूमध्य हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। 

    आज यहां से दुनिया का लगभग 25 प्रतिशत व्यापार होता है. इसमें तेल, चीनी सामान, कोयला और पाम ऑयल अहम है. सिंगापुर इसके दक्षिणी छोर पर स्थित विश्व का प्रमुख बंदरगाह है। 

    सबांग पोर्ट मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित है.
    भारत के लिए इसका महत्व अत्यंत रणनीतिक और आर्थिक है. भारत का पूर्वी एशिया जैसे चीन, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ होने वाला बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है. भारत के पेट्रोलियम उत्पादों, कोयले, मशीनरी और कंटेनर व्यापार के लिए यह समुद्री जीवनरेखा जैसा है. साथ ही “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया से संपर्क मजबूत करने में भी इसकी अहम भूमिका है। 

    वैश्विक स्तर पर यह स्ट्रेट ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख धमनियों में गिना जाता है. पश्चिम एशिया से निकलने वाला कच्चा तेल और गैस बड़ी मात्रा में इसी रास्ते से पूर्वी एशियाई देशों तक पहुंचता है। 

    Strait of Malacca से हर साल करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 2,800 अरब डॉलर का माल हर वर्ष गुजरता है.

    चीन के लिए क्या अहमियत है?
    चीन के लिए मलक्का जलडमरूमध्य उसकी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन है. हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर को जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक रास्तों में से एक है. चीन के आयातित तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और अफ्रीका से इसी रास्ते होकर चीन पहुंचता है. इसके अलावा चीन के निर्यात-आधारित व्यापार का भी बड़ा हिस्सा मलक्का स्ट्रेट पर निर्भर है।  

    पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने 2003 में "मलक्का दुविधा" का जिक्र करते हुए कहा था कि यदि किसी संकट या युद्ध की स्थिति में यह मार्ग बाधित हो जाए, तो चीन की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। 

    अब समझिए इसी मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर सबांग द्वीप है और इसकी द्वीप को भारत इंडोनेशिया के साथ मिलकर विकसित करेगा। 

    रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह समझौता केवल एक बंदरगाह विकास परियोजना नहीं, बल्कि हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती समुद्री उपस्थिति का संकेत है। 

    सबांग पोर्ट इंडोनेशिया के आचेह प्रांत में स्थित है और मलक्का जलडमरूमध्य के पश्चिमी मुहाने पर नजर रखता है. यहां से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर निगरानी रखना अपेक्षाकृत आसान है. भारत लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. 2018 में भी भारत और इंडोनेशिया के बीच सबांग पोर्ट को लेकर सहयोग की रूपरेखा बनी थी, लेकिन अब दोनों देशों के संबंधों और इंडो-पैसिफिक की बदलती भू-राजनीति को देखते हुए इस परियोजना को नई गति मिलने की उम्मीद है। 

    एक और ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट दूसरी ओर सबांग बंदरगाह
    बता दें कि भारत अंडमान निकोबार में ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. यह भारत की एक महत्वाकांक्षी बहु-आयामी विकास योजना है, इसमें एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, बिजली संयंत्र और आधुनिक टाउनशिप का निर्माण शामिल है, ताकि भारत मलक्का जलडमरूमध्य के पास एक प्रमुख समुद्री और लॉजिस्टिक्स हब बन सके।  

    यह परियोजना भारत की व्यापारिक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक मौजूदगी को भी मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। 

    अब भारत ने इंडोनेशिया के साथ मिलकर सबांग पोर्ट को डेवलप करने की योजना बनाई है। 
    विशेषज्ञों का मानना है कि सबांग और ग्रेट निकोबार परियोजनाओं का संयुक्त प्रभाव भारत को मलक्का जलडमरूमध्य के दोनों ओर रणनीतिक पहुंच प्रदान कर सकता है.  ग्रेट निकोबार द्वीप भारत के अंडमान-निकोबार समूह का सबसे दक्षिणी हिस्सा है और वहां विकसित हो रहा ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट भारत की समुद्री महत्वाकांक्षाओं का अहम हिस्सा माना जाता है. दूसरी ओर सबांग पोर्ट में भारत की भागीदारी उसे इंडोनेशिया के साथ मिलकर क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर देगी। 

    चीन के स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स को भारत का जवाब
    इस समझौते का एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक पहलू भी है. पिछले एक दशक में चीन ने "बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव" और "स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स" रणनीति के तहत हिंद महासागर क्षेत्र में कई बंदरगाहों और समुद्री परियोजनाओं में निवेश किया है. पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हम्बनटोटा और म्यांमार का क्याउकफ्यू बंदरगाह अक्सर इसी संदर्भ में चर्चा में रहते हैं. ऐसे में सबांग पोर्ट का विकास भारत को क्षेत्रीय संतुलन बनाने और अपने समुद्री हितों की रक्षा करने में मदद कर सकता है। 

    भारत और इंडोनेशिया दोनों ही मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक व्यवस्था के समर्थक हैं. समुद्री व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं. सबांग पोर्ट परियोजना इसी साझा दृष्टिकोण का विस्तार मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में यदि सबांग और ग्रेट निकोबार परियोजनाएं पूरी क्षमता से विकसित होती हैं, तो भारत को हिंद महासागर से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक एक मजबूत रणनीतिक श्रृंखला मिल सकती है. यह न केवल व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शक्ति-संतुलन राजनीति में भी अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करेगा। 

    News Desk

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