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    होर्मुज संकट में भी भारत की रणनीति सफल, ईंधन संकट टला: सरकार का दावा

    News DeskBy News DeskJune 29, 2026No Comments6 Mins Read
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    होर्मुज संकट में भी भारत की रणनीति सफल, ईंधन संकट टला: सरकार का दावा
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    नई दिल्ली
     मिडिल ईस्ट में संघर्ष और होर्मुज के बंद होने के कारण पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ था। वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भी भारत सीना तान खड़ा रहा है और अपनी कुशल रणनीति और पूर्व तैयारी के बल पर ईंधन संकट को पूरी तरह टाल लिया। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग के चार महीने तक बंद रहने के बावजूद देश में पेट्रोल पंपों पर कोई लंबी कतारें नहीं लगीं, घरों में एलपीजी सिलेंडर की कमी नहीं हुई और आर्थिक गतिविधियां लगभग सामान्य रहीं। सरकार के दूरदर्शी बुनियादी ढांचा विकास, आपूर्ति विविधीकरण और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने इस अभूतपूर्व चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया।

    दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद कर दिया। यह समुद्री जल मार्ग विश्व के कुल तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है। बंदी के तुरंत बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारी व्यवधान उत्पन्न हो गया और कीमतों में आग लग गई।

    यहां आपको बता दें कि भारत अपने कच्चे तेल का करीब 90 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है, विशेष रूप से प्रभावित होने वाला देश था। देश के कुल तेल आयात का लगभग 50 प्रतिशत और एलपीजी आयात का 90 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता था। संकट लगभग चार महीने तक चला। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश होने के कारण इस संकट का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका थी।

    कीमतों में भारी उछाल
    संकट लंबा खिंचने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चली गईं। भारतीय कच्चे तेल की कीमतें संकट से पहले के 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से बढ़कर चार सप्ताह के अंदर 120 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गईं। ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्चतम स्तर को छू गया। सऊदी अरब में एलपीजी अनुबंध मूल्य में फरवरी से जून के बीच करीब 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की आयात लागत 1600 रुपये से ऊपर पहुंच गई। युद्ध-जोखिम बीमा दरों में कई गुना वृद्धि हुई, जिससे आयात और महंगा हो गया।

    भारत की सफल रणनीति
    सरकार ने संकट शुरू होते ही कुछ ही दिनों में सख्त नियंत्रण आदेश जारी कर दिए। रणनीति के तहत सरकार ने घरेलू उत्पादन में तीव्र वृद्धि की। पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में छूट, आक्रामक आपूर्ति स्रोत विविधीकरण और सक्रिय ऊर्जा कूटनीति पर जो दिया। सरकार ने मांग प्रबंधन पर जोर दिया और फैसला लिया कि लागत का बोझ आम परिवारों पर न डाला जाए, बल्कि इसे सार्वजनिक क्षेत्र की विपणन कंपनियों के माध्यम से वहन किया जाए। इस फैसले से ईंधन की घरेलू उपलब्धता बनी रही।

    पिछले दस वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए गए भारी निवेश ने संकट के समय काम किया। एलपीजी आयात टर्मिनलों की संख्या 2014 में 11 से बढ़कर वर्तमान में 22 हो गई है। आयात क्षमता भी 12 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़कर 2026 में 32.3 मिलियन टन प्रति वर्ष पहुंच गई।

    कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ। 2014 में 27 देशों से आयात करने वाला भारत अब 2026 में 41 देशों से तेल खरीद रहा है। लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए आपूर्तिकर्ता जुड़े, जबकि अमेरिका और रूस से आयात में खासी बढ़ोतरी हुई। परिणामस्वरूप, होर्मुज पर निर्भरता पहले की तुलना में काफी कम हो गई। वहीं, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के विस्तार से भी हर साल कच्चे तेल के आयात में बड़ी बचत हो रही है, जो संरचनात्मक संतुलन बनाए रखने में सहायक सिद्ध हुआ।

    आर्थिक प्रभाव और सरकार का खर्च
    दो महीने से अधिक समय तक खुदरा कीमतों को स्थिर रखने के बाद विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। फिलहाल तेल कंपनियां प्रतिदिन करीब 650 करोड़ रुपये की वसूली में असफल हो रही हैं, जो पहले 1000 करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर पर थी। सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की, जिससे राजस्व में लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस तिमाही में तेल और गैस कंपनियों को 1 लाख से 1.2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि, सरकार का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और होर्मुज के फिर से खुलने से आने वाले महीनों में खुदरा कीमतों में गिरावट आएगी।

    अन्य देशों की तुलना में भारत का बेहतर प्रदर्शन
    होर्मुज संकट से निपटने के लिए दुनिया भर के देशों ने अलग-अलग रणनीतियां अपनाईं। कई एशियाई आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं को ईंधन की कमी का सामना करना पड़ा। श्रीलंका ने दो सप्ताह में पेट्रोल राशनिंग लागू कर दी और सरकारी कामकाज को चार दिन के सप्ताह में सीमित कर दिया। पाकिस्तान ने स्कूल बंद किए और कार्य सप्ताह छोटा किया। म्यांमार ने विषम-सम ड्राइविंग और क्यूआर कोड आधारित राशनिंग लागू की। बांग्लादेश ने तेल भंडारों पर सेना तैनात कर दी, जबकि इथियोपिया ने कुछ क्षेत्रों में ईंधन आपूर्ति पूरी तरह रोक दी।

    धनी देशों ने भी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों का इस्तेमाल किया। जापान ने भंडार कम किए और सब्सिडी दी, दक्षिण कोरिया ने 30 वर्षों में पहली बार कीमतों पर नियंत्रण लगाया। यूरोपीय संघ के 22 सदस्य देशों ने अप्रैल के मध्य तक 9 अरब यूरो से अधिक की राहत पैकेज घोषित किए। इसके विपरीत, भारत ने न तो आपातकाल घोषित किया, न राशनिंग लगाई और न ही स्कूल या कार्य घंटे कम किए। केवल व्यावसायिक और थोक एलपीजी, डीजल तथा एविएशन ईंधन के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए गए, ताकि घरेलू जरूरतें पूरी हो सकें।

    आर्थिक स्थिरता बरकरार
    संकट के दौरान भारत की विदेशी मुद्रा भंडार 728 अरब डॉलर से अधिक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया और पूरे संकट काल में स्थिर रहा। जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत के आसपास बनी रही। चालू खाता घाटा नियंत्रण में रहा और खुदरा मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के लक्ष्य के अंदर रही।

    होर्मुज खुलने के बाद अब क्या?
    जून में अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज फिर से खुल गया। अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी हटा ली। भारतीय ध्वज वाला पहला एलएनजी वाहक पोत 'दिशा' लगभग 62,000 टन माल लेकर तीन महीने बाद सुरक्षित लौट आया। कच्चे तेल की कीमतें अब 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं और आगे और गिरने की संभावना है। हालांकि, बारूदी सुरंग हटाने और फंसे जहाजों को निकालने में कुछ समय लगेगा।

    भारत के पास फिलहाल कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी का दो महीने का भंडार है। आईएसपीआरएल के तहत 5.33 मिलियन टन रणनीतिक भंडार उपलब्ध है, जो करीब तीन सप्ताह के लिए पर्याप्त है। चांदीखोल और पादुर विस्तार परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यह क्षमता 21 दिनों तक बढ़ जाएगी। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की इस संकट प्रबंधन की सफलता न केवल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि भविष्य के किसी भी संकट के लिए देश को बेहतर तैयार करेगी।

    News Desk

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