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    BRICS में PM मोदी की कूटनीतिक चाल, ट्रंप का पैंतरा पड़ा फीका; चीन भी बढ़ाना चाहता है दोस्ती का हाथ

    News DeskBy News DeskJune 26, 2026No Comments9 Mins Read
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    BRICS में PM मोदी की कूटनीतिक चाल, ट्रंप का पैंतरा पड़ा फीका; चीन भी बढ़ाना चाहता है दोस्ती का हाथ
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    नई दिल्ली
    इस वक्त पूरी दुनिया ट्रंप की डील और अमेरिका-ईरान की बातचीत पर चर्चा कर रही है.
    लेकिन ग्लोबल पॉलिटिक्स की असली हलचल भारत में मची हुई है. ट्रंप की डील अब पूरी तरह कबाड़ होती दिख रही है. ईरान कुछ और कह रहा है और ट्रंप के बयान अलग आ रहे हैं. दुनिया यह तमाशा देख रही है कि अमेरिका में चल क्या रहा है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत बड़ा ग्लोबल मैसेज दे दिया है. अमेरिका से ईरान हैंडल नहीं हो रहा है. लेकिन नरेंद्र मोदी ने चीन-अमेरिका और ईरान-इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को एक जगह ला दिया है. भारत अब इन सभी देशों के साथ बड़ी डील कर रहा है. नरेंद्र मोदी वह काम कर रहे हैं जो दुनिया में कोई सोच भी नहीं सकता. ग्लोबल पॉलिटिक्स का पूरा नैरेटिव अब भारत ने चेंज कर दिया है. मोदी ने भारत की डिप्लोमेसी को सुपरफास्ट ट्रैक पर दौड़ा दिया है. दुनिया अब अमेरिका नहीं बल्कि भारत की तरफ देख रही है। 

    ब्रिक्स की मीटिंग में पीएम मोदी ने ट्रंप को कैसे दे दिया सबसे बड़ा झटका?
    कुछ महीने पहले तक डॉनल्ड ट्रंप ब्रिक्स को लेकर बड़ी धमकियां देते थे. ट्रंप ब्रिक्स का नाम लेकर दुनिया को धमकाते थे कि ऐसा मत करो. लेकिन आज ट्रंप की ऐसी हालत है कि कोई उनका लोड नहीं ले रहा है. नरेंद्र मोदी तो ट्रंप का बिल्कुल भी लोड नहीं लेते. पीएम मोदी ने पहले ट्रंप को मुंह पर सीधा सुना दिया था. अब ब्रिक्स देशों की मीटिंग से मोदी ने तगड़ा मैसेज दे दिया है। 

    भारत में ब्रिक्स देशों के एनएसए की अहम मीटिंग हो रही है. पीएम मोदी खुद इस ग्लोबल मीटिंग में पहुंच गए. वहां ब्रिक्स नेताओं की ग्रुप फोटो हुई और वन-टू-वन मुलाकात भी हुई. पीएम मोदी ने जो कड़क मैसेज दिया है, उससे ट्रंप के लोगों में हड़कंप मच गया है. पीएम मोदी ने कहा कि बदलते ग्लोबल हालात में ब्रिक्स की भूमिका बहुत अहम है. उन्होंने आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर बहुत ज्यादा जोर दिया। 

    पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि भारत ग्लोबल साउथ का पूरा समर्थन करेगा. भारत एक सुरक्षित और समावेशी दुनिया बनाने के लिए अपनी ताकत लगाएगा. पीएम मोदी ने एक ही मीटिंग से दो बड़े काम निपटा दिए हैं. एक तरफ ब्रिक्स को अहम बताकर अमेरिका को पीछे हटने का मैसेज दे दिया. दूसरी तरफ ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद का मुद्दा उठाकर सबको अलर्ट कर दिया। 

    ट्रंप को अमेरिका में वोट वाला झटका कैसे लगा और अब वह क्या बहाने बना रहे हैं?
        अमेरिका में मध्‍यावधि चुनाव बहुत नजदीक हैं और डॉनल्ड ट्रंप लगातार दावे कर रहे हैं. लेकिन ट्रंप को हाल ही में एक बहुत बड़ा वोट वाला झटका लगा है. अमेरिका के भीतर ही ट्रंप का वोट बेस अब खिसकता हुआ नजर आ रहा है. ट्रंप पहले जो वादे कर रहे थे, अब वहां की जनता उन पर सवाल उठा रही है. चुनाव में अपनी स्थिति कमजोर होते देख ट्रंप अब रोज नए बहाने बना रहे हैं। 

        ट्रंप खुद कह चुके हैं कि अगर दुनिया में कुछ हुआ तो वह भारत के साथ खड़े होंगे. ट्रंप को यह अच्छे से पता है कि भारतीय मूल के वोटर अमेरिका में क्या ताकत रखते हैं. इसलिए ट्रंप अब भारत और पीएम मोदी की तारीफ करके अपना वोट बैंक बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनकी खुद की विदेश नीति अब पूरी तरह से फेल हो चुकी है। 

        ईरान को लेकर ट्रंप का स्टैंड अमेरिका में ही एक बड़ा मजाक बन गया है. ट्रंप को समझ नहीं आ रहा है कि इस बड़े ग्लोबल शिफ्ट को कैसे हैंडल किया जाए. अब ग्लोबल पॉलिटिक्स ऐसे नहीं चलेगी कि सब कुछ सिर्फ ट्रंप की मर्जी से होगा. अमेरिका जो तय कर लेगा अब दुनिया में वही नियम नहीं चलने वाला है। 

    चीन के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात में पीएम मोदी ने कौन सा बड़ा खेल कर दिया?
    ट्रंप के लिए सबसे बड़ा मैसेज यह है कि मोदी ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की. ब्रिक्स की बैठक में वांग यी के साथ हुई बातचीत की डिटेल से अमेरिका परेशान हो जाएगा. चीन के विदेश मंत्री ने बताया कि मोदी ने शी जिनपिंग को शुभकामनाएं भेजने को कहा है. पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों देशों को अपनी पारंपरिक दोस्ती आगे बढ़ानी चाहिए. दोनों देश हाई लेवल बातचीत जारी रखें और ग्लोबल साउथ के हितों को पूरी तरह सुरक्षित करें. चीन के साथ पीएम मोदी की इस बात से अमेरिका को जरूर बड़ी आग लग जाएगी। 

    ट्रंप तो शुरू से ही ब्रिक्स और चीन के बिल्कुल खिलाफ रहे हैं. चीन ने भी साफ कर दिया है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, ‘दोनों देश एकजुटता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.’ चीन अब ब्रिक्स की अध्यक्षता में भारत की जिम्मेदारियों का पूरा समर्थन करेगा. चीन अब भारत के साथ भरोसा बढ़ाने और संदेह दूर करने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीन के बयान से साफ है कि वह भारत से टकराव नहीं बल्कि दोस्ती चाहता है। 

    ईरान और इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को पीएम मोदी कैसे एक साथ हैंडल कर रहे हैं?

        ब्रिक्स की अहम बैठक से अलग पीएम मोदी ने ईरान के टॉप अधिकारियों से भी मुलाकात की है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी डॉ गदीर निजामीपुर पीएम मोदी से मिले. यह मीटिंग ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका ने ईरान के तेल पर भारी छूट दी है। 

        ग्लोबल मार्केट में ईरान का तेल आने से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पीएम मोदी को ईरान आने का बड़ा न्योता दिया है. उन्होंने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के विदाई कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण भेजा है. यहां लोग कह रहे थे कि इजराइल से दोस्ती के चक्कर में भारत ने ईरान से रिश्ते बिगाड़ लिए. लेकिन मोदी ईरान के टॉप अधिकारियों से मिलकर नया ग्लोबल नैरेटिव सेट कर रहे हैं। 

        उधर भारत इजराइल से भी अपने रिश्तों को लगातार और ज्यादा मजबूत कर रहा है. सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इजराइल के रक्षा मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल से मिले. दोनों देशों के बीच डिफेंस सहयोग बढ़ाने और ज्वाइंट प्रोडक्शन पर अहम बातचीत हुई है. एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ इजराइल के साथ भारत का यह बैलेंस अमेरिका को हैरान कर रहा है। 

    मोदी सरकार ने कौन सी विदेशी फंडिंग रोक दी जिससे इकोसिस्टम की कमर टूट गई?

    नरेंद्र मोदी एक तरफ भारत को ग्लोबल पॉलिटिक्स के सेंटर में पूरी तरह ला रहे हैं. दूसरी तरफ मोदी उस इकोसिस्टम पर भी कड़ी स्ट्राइक कर रहे हैं जो सरकार गिराने का काम करता है. यह विदेशी इकोसिस्टम पीएम मोदी को कुर्सी से हटाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है. लेकिन मोदी सरकार ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है जिसने इस इकोसिस्टम की कमर तोड़ दी है. सरकार ने विदेशी फंडिंग वाले कई बड़े एनजीओ के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए हैं। 

    देश में अशांति फैलाने और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए विदेशों से भारी फंडिंग आती थी. मोदी सरकार ने इस अवैध फंडिंग के पाइपलाइन को ही पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है. विदेशी पैसे से चलने वाला सरकार गिराने का यह बड़ा ‘हथियार’ अब हमेशा के लिए निपट गया है. इसी वजह से इस पूरे लेफ्ट इकोसिस्टम में अब भारी हंगामा मचा हुआ है. बिना विदेशी पैसे के यह गैंग अब भारत में अपना झूठा एजेंडा नहीं चला पा रहा है. भारत के खिलाफ काम करने वाले सभी संगठनों की फंडिंग पर अब सरकार की सख्त नजर है। 

    एफएटीएफ के डर से पाकिस्तान के पसीने क्यों छूट रहे हैं और यूएई को क्या चाहिए?
        डॉनल्ड ट्रंप ने ग्लोबल कूटनीति में अमेरिका का जो भरोसा था उसे पूरी तरह हिला दिया है. आज दुनिया भारत की तरफ एक भरोसेमंद और पावरफुल पार्टनर के रूप में देख रही है. पाकिस्तान से अपना मुल्क नहीं संभल रहा है और वह भारत पर अटैक करने की बातें करता है. पाकिस्तान बुरी तरह से अलबलाया हुआ है क्योंकि उसे भारत की ताकत का अंदाजा है. पाकिस्तान को डर है कि भारत कभी भी उस पर एक बड़ा मिलिट्री स्ट्राइक कर सकता है। 

        दूसरी तरफ एफएटीएफ की नंगी तलवार भी पाकिस्तान की गर्दन पर लगातार लटकी हुई है. एफएटीएफ की ग्लोबल मीटिंग में पाकिस्तान के टेरर फंडिंग को लेकर बड़ा एक्शन लिया जा सकता है. पाकिस्तान अगर आतंकवाद को पालेगा तो एफएटीएफ उसे फिर से अपनी ब्लैक लिस्ट में डाल देगा. भारत एफएटीएफ में पाकिस्तान के सभी काले कारनामों के पक्के सबूत पेश करने की तैयारी कर चुका है.
        इधर गल्फ के देश अब डिफेंस के लिए अमेरिका की जगह भारत की तरफ देख रहे हैं. यूएई भारत से सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए बहुत अहम बातचीत कर रहा है. यूएई को ब्रह्मोस के साथ-साथ भारत का फुली ऑटोमेटेड आकाशतीर सिस्टम भी तुरंत चाहिए. ब्रह्मोस मिसाइल ने ही ऑपरेशन सिंदूर में कमाल किया था और पाकिस्तान के एयरबेस फोड़ दिए थे। 

    भारत का डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट किस तरह से दुनिया के रिकॉर्ड तोड़ रहा है?
    भारत का डिफेंस सेक्टर अब ग्लोबल लेवल पर अपनी धाक जमा रहा है. भारत अब सिर्फ हथियार खरीद नहीं रहा है बल्कि दुनिया को अपने हथियार बेच भी रहा है. नरेंद्र मोदी लगातार ग्लोबल मंच पर भारत को एक पावरफुल मिलिट्री प्लेयर बना रहे हैं. भारत एक ऐसा देश बन गया है जिस पर अब पूरी दुनिया आंख बंद करके भरोसा कर सकती है. इसी भरोसे की वजह से इस साल कई बड़े देशों के नेता भारत आ चुके हैं. इस साल अभी तक पीएम मोदी 27 ग्लोबल लीडर्स को भारत बुलाकर मीटिंग कर चुके हैं. यूरोपियन यूनियन के अलावा फ्रांस और जर्मनी के बड़े नेता भी भारत का चक्कर लगा चुके हैं। 

    भारत का डिफेंस प्रोडक्शन आज के समय में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. साल 2013-14 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन सिर्फ 43746 करोड़ रुपये के करीब था. लेकिन साल 2025-26 में यह प्रोडक्शन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट भी अब पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़कर आसमान छू रहा है. साल 2014 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ 686 करोड़ रुपये था. अब यह एक्सपोर्ट बड़ी छलांग लगाकर 38424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 

    News Desk

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