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    राजनीती

    TMC को बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने दिया इस्तीफा, बढ़ी ममता की मुश्किलें

    News DeskBy News DeskJune 11, 2026No Comments8 Mins Read
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    TMC को बड़ा झटका! राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने दिया इस्तीफा, बढ़ी ममता की मुश्किलें
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    कलकत्ता

    पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और पार्टी में भगदड़ मची हुई है. पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने आज राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।  

    प्रकाश चिक बराइक से पहले टीएमसी के दो और कद्दावर राज्यसभा सांसद- सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी संसद के उच्च सदन से इस्तीफा दे चुके हैं. एक के बाद एक हुए इन तीन बड़े इस्तीफों के बाद राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस की ताकत काफी कम हो गई है. आज बराइक के इस्तीफे के बाद अब उच्च सदन में टीएमसी के सांसदों की संख्या घटकर केवल 10 रह गई है। 

    आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं मुश्किलें
    सूत्रों और राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, टीएमसी के भीतर यह असंतोष यहीं थमने वाला नहीं है. कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले एक हफ्ते के भीतर टीएमसी के तीन और राज्यसभा सांसद अपने पदों से इस्तीफा दे सकते हैं। 

    अगर ये अटकलें सच साबित होती हैं, तो संसद में ममता बनर्जी की पार्टी का ग्राफ और नीचे गिर जाएगा.फिलहाल इन इस्तीफों के पीछे के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन विपक्षी दल इसे टीएमसी के भीतर बढ़ती कलह और असंतोष के रूप में देख रहे हैं। 

    आ गई TMC के बागी सांसदों की लिस्ट! कुछ नाम तो चौंका देंगे

    अब तक कयास लगाए जा रहे थे क‍ि ममता का साथ क‍ितने सांसद छोड़ने वाले हैं. कोई 10 कह रहा था तो कोई 20… लेकिन अब 19 सांसदों की ल‍िस्‍ट सामने आ गई है. इसमें काकोली घोष दस्‍तीदार के साथ यूसुफ पठान, शत्रुघ्न सिन्हा समेत कई चौंकाने वाले नाम हैं. गौर करने वाली बात है क‍ि इसमें सयानी घोष जैसे कई नाम भी हैं, ज‍िनकी अटकलें लगाई जा रही थीं। 

    1. यूसुफ पठान (बहरामपुर)
    क्रिकेटर से नेता बने यूसुफ पठान ने कांग्रेस के गढ़ बहरामपुर में अधीर रंजन चौधरी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था. लेकिन राजनीति की पिच पर यूसुफ को दीदी के लोकल नेताओं से वैसी मदद नहीं मिल रही थी, जैसी उम्मीद थी. बहरामपुर के स्थानीय संगठन से उनकी दूरी अब खुलकर सामने आ रही है। 

    2. जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया (कूचबिहार)
    कूचबिहार की सीट हमेशा से उत्तर बंगाल की राजनीति का केंद्र रही है. जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया यहां टीएमसी के मजबूत राजबंशी चेहरा माने जाते हैं. लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और स्थानीय गुटबाजी के कारण उनके सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं. क्षेत्र में अपनी पकड़ के बावजूद संगठन से अनबन की खबरें हैं। 

    3. खलीलुर रहमान (जंगीपुर)
    मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर से आने वाले खलीलुर रहमान बीड़ी कारोबारी से राजनेता बने हैं. मुस्लिम बहुल इस इलाके में उनका अच्छा-खासा प्रभाव है. हालांकि, केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में आने और स्थानीय लीडरशिप से तालमेल की कमी के चलते उनके टीएमसी से दूर जाने की चर्चाएं तेज हैं। 

    4. अबू ताहेर खान (मुर्शिदाबाद)
    मुर्शिदाबाद के कद्दावर नेता अबू ताहेर खान का इस लिस्ट में होना चौंकाता है. कांग्रेस से टीएमसी में आए अबू ताहेर का क्षेत्र में मजबूत जनाधार है. पिछले कुछ समय से जिला स्तर पर हो रही उपेक्षा और नए नेताओं को तरजीह दिए जाने से वह काफी नाराज बताए जा रहे हैं। 

    5. पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
    बैरकपुर जैसी हाई-प्रोफाइल और हिंसा प्रभावित सीट से जीतने वाले पार्थ भौमिक ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते थे. लेकिन अर्जुन सिंह के साथ चलने वाली अंदरूनी खींचतान और पार्टी के भीतर गुटीय समीकरणों के बदलने से पार्थ भौमिक का मोहभंग होता दिख रहा है, जिससे बगावती सुर उठे हैं। 

    6. काकोली घोष दस्तीदार (बारासात)
    डॉ. काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी की बेहद सीनियर और तेजतर्रार नेता हैं. संसद में अपनी बात मजबूती से रखने वाली काकोली के बारे में कहा जा रहा है कि वह पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव और युवा ब्रिगेड के फैसलों से असहज महसूस कर रही हैं, जिससे दूरियां बढ़ी हैं। 

    7. बापी हलदार (मथुरापुर)
    मथुरापुर (SC) सीट से चुनकर आए बापी हलदार जमीनी स्तर के नेता हैं. दक्षिण 24 परगना के सुंदरबन इलाके में उनकी मजबूत पकड़ है. स्थानीय पंचायत चुनावों और विकास कार्यों के फंड को लेकर जिला नेतृत्व के साथ उनकी अनबन अब बगावत के मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है। 

    8. सायोनी घोष (जादवपुर)
    टीएमसी की युवा विंग की अध्यक्ष रहीं सायोनी घोष हमेशा से ममता बनर्जी की फेवरेट रही हैं. जादवपुर जैसी प्रतिष्ठित सीट से जीतकर संसद पहुंचने वाली सायोनी की बगावत की खबरें हैरान करने वाली हैं. बताया जा रहा है कि संगठनात्मक फेरबदल और कुछ आंतरिक फैसलों से वह खुश नहीं हैं। 

    9. माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
    कोलकाता दक्षिण सीट खुद ममता बनर्जी का पुराना गढ़ रही है, जहां से माला रॉय सांसद हैं. माला रॉय का नाम इस लिस्ट में आना टीएमसी के लिए सबसे बड़ा झटका है. कोलकाता नगर निगम और सांसद फंड के इस्तेमाल को लेकर पार्टी आलाकमान से उनके मतभेद गहरे हो चुके हैं। 

    10. मिताली बाग (आरामबाग)
    आरामबाग की बेहद करीबी मुकाबले वाली सीट से जीत दर्ज करने वाली मिताली बाग एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं. लेकिन सांसद बनने के बाद स्थानीय स्तर पर पार्टी के पुराने क्षत्रपों ने उन्हें काम नहीं करने दिया. इसी आंतरिक कलह और उपेक्षा के कारण मिताली ने अपने रास्ते अलग करने का मन बनाया है। 

    11. देव अधिकारी (घाटाल)
    बांग्ला सिनेमा के सुपरस्टार दीपक अधिकारी उर्फ देव के बागी तेवर नए नहीं हैं. वह पहले भी राजनीति छोड़ने की इच्छा जता चुके थे. ममता के मनाने पर वह माने तो थे, लेकिन घाटाल के स्थानीय टीएमसी नेताओं के भ्रष्टाचार और दखलअंदाजी से तंग आकर अब वह आर-पार के मूड में हैं। 

    12. कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम)
    आदिवासी बहुल झाड़ग्राम सीट से सांसद कालीपद सोरेन संथाली साहित्यकार और प्रतिष्ठित चेहरा हैं. टीएमसी ने इन्हें आदिवासी कार्ड के तौर पर उतारा था. लेकिन क्षेत्र में आदिवासियों की बुनियादी समस्याओं पर पार्टी के ढुलमुल रवैए और वादों से मुकरने के कारण कालीपद सोरेन ने बगावती रुख अख्तियार कर लिया है। 

    13. जून मालिया (मेदिनीपुर)
    मेदिनीपुर से सांसद और मशहूर अभिनेत्री जून मालिया को टीएमसी का ग्लैमरस लेकिन गंभीर चेहरा माना जाता है. विधानसभा के बाद लोकसभा तक का सफर तय करने वाली जून मालिया के बारे में खबर है कि वह जिला टीएमसी कमेटी के लगातार बढ़ते हस्तक्षेप और दबाव से बेहद परेशान हैं। 

    14. अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा)
    बांकुड़ा से सांसद अरूप चक्रवर्ती अपने बेबाक और कई बार विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं. बीजेपी के मजबूत गढ़ बांकुड़ा को भेदने वाले अरूप चक्रवर्ती इन दिनों पार्टी के बड़े नेताओं के रवैए से नाराज हैं. उनका मानना है कि जीतने के बाद भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिला। 

    15. शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व)
    पेशे से डॉक्टर शर्मिला सरकार को टीएमसी ने बर्धमान पूर्व की सुरक्षित सीट से मैदान में उतारा था. राजनीति में नई शर्मिला को उम्मीद थी कि उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका मिलेगा, लेकिन पार्टी के लोकल ‘सिंडिकेट’ और नेताओं के दबाव के कारण वह खुद को घुटा हुआ महसूस कर रही थीं। 

    16. शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)
    ‘बिहारी बाबू’ शत्रुघ्न सिन्हा ने आसंसोल उपचुनाव और फिर आम चुनाव में टीएमसी को बड़ी जीत दिलाई. लेकिन हमेशा अपनी शर्तों पर राजनीति करने वाले शॉटगन को टीएमसी का कड़ा अनुशासन और केवल बंगाल केंद्रित राजनीति रास नहीं आ रही है. राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका न देखकर उनके तेवर तल्ख हैं। 

    17. असित कुमार माल (बोलपुर)
    बीरभूम जिले की बोलपुर सीट से सांसद असित कुमार माल अनुब्रत मंडल के दौर से ही पार्टी का वफादार चेहरा रहे हैं. लेकिन अनुब्रत मंडल के जेल जाने और आने के बाद बदले समीकरणों में असित कुमार खुद को हाशिए पर पा रहे हैं, जिससे उनकी नाराजगी बगावत में बदल गई। 

    18. शताब्दी रॉय (बीरभूम)
    अभिनेत्री से नेता बनीं शताब्दी रॉय बीरभूम से लगातार जीतती आ रही हैं. बीरभूम टीएमसी के भीतर जारी अंदरूनी गैंगवार और गुटबाजी से शताब्दी हमेशा परेशान रही हैं. इस बार उनका धैर्य जवाब दे गया है और वह पार्टी नेतृत्व को अपनी ताकत दिखाने के मूड में नजर आ रही हैं। 

    19. रचना बनर्जी (हुगली)
    ‘दीदी नंबर 1’ रियलिटी शो की मशहूर होस्ट रचना बनर्जी ने हुगली में बीजेपी की लॉकेट चटर्जी को हराकर सनसनी मचाई थी. हालांकि, राजनीति की इस दलदल और पार्टी के भीतर टिकट से लेकर मलाईदार पदों के लिए होने वाली नूराकुश्ती से रचना जल्द ही ऊब गईं और उनके बागी सुर गूंजने लगे हैं। 

     

    News Desk

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