Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    CG News
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    CG News
    Home»देश»LPG, पेट्रोल-डीजल में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम, मेगाप्लान से देश में बढ़ेगी सप्लाई; विदेश पर निर्भरता होगी कम
    देश

    LPG, पेट्रोल-डीजल में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम, मेगाप्लान से देश में बढ़ेगी सप्लाई; विदेश पर निर्भरता होगी कम

    News DeskBy News DeskJune 7, 2026No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    LPG, पेट्रोल-डीजल में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम, मेगाप्लान से देश में बढ़ेगी सप्लाई; विदेश पर निर्भरता होगी कम
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    नई दिल्ली
     भारत लंबे समय से कच्चे तेल और गैस के लिए विदेशों पर निर्भर रहा है. हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी खरीदने में खर्च हो जाता है. लेकिन अब तस्वीर बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है. अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस मिलने के बाद मोदी सरकार ने पूर्वी तट पर ऐसा मेगाप्लान शुरू किया है, जो आने वाले सालों में देश की ऊर्जा कहानी बदल सकता है. सरकार अब समुद्र की गहराई में छिपे तेल और गैस भंडार खोजने के लिए बड़े स्तर पर सर्वे करा रही है. अगर यह मिशन सफल हुआ तो भारत को न सिर्फ एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई में मजबूती मिलेगी, बल्कि विदेशी तेल कंपनियों पर निर्भरता भी कम होगी. यही वजह है कि ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ इसे भारत का ‘एनर्जी फ्रीडम मिशन’ बता रहे हैं. सरकार की नजर अब उन इलाकों पर है जहां पहले तकनीक की कमी के कारण पूरी तरह खोज नहीं हो पाई थी. अब एडवांस्ड सिस्मिक इमेजिंग टेक्नोलॉजी के जरिए समुद्र के नीचे छिपे बड़े हाइड्रोकार्बन भंडार तलाशे जाएंगे। 

     जानकारी के अनुसार सरकार की यह पूरी योजना सिर्फ तेल खोजने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे आर्थिक और रणनीतिक दोनों सोच काम कर रही है. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है. घरेलू उत्पादन कम होने के कारण देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करना पड़ता है. इससे वैश्विक संकट का असर सीधे भारतीय बाजार पर दिखता है. रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट तनाव के दौरान इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में साफ दिखा था. अब सरकार चाहती है कि देश के भीतर ही ऐसे बड़े भंडार खोजे जाएं, जिससे आने वाले दशकों तक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सके. इसी दिशा में महानदी, बंगाल-पुर्णिया, कृष्णा-गोदावरी और कावेरी बेसिन जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सर्वे शुरू किए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इन इलाकों में भारी मात्रा में तेल और गैस छिपी हो सकती है। 

    पूर्वी तट पर शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा मिशन

        अंडमान सागर में ऑयल इंडिया को प्राकृतिक गैस मिलने के बाद सरकार का फोकस अब पूरी तरह पूर्वी तट पर आ गया है. सरकार ने वैश्विक जियोफिजिकल कंपनियों से निविदाएं मांगी हैं ताकि पुराने सिस्मिक डेटा को दोबारा प्रोसेस किया जा सके और नए ब्रॉडबैंड 3D सर्वे किए जा सकें. यह मिशन करीब 36 महीने तक चलेगा. इसके तहत समुद्र के नीचे की चट्टानों और संरचनाओं का हाई-टेक नक्शा तैयार किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उन क्षेत्रों की पहचान हो सकेगी जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया गया था। 

        सरकार इस बार सिर्फ पुराने तरीकों पर भरोसा नहीं कर रही. नई तकनीकों का इस्तेमाल करके समुद्र के नीचे कई किलोमीटर गहराई तक की स्पष्ट तस्वीर बनाई जाएगी. सर्वेक्षण जहाज समुद्र में लंबी केबल यानी स्ट्रीमर छोड़ेंगे. ये उपकरण साउंड वेव भेजकर नीचे की चट्टानों से लौटने वाली गूंज रिकॉर्ड करेंगे. वैज्ञानिक इस डेटा को प्रोसेस करके पता लगाएंगे कि कहां तेल और गैस फंसी हो सकती है. यही तकनीक दुनिया के बड़े ऑफशोर तेल क्षेत्रों की खोज में इस्तेमाल होती है। 

        भारत का सबसे बड़ा दांव कृष्णा-गोदावरी यानी KG बेसिन पर माना जा रहा है. यह क्षेत्र पहले से ही देश का प्रमुख गैस उत्पादन केंद्र है. यहां कई बड़े गैस फील्ड मौजूद हैं. लेकिन सरकार का मानना है कि एडवांस्ड सिस्मिक इमेजिंग से यहां और गहरे हिस्सों में नए भंडार मिल सकते हैं. KG बेसिन में गैस हाइड्रेट्स, डीप वॉटर रिजर्वायर और जटिल पेट्रोलियम सिस्टम मौजूद हैं. अगर यहां नई खोज होती है तो भारत की गैस सप्लाई में बड़ा उछाल आ सकता है। 

    महानदी बेसिन में छिपा बड़ा खजाना?
    ओडिशा तट के पास मौजूद महानदी बेसिन को भारत के सबसे संभावित डीप-वॉटर क्षेत्रों में माना जा रहा है. यहां पहले भी हाइड्रोकार्बन मिलने के संकेत मिल चुके हैं, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन सीमित रहा. अब नई तकनीक के जरिए यहां की गहरी सिडिमेंटरी परतों की जांच होगी. वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां 8 किलोमीटर से ज्यादा गहराई तक तेल और गैस मौजूद हो सकते हैं। 

    बंगाल-पुर्णिया बेसिन पर क्यों टिकी नजर?
    बंगाल-पुर्णिया बेसिन को भी सरकार बड़ा फ्रंटियर अवसर मान रही है. यहां 10 किलोमीटर तक मोटी सिडिमेंटरी परतें मौजूद हैं. भूवैज्ञानिक अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि यहां मियोसीन युग के हाइड्रोकार्बन भंडार हो सकते हैं. पहले यहां बायोजेनिक गैस के संकेत भी मिल चुके हैं. अगर यह क्षेत्र सफल रहा तो पूर्वी भारत की ऊर्जा तस्वीर बदल सकती है। 

    कावेरी बेसिन से मिल सकती है नई ताकत
    तमिलनाडु से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैला कावेरी बेसिन पहले से तेल उत्पादन क्षेत्र रहा है. लेकिन सरकार का मानना है कि यहां अभी भी बड़े भंडार छिपे हुए हैं. खासकर ऑफशोर कार्बोनेट सिस्टम और जुरासिक सिं-रिफ्ट प्ले में भारी संभावनाएं बताई जा रही हैं. इस क्षेत्र में सिडिमेंटरी परतें करीब 8 किलोमीटर तक गहरी हैं. यानी यहां भविष्य में बड़े स्तर पर ड्रिलिंग की संभावना है। 

    विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने की तैयारी
    भारत अभी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. कच्चे तेल का आयात बिल हर साल लाखों करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. अगर घरेलू उत्पादन बढ़ता है तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी. साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों का असर भी कम होगा. यही वजह है कि सरकार इसे सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक मिशन मान रही है। 

    मल्टी-क्लाइंट मॉडल से कैसे बदलेगा खेल?
    सरकार इस मिशन में मल्टी-क्लाइंट मॉडल का इस्तेमाल कर रही है. इसका मतलब है कि जियोफिजिकल कंपनियां खुद डेटा जुटाएंगी और बाद में उसे कई ऊर्जा कंपनियों को बेच सकेंगी. इससे सरकार पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम होगा. साथ ही निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी. इससे खोज का काम तेजी से आगे बढ़ सकता है। 

    सरकार पूर्वी तट पर नया सर्वे क्यों करा रही है?

    सरकार का उद्देश्य समुद्र के नीचे छिपे तेल और प्राकृतिक गैस भंडार की खोज करना है. भारत अभी बड़ी मात्रा में तेल आयात करता है. अगर घरेलू भंडार मिलते हैं तो एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की सप्लाई मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता कम हो जाएगी। 

    किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा संभावना मानी जा रही है?
    महानदी, बंगाल-पुर्णिया, कृष्णा-गोदावरी और कावेरी बेसिन को सबसे संभावित क्षेत्र माना जा रहा है. इन इलाकों में पहले भी हाइड्रोकार्बन के संकेत मिल चुके हैं और अब नई तकनीक से दोबारा गहराई में जांच की जाएगी। 

    क्या इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है?
    अगर बड़े स्तर पर घरेलू उत्पादन शुरू होता है तो आयात बिल कम होगा. इससे लंबे समय में ईंधन कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है. हालांकि कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार और टैक्स नीति पर भी निर्भर करती हैं। 

    सिस्मिक सर्वे आखिर होता क्या है?
    सिस्मिक सर्वे में समुद्र के नीचे साउंड वेव भेजी जाती हैं. ये चट्टानों से टकराकर वापस लौटती हैं. वैज्ञानिक इस डेटा को पढ़कर पता लगाते हैं कि जमीन के नीचे तेल या गैस फंसी हुई है या नहीं। 

     

    News Desk

    Related Posts

    Re-NEET 2026 के लिए अभेद्य सुरक्षा कवच! एयरफोर्स 18 ठिकानों से उठाएगी पेपर, परिंदा भी नहीं मार सकेगा पर

    June 8, 2026

    शुभेंदु सरकार का बड़ा ऐलान, बंगाल में CBI को मिली जांच की खुली छूट

    June 8, 2026

    TMC के मुख्यालय पर संकट! किराये की इमारत खाली कराने को लेकर थाने पहुंचा मालिक

    June 8, 2026

    एक फोन कॉल ने खोला राज! नेपाल बॉर्डर के पास छिपे जहांगीर खान तक ऐसे पहुंची STF

    June 8, 2026

    LPG सिलेंडर 942 रुपये पहुंचा, फिर भी भारत में सबसे सस्ता! जानिए पाकिस्तान, श्रीलंका समेत पड़ोसी देशों के दाम

    June 8, 2026

    नेपाल बॉर्डर से TMC नेता जहांगीर खान गिरफ्तार, STF की बड़ी कार्रवाई से मचा सियासी हड़कंप

    June 8, 2026
    GAM
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    जौनसार-बावर पहुंचे सीएम धामी, बोले- प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आदिवासी समाज की नीतियां और नियति बदलीं

    June 8, 2026

    Uttarakhand News: जौनसार-बावर लोक सांस्कृतिक महोत्सव में शामिल हुए CM धामी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी केदार सिंह को दी श्रद्धांजलि…..

    June 8, 2026

    Uttarakhand News: जौनसार-बावर लोक सांस्कृतिक महोत्सव में शामिल हुए CM धामी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी केदार सिंह को दी श्रद्धांजलि…..

    June 8, 2026

    समाज के अंतिमसमाज के हर परिवार को पक्का आवास, खाद्यान्न और बुनियादी सुविधाएं के लिए सरकार प्रतिबद्ध- राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा तक पहुँच रहा सुशासनः वन मंत्री केदार कश्यप….

    June 8, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    Owner - Rakhi Roy
    Editor - Rahul Shende
    Mobile - 7089782411
    Email - cgnewsllive24@gmail.com
    Office - F 188, Aakash Ganga, Supela, Bhilai, Chhattisgarh
    June 2026
    M T W T F S S
    1234567
    891011121314
    15161718192021
    22232425262728
    2930  
    « May    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.