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    होर्मुज ब्लॉकेड से बढ़ी दुनिया की टेंशन, ऑयल कंपनियों ने दी तेल महंगा होने की चेतावनी

    News DeskBy News DeskJune 3, 2026No Comments8 Mins Read
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    होर्मुज ब्लॉकेड से बढ़ी दुनिया की टेंशन, ऑयल कंपनियों ने दी तेल महंगा होने की चेतावनी
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     नई दिल्ली

    करीब दो महीने पहले अमेरिका के इन्वेस्टमेंट बैंक जेपी मॉर्गन ने एक विश्लेषण जारी किया था, जिसमें सवाल पूछा गया था कि 'दुनिया के पास काम चलाने लायक कच्चे तेल का न्यूनतम स्टॉक खत्म होने में कितना वक्त लगेगा?.' इसका सार ये था कि भले ही बाजार में करोड़ों बैरल तेल मौजूद हो, लेकिन अगर इस्तेमाल के लिए उपलब्ध भंडार बहुत कम हो जाए तो पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है. इंसानी शरीर में ब्लड प्रेशर की तरह असली मुद्दा तेल की मात्रा नहीं, बल्कि उसके लगातार प्रवाह का है। 

    करीब चार हफ्ते बाद बैंक ने एक और विश्लेषण जारी किया, जिसमें बताया गया कि .होर्मुज स्ट्रेट सितंबर तक क्यों खुल जाएगा… किसी न किसी तरह. बैंक के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में वैश्विक तेल भंडार 8.4 अरब बैरल था, लेकिन उसमें से केवल 0.8 अरब बैरल ही ऐसा था जिसे इस्तेमाल किया जा सकता था। 

    संक्षेप में कहें तो, अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता है और तेल की महंगाई के कारण मांग में कमी 55 लाख बैरल प्रतिदिन पर स्थिर रहती है, तो OECD देशों (Organisation For Economic Co-operation and Development) के कमर्शियल तेल भंडार जून तक भारी दबाव में आ सकते हैं। 

    इसके बाद सितंबर तक दुनिया के तेल भंडार उस न्यूनतम स्तर पर पहुंच सकते हैं, जहां से सामान्य संचालन करना मुश्किल हो जाएगा. दिलचस्प बात यह है कि जेपीमॉर्गन की पिछली रिपोर्ट के बाद तेल की कीमतें बढ़ने के बजाय घटी हैं, इसलिए मांग में गिरावट की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। 

    सप्लाई कम फिर भी गिर रही तेल की कीमतें… बड़ा तूफान आने वाला है
    इस दौरान सबसे हैरानी वाली बात यह रही कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से रोजाना करीब 1 करोड़ बैरल तेल जरूरतमंद देशों तक नहीं पहुंच पा रहा था. सामान्य तौर पर ऐसी स्थिति में कीमतें तेजी से बढ़नी चाहिए थीं ताकि मांग कम हो जाए. लेकिन इसके उलट मार्च के आखिर में बहुत अधिक बढ़ने और फिर एक महीने बाद दोबारा बढ़ने के बाद तेल की कीमतें गिरने लगीं. इससे मांग कम होने के बजाय और बढ़ी है. इसी वजह से जेपीमॉर्गन ने रिपोर्ट जारी कर कहा था कि वैश्विक तेल बाजार के गणित में कुछ गड़बड़ है। 

    इसके कुछ हफ्ते बाद गोल्डमैन सैक्स ने भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद, मई में वैश्विक तेल भंडार रिकॉर्ड 87 लाख बैरल प्रतिदिन की दर से घटे। 

    फिर भी मई में तेल की कीमतें काफी नीचे रहीं. इसकी एक बड़ी वजह बाजार को रोजाना दिए जाने वाले वो संकेत थे जिनमें सरकारी और गैर-सरकारी सूत्र लगातार यह कह रहे थे कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता बस होने ही वाला है। 

    लेकिन ऐसा नहीं हुआ. तेल बाजार भले ही इस खतरे को नजरअंदाज करना चाहे, लेकिन अब तेल उद्योग की बड़ी कंपनियां खुलकर चेतावनी देने लगी हैं। 

    तेल स्टोरेज खत्म होने का झटका बाजार सह नहीं पाएगा
    हाल ही में शेवरॉन के CEO माइक वर्थ ने कहा कि अगले दो महीनों में तेल की कीमतें बढ़ने की संभावना है क्योंकि पहले से ही बेहद कम स्तर पर मौजूद कच्चे तेल के भंडार ईरान युद्ध की वजह से लगातार घट रहे हैं। 

    उन्होंने गुरुवार को एक कॉन्फ्रेंस में कहा, 'सुरक्षा के लिए मौजूद अतिरिक्त भंडार खत्म हो रहा है और ऐसा झटका सहने की क्षमता भी खत्म होती जा रही है. बाजार के पास इस असंतुलन को संभालने की क्षमता अब पहले की तुलना में काफी कम रह गई है। 

    उन्होंने आगे कहा, 'अगले कुछ हफ्तों में यह दबाव सीधे तेल की कीमतों में दिखने लगेगा. जून और खासकर जुलाई में कीमतें ऊपर जाएंगी। 

    वर्थ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पिछले एक हफ्ते में तेल की कीमतों में करीब 10% की गिरावट आई है. इसकी वजह यह उम्मीद रही कि अमेरिका और ईरान तीन महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए कोई समझौता कर सकते हैं. इसी संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद है, जो दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल की आवाजाही का रास्ता है। 

    उनकी चेतावनी से यह चिंता भी बढ़ गई है कि अगर युद्ध खत्म करने के लिए कोई समझौता हो भी जाता है तब भी तेल की कीमतें महीनों तक ऊपर बनी रह सकती हैं. वैसे भी फिलहाल ऐसा कोई समझौता होता हुआ नजर नहीं आ रहा. इस संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार से रोजाना 1.2 से 1.3 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति गायब हो चुकी है। 

    युद्ध खत्म हो भी जाए तब भी अगले साल तक नहीं सुधरेंगे तेल बाजार के हालात
    वर्थ की बात अन्य तेल अधिकारियों की चेतावनियों से भी मेल खाती है. इनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकारी तेल कंपनी Adnoc के प्रमुख भी शामिल हैं. उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि अगर संघर्ष खत्म भी हो जाए, तब भी होर्मुज स्ट्रेट में तेल की सामान्य आवाजाही अगले साल से पहले बहाल होने की संभावना नहीं है। 

    ADNOC के सीईओ सुल्तान अल-जाबेर ने 21 मई को एक प्रोग्राम में कहा, 'संघर्ष से पहले के स्तर की 80% तेल आपूर्ति बहाल होने में कम से कम चार महीने लगेंगे और पूरी क्षमता से तेल प्रवाह 2027 की पहली या शायद दूसरी तिमाही से पहले शुरू नहीं होगा। 

    जेपीमॉर्गन की तरह वर्थ ने भी कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतें उतनी नहीं बढ़ीं जितनी उम्मीद थी. इसकी वजह यह रही कि देशों ने इमर्जेंसी के लिए अच्छी मात्रा में तेल जमा कर रखा था, अमेरिका ने बाजार को तेल दिया और ईरान, रूस, वेनेजुएला के प्रतिबंधित तेल भी बाजार में पहुंचे. लेकिन अब ये भंडार तेजी से घट रहे हैं। 

    ऑयल प्राइस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें एक बड़ा फैक्टर चीन के तेल भंडार हैं जो चुपचाप तेजी से कम हो रहे हैं. इसमें कमर्शियल और स्ट्रैटेजिक दोनों तरह के भंडार शामिल हैं. चीन के रणनीतिक भंडार में करीब 1.4 अरब बैरल तेल होने का अनुमान है. अगर चीन इन्हें बड़े पैमाने पर बाजार में उतारता है, तो संकट कुछ समय के लिए टल सकता है। 

    वर्थ ने यह भी कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट सरकारों को सीख देगा कि वो भविष्य के लिए ज्यादा तेल भंडार रखें. ऐसा इसलिए ताकि महामारी, ईरान युद्ध या रूस-यूक्रेन जैसे संघर्षों से पैदा होने वाले झटकों से बचा जा सके। 

    उन्होंने कहा, 'सरकारों को यह मानकर चलना होगा कि अगला झटका कभी भी आ सकता है. वो अपने भंडार फिर से भरने में कितना समय लगाना चाहते हैं, यह सवाल अब उनके सामने खड़ा होगा. जब देश अपने भंडार दोबारा भरना शुरू करेंगे तो बाजार में मांग और बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। 

    शेवरॉन के प्रमुख ने यह चेतावनी भी दी कि मध्य-पूर्व में तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान की मरम्मत पर अरबों डॉलर खर्च होंगे, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा। 

    उन्होंने कहा, 'अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्ती या मंदी की ओर जा सकती है. ऐसी स्थिति में मांग कम हो सकती है, और इस संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 

    तेल कंपनी के अधिकारी का बयान डरा रहा 
    अमेरिका की मल्टीनेशनल तेल और गैस कंपनी Exxon के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नील चैपमैन ने ऐसे बयान दिए जिन्हें सुनना शायद डोनाल्ड ट्रंप भी पसंद नहीं करेंगे। 

    उन्होंने कहा, 'कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल जैसे सभी पेट्रोलियम उत्पादों के कमर्शियल भंडार लगातार घटे हैं. इन भंडारों की कमी की भरपाई स्ट्रैटेजिक भंडार से तेल निकालकर की गई, ज्यादातर पश्चिमी देशों ने यही किया. इसी वजह से संकट का असर कुछ हद तक कम दिखाई दिया। 

    उन्होंने आगे कहा, 'हम ऐसे स्टोरेज लेवल के करीब पहुंच रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखे गए. भंडार बेहद, बेहद कम हो रहे हैं. यह बहस हो सकती है कि यह स्थिति दो हफ्ते में आएगी या तीन हफ्ते में, लेकिन जब ऐसा होगा तो कीमतें तेजी से उछलेंगी. हमारा विश्लेषण बताता है कि वैश्विक क्रूड बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 150 से 160 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है. जैसे ही भंडार बेहद कम स्तर पर पहुंचेंगे, कीमतें वहां तक पहुंच सकती हैं। 

    उन्होंने आगे कहा, 'इसके बाद मांग में मजबूरी वाली गिरावट शुरू होगी. कीमतें इतनी ज्यादा हो जाएंगी कि लोग तेल खरीद ही नहीं पाएंगे. तब जाकर बाजार में संतुलन लौटेगा. और हम अभी उसी मोड़ के बेहद करीब हैं. पिछले करीब छह हफ्तों से तेल की कीमतें 90 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, लेकिन इसकी बड़ी वजह भंडारों का लगातार इस्तेमाल है. यह हमेशा नहीं चल सकता. आगे क्या होगा, यह देखना होगा. सटीक समय बताना मुश्किल है, लेकिन हमारी तस्वीर यही दिखाती है। 

    आसान शब्दों में कहें तो, ट्रंप प्रशासन बाजार को शांत रखने की कोशिश के लिए लगातार ऐसे संदेश दे रहा है कि कोई समझौता जल्द हो जाएगा. इससे तेल की कीमतें उतनी नहीं बढ़ रहीं और लोग ज्यादा तेल खरीद पा रहे हैं. नतीजा यह है कि कमर्शियल और स्ट्रैटेजिक दोनों तरह के भंडार पहले से भी तेजी से घट रहे हैं। 

    दूसरी तरफ सप्लाई की दिक्कत अब भी बनी हुई है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सामान्य आवाजाही अब भी बाधित है। 

    जब तक ईरान युद्ध वास्तव में खत्म नहीं होता और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, तब तक वैश्विक तेल भंडार रोजाना लगभग 1 से 1.4 करोड़ बैरल की दर से घटते रहेंगे। 

    News Desk

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