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    मौसम का महादानव अल-नीनो फिर दे रहा दस्तक! क्या ‘इंडियन अल-नीनो’ बिगड़ने से बचाएगा खेल?

    News DeskBy News DeskJune 13, 2026No Comments6 Mins Read
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    मौसम का महादानव अल-नीनो फिर दे रहा दस्तक! क्या ‘इंडियन अल-नीनो’ बिगड़ने से बचाएगा खेल?
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     नई दिल्ली

    ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ मीटियोरॉलॉजी की हालिया रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है. प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान अल-नीनो की सीमा पार कर चुका है. नीनो 3.4 इंडेक्स जून 2026 की शुरुआत में +0.81°C तक पहुंच गया है, जो अल-नीनो की आधिकारिक सीमा +0.80°C से ज्यादा है. इस खबर से भारत के किसान, सरकार और आम लोग चिंतित हैं क्योंकि अल-नीनो अक्सर भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को कमजोर करता है। 

    अच्छी खबर यह है कि भारतीय महासागर में पॉजिटिव भारतीय महासागर द्विध्रुव (Positive Indian Ocean Dipole या IOD) विकसित होने की संभावना है, खासकर अगस्त-सितंबर में. यह अल-नीनो के निगेटिव असर को कुछ हद तक कम कर सकता है. भारत में अच्छी बारिश की संभावना बढ़ा सकता है। 

    अल-नीनो क्या है और यह भारत के मॉनसून को कैसे प्रभावित करता है?
    अल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह के तापमान के असामान्य रूप से बढ़ने से जुड़ी होती है. सामान्य रूप से, प्रशांत महासागर में पूर्वी हिस्से (दक्षिण अमेरिका के पास) ठंडा रहता है क्योंकि वहां ठंडे पानी का ऊपर आना होता है. लेकिन जब अल-नीनो आता है तो हवाओं में बदलाव से गर्म पानी पूर्व की ओर फैल जाता है. इससे पूरे क्षेत्र का तापमान बढ़ जाता है। 

    भारत के लिए अल-नीनो का मतलब अक्सर कम बारिश होता है. कारण यह है कि अल-नीनो ऊपर की हवाओं को प्रभावित करता है. सामान्य मॉनसून में, गर्म और नम हवा भारत की ओर आती है. लेकिन अल-नीनो के दौरान इंडोनेशिया और भारत के ऊपर वायुमंडल में सब्सिडेंस बढ़ जाता है, जो बादलों के बनने और बारिश को रोकता है. नतीजा- सूखा, अनियमित बारिश, फसलें प्रभावित और पानी की कमी। 

    रिपोर्ट के मुताबिक नीनो 3.4 इंडेक्स +0.81°C पहुंच चुका है. सभी मॉडल बताते हैं कि आने वाले महीनों में प्रशांत महासागर और गर्म होता रहेगा. भारतीय मौसम विभाग ने भी 2026 के मॉनसून के लिए औसत से कम बारिश (लगभग 90% LPA) की भविष्यवाणी की है. लेकिन मौसम विज्ञान में एक घटना अकेली नहीं चलती. यहां पॉजिटिव IOD की उम्मीद भारत के लिए राहत की किरण बन सकती है। 

    भारतीय महासागर द्विध्रुव क्या है? 
    भारतीय महासागर द्विध्रुव या IOD हिंद महासागर की एक महत्वपूर्ण जलवायु घटना है. इसे कभी-कभी 'भारतीय अल-नीनो' भी कहा जाता है. यह हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से यानी अफ्रीका के पास सोमालिया तट पर और पूर्वी हिस्से यानी इंडोनेशिया के पास समुद्री सतह के तापमान में अंतर पर आधारित है। 

    IOD के तीन चरण होते हैं…

        पॉजिटिव IOD: पश्चिमी हिंद महासागर (अफ्रीका की ओर) का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, जबकि पूर्वी हिस्सा (इंडोनेशिया की ओर) ठंडा रहता है. इससे पश्चिम की ओर नमी बढ़ती है। 

        निगेटिव IOD: ठीक उलटा- पूर्वी हिस्सा गर्म और पश्चिमी ठंडा। 
        न्यूट्रल: दोनों तरफ तापमान लगभग सामान्य.

    IOD की गणना IOD इंडेक्स से की जाती है, जो पश्चिमी-पूर्वी हिस्सों के तापमान के अंतर पर आधारित है. जून 2026 में इंडेक्स -0.34°C था, यानी न्यूट्रल की ओर. लेकिन रिपोर्ट और अन्य मॉडल अगस्त-सितंबर में पॉजिटिव IOD विकसित होने की संभावना जता रहे हैं। 

    पॉजिटिव IOD कैसे बनता है? सामान्य हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं. पॉजिटिव IOD में ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं या दिशा बदल जाती है. इससे पश्चिमी हिस्से में गर्म पानी जमा हो जाता है. पूर्व में ठंडे पानी का ऊपर आना बढ़ जाता है. इससे वायुमंडलीय सर्कुलेशन बदलता है- पश्चिम की ओर (भारत और अफ्रीका) नमी और वर्षा बढ़ती है, जबकि पूर्व (ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया) में सूखा पड़ सकता है। 

    पॉजिटिव IOD अल-नीनो को कैसे संतुलित करेगा?
    अल-नीनो और IOD दोनों महासागरों की घटनाएं हैं, लेकिन उनके प्रभाव अक्सर उलटे होते हैं. अल-नीनो भारत में बारिश कम करता है, जबकि पॉजिटिव IOD बारिश बढ़ाने में मदद करता है। 

    पॉजिटिव IOD के दौरान हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से से ज्यादा नमी भारत की ओर आती है. इससे दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की ताकत बढ़ती है. खासकर मॉनसून के दूसरे हिस्से (अगस्त-सितंबर) में इसका असर ज्यादा देखा जाता है. पॉजिटिव IOD वाले वर्षों में, भले ही अल-नीनो हो, भारत में सामान्य या ज्यादा बारिश हो सकती है। 

    उदाहरण के लिए- 1997-98 में मजबूत अल-नीनो था, लेकिन पॉजिटिव IOD ने भारत में अच्छी बारिश सुनिश्चित की. 2019 में भी पॉजिटिव IOD ने मॉनसून को मजबूत किया. 2026 में अगर IOD अगस्त-सितंबर तक पॉजिटिव हो गया तो यह अल-नीनो के सूखे प्रभाव को कम कर सकता है, खासकर मध्य और पश्चिमी भारत में। 

    वैज्ञानिक कारण- पॉजिटिव IOD से हिंद महासागर पर कम दबाव का क्षेत्र बनता है, जो मॉनसून की हवाओं को आकर्षित करता है. इससे बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नम हवा ज्यादा मात्रा में भारत पहुंचती है. अल-नीनो का प्रभाव मुख्य रूप से जून-जुलाई में ज्यादा होता है, जबकि IOD बाद में सक्रिय होकर संतुलन बना सकता है। 

    भारत के लिए क्या मतलब है? कृषि, अर्थव्यवस्था और तैयारी
    भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी कृषि पर काफी निर्भर है. अच्छा मॉनसून फसलों के लिए जरूरी है- खासकर खरीफ की फसलें जैसे धान, मक्का, सोयाबीन आदि. अगर पॉजिटिव IOD ने मदद की तो जल संकट कम हो सकता है. बिजली उत्पादन बेहतर रहेगा और सूखे से बचाव हो सकता है. लेकिन पूरी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए. IOD की भविष्यवाणी अभी संभावना है, न कि पक्की. अगर IOD कमजोर रहा या अल-नीनो बहुत मजबूत हुआ (सुपर अल-नीनो) तो समस्या बनी रह सकती है. IMD और अन्य एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। 

    भविष्य की चुनौतियां और जलवायु परिवर्तन का रोल
    जलवायु परिवर्तन के कारण ये घटनाएं ज्यादा तीव्र और अनिश्चित हो रही हैं. अल-नीनो-ला नीना चक्र तेज हो रहा है. IOD भी ज्यादा बार घट रहा है. वैज्ञानिक लगातार बेहतर मॉडल विकसित कर रहे हैं ताकि पूर्वानुमान सटीक हों. 2026 का मौसम महत्वपूर्ण होगा. पॉजिटिव IOD अगर आया तो यह 'मॉनसून बूस्ट' साबित हो सकता है। 

    अल-नीनो की चेतावनी गंभीर है, लेकिन प्रकृति अक्सर संतुलन बनाती है. पॉजिटिव भारतीय महासागर द्विध्रुव भारत के लिए उम्मीद की किरण है. यह अल-नीनो के प्रभाव को कम करके अच्छी बारिश ला सकता है. वैज्ञानिक निगरानी और सतर्कता से हम इस चुनौती का सामना कर सकते हैं। 

    News Desk

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