Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    CG News
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    CG News
    Home»देश»बांग्लादेश बॉर्डर का 600 KM लंबा ‘डार्क जोन’, घुसपैठियों के लिए बना बड़ा रास्ता
    देश

    बांग्लादेश बॉर्डर का 600 KM लंबा ‘डार्क जोन’, घुसपैठियों के लिए बना बड़ा रास्ता

    News DeskBy News DeskMay 30, 2026No Comments8 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    बांग्लादेश बॉर्डर का 600 KM लंबा ‘डार्क जोन’, घुसपैठियों के लिए बना बड़ा रास्ता
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

     नई दिल्ली
    भारत और बांग्लादेश के बीच की सीमा दुनिया की सबसे लंबी और जटिल सीमाओं में से एक है. कुल 4,096 किलोमीटर लंबी इस सीमा पर लगभग 600 किलोमीटर का इलाका अभी भी डार्क जोन बना हुआ है. इन इलाकों में पर्याप्त बाड़बंदी नहीं है. रोशनी कम है. मोबाइल नेटवर्क कमजोर है. इलाका नदियों, दलदल और घने इलाकों से भरा है. यही जगह घुसपैठियों, तस्करों और अन्य संदिग्ध तत्वों के लिए आसान प्रवेश द्वार बन गई है। 

    1947 के विभाजन के समय रेडक्लिफ लाइन से बनी यह सीमा 1971 में बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद तय हुई.  सीमा का ज्यादातर हिस्सा घनी आबादी वाले इलाकों, खेतों, नदियों और गांवों से गुजरता है. दोनों तरफ परिवार बंटे हुए हैं. रोजमर्रा की जिंदगी में लोग सीमा पार करते हैं. इससे सीमा पूरी तरह बंद करना मुश्किल हो जाता है. पहले चिटमहल (एन्क्लेव) की समस्या थी, जिसे 2015 के लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट से ज्यादातर सुलझा लिया गया. लेकिन अब भी सुरक्षा की चुनौतियां बनी हुई हैं। 

    600 किलोमीटर डार्क जोन कहां है?

    यह डार्क जोन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल में है. राज्य की कुल 2,217 किलोमीटर सीमा में से करीब 1,600 किलोमीटर पर बाड़ लग चुकी है, लेकिन लगभग 600 किलोमीटर अभी बिना बाड़ का है। 

    क्या है यह 600 किलोमीटर का 'डार्क जोन' और यह कहां स्थित है?

    भारत-बांग्लादेश सीमा पांच भारतीय राज्यों से होकर गुजरती है…

        पश्चिम बंगाल: 2,217 किलोमीटर (सबसे लंबी सीमा)
        त्रिपुरा: 856 किलोमीटर
        मेघालय: 443 किलोमीटर
        असम: 262 किलोमीटर
        मिजोरम: 318 किलोमीटर

    यह 600 किलोमीटर का डार्क जोन मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में फैला हुआ है. पश्चिम बंगाल की 2217 किमी लंबी सीमा में से लगभग 1600 किमी पर किसी न किसी रूप में बाड़ लगाई जा चुकी है, लेकिन लगभग 550 से 600 किलोमीटर का हिस्सा अभी भी पूरी तरह से खुला या असुरक्षित है। 

    यह डार्क जोन विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों और जिलों में मौजूद है… 

        मुर्शिदाबाद और मालदा: इन जिलों में गंगा और पद्मा जैसी नदियां बहती हैं. नदी के बहाव के कारण यहां जमीन स्थिर नहीं रहती, जिससे पक्की बाड़ लगाना असंभव हो जाता है। 

        उत्तर और दक्षिण 24 परगना: सुंदरबन का दलदली इलाका और इछामती जैसी इकरूखी नदियां इस क्षेत्र को बेहद संवेदनशील बनाती हैं। 

        कूचबिहार और जलपाईगुड़ी: उत्तरी बंगाल के इन जिलों में कई ऐसे गांव हैं जो ठीक जीरो लाइन (अंतर्राष्ट्रीय सीमा) पर बसे हैं, जहां बाड़ लगाने के लिए जमीन का अधिग्रहण करना एक बड़ी चुनौती रहा है। 

    इसे 'डार्क जोन' क्यों कहा जाता है?

    इसे डार्क जोन कहने के पीछे केवल रात का अंधेरा ही एकमात्र कारण नहीं है. इसके कई तकनीकी और भौगोलिक कारण हैं… 

        नदी तटीय क्षेत्र (Riverine Terrain): जब नदियां अपना रास्ता बदलती हैं, तो पहले से लगाई गई बाड़ बह जाती है. पानी के बीच में खंभे गाड़ना व्यावहारिक नहीं होता। 

        खराब मोबाइल और संचार नेटवर्क: इन सुदूर इलाकों में भारतीय टेलीकॉम कंपनियों के सिग्नल बेहद कमजोर या न के बराबर हैं, जिससे सुरक्षा बलों को समय पर खुफिया जानकारी साझा करने में दिक्कत आती है। 

        फ्लडलाइट्स की कमी: कई दुर्गम और दलदली पैच ऐसे हैं जहां बिजली के खंभे और हाई-मास्ट फ्लडलाइट्स लगाना तकनीकी रूप से संभव नहीं हो पाया है। 
        सघन आबादी (Zero Line Villages): कई जगहों पर अंतरराष्ट्रीय सीमा लोगों के घरों के पीछे के आंगन या खेतों से होकर गुजरती है. ऐसे में यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन स्थानीय नागरिक है. कौन घुसपैठिया। 

    नदियों और दलदलों वाले करीब 175 किलोमीटर इलाके में पारंपरिक बाड़ लगाना लगभग नामुमकिन है. यही जगह घुसपैठ और तस्करी के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है। 

    वहां किस तरह की घुसपैठ होती है?

    डार्क जोन से कई तरह की अनधिकृत गतिविधियां होती हैं…

        अवैध प्रवासन (Illegal Migration): आर्थिक मजबूरियों या अन्य कारणों से लोग रात के अंधेरे में घुसते हैं. वे पश्चिम बंगाल, असम आदि में बस जाते हैं. जाली दस्तावेज बनवा लेते हैं। 

        तस्करी (Smuggling): सबसे बड़ा कारोबार. भारत से बांग्लादेश में गाय तस्करी, फेक इंडियन करेंसी (FICN), ड्रग्स (याबा, फेंसिडिल), सोना और हथियार. नदी वाले इलाकों में नावों से रात में तस्करी आसान होती है। 

        मानव तस्करी: महिलाओं और बच्चों को मजदूरी, जबरन शादी या शोषण के लिए ले जाया जाता है। 
        सुरक्षा खतरे: कभी-कभी चरमपंथी तत्व, जासूस या अपराधी भी घुसते हैं. डेमोग्राफिक चेंज और कट्टरपंथ की आशंका बढ़ रही है। 

        छोटी-मोटी घटनाएं: चोरी, अवैध व्यापार आदि.

    BSF हर साल हजारों प्रयासों को नाकाम करता है, लेकिन कुछ सफल हो जाते हैं. हाल के वर्षों में प्रयास बढ़े हैं। 

    भारत की तरफ: सीमा सुरक्षा बल (BSF)
    भारत की ओर से इस सीमा की रक्षा की जिम्मेदारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के कंधों पर है. BSF के जवान इस डार्क जोन में निम्नलिखित रणनीतियों के तहत काम करते हैं… 

    चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग: पैदल गश्त के साथ-साथ नदी वाले इलाकों में BSF 'वाटर विंग' की स्पीड बोट और फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट्स (Floating BOPs) के जरिए गश्त करती है। 

    तकनीकी समाधान (Smart Fencing): जहां पारंपरिक कंटीली बाड़ लगाना संभव नहीं है, वहां BSF अब Comprehensive Integrated Border Management System (CIBMS) का उपयोग कर रही है. इसमें लेजर दीवारें (Laser Walls), थर्मल इमेजर, अंडरवाटर सेंसर और इंफ्रा-रेड कैमरे शामिल हैं, जो अंधेरे या कोहरे में भी हलचल को पकड़ लेते हैं। 

    ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम: आसमान से निगरानी रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाया गया है. साथ ही, सीमा पार से आने वाले संदिग्ध ड्रोनों को मार गिराने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक भी तैनात की जा रही है। 

    स्थानीय प्रशासन से समन्वय: सीमा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाओं को तेज किया है, ताकि BSF को नई चौकियां (BOPs) बनाने और बचे हुए हिस्सों में बाड़ लगाने के लिए जमीन मिल सके। 

    बांग्लादेश: बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB)
    बांग्लादेश की ओर से सीमा की निगरानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) (जिसे पहले बांग्लादेश राइफल्स या BDR कहा जाता था) करती है।

    बांग्लादेश: बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB)
    बांग्लादेश की ओर से सीमा की निगरानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) (जिसे पहले बांग्लादेश राइफल्स या BDR कहा जाता था) करती है। 

    समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (CBMP): BSF और BGB मिलकर 'Coordinated Border Management Plan' के तहत काम करते हैं. इसके तहत दोनों बल संयुक्त गश्त (Joint Patrolling) करते हैं ताकि तस्करों के ठिकानों को नष्ट किया जा सके। 

    फ्लैग मीटिंग्स: सीमा पर होने वाली किसी भी अप्रिय घटना, अवैध क्रॉसिंग या गोलीबारी की स्थिति में दोनों पक्षों के स्थानीय कमांडर तुरंत फ्लैग मीटिंग करते हैं ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। 

    डार्क जोन की समस्या अब तक अनसुलझी क्यों रही?
    यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आजादी के इतने दशकों बाद भी 600 किलोमीटर का यह हिस्सा असुरक्षित क्यों छूटा हुआ है? इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं…

    जटिल भूमि अधिग्रहण: पश्चिम बंगाल में आबादी का घनत्व बहुत अधिक है. बाड़ लगाने के लिए किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण करना पड़ता है, जिसके मुआवजे और पुनर्वास को लेकर लंबे समय तक राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक मतभेद रहे हैं। 

    भौगोलिक बाधाएं: सुंदरबन के मैंग्रोव जंगल और मालदा-मुर्शिदाबाद की उफनती नदियां ऐसी हैं जहां कंक्रीट का कोई भी ढांचा टिक नहीं पाता. मानसून के दिनों में नदियां किनारों को काट देती हैं, जिससे करोड़ों की लागत से बनी बाड़ मलबे में तब्दील हो जाती है। 

    स्थानीय अर्थव्यवस्था की निर्भरता: सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कई गांवों की अर्थव्यवस्था अनौपचारिक रूप से सीमा पार के व्यापार और छोटी-मोटी तस्करी पर टिकी हुई है. इसलिए स्थानीय स्तर पर भी कई बार बाड़ लगाने का विरोध देखने को मिलता है। 

    आगे का रास्ता क्या है?

    इस डार्क जोन को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए भारत सरकार को एक बहुस्तरीय और आधुनिक दृष्टिकोण अपनाना होगा… 

    शारीरिक बाधाओं के स्थान पर डिजिटल दीवार: जहां भौगोलिक कारणों से भौतिक बाड़ लगाना असंभव है, वहां 100% तकनीकी कवरेज सुनिश्चित किया जाना चाहिए. एआई-संचालित (AI-driven) कैमरे, ग्राउंड-पेनिट्रेटिंग सेंसर और लगातार सैटेलाइट निगरानी के जरिए 'डिजिटल फेंसिंग' को मजबूत करना होगा। 

    प्रशासनिक इच्छाशक्ति और त्वरित भूमि हस्तांतरण: केंद्र और राज्य सरकार को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर बचे हुए पैचों पर भूमि अधिग्रहण का काम युद्ध स्तर पर पूरा करना चाहिए ताकि BSF अपनी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा कर सके। 

    सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास: सीमा पर रहने वाले भारतीय नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें रोजगार के अवसर देने की जरूरत है, ताकि वे तस्करों के बहकावे में न आएं और देश की सुरक्षा के लिए सुरक्षा बलों के 'आंख और कान' बन सकें। 

    राजनयिक दबाव और सहयोग: बांग्लादेश की सरकार के साथ उच्च स्तरीय बातचीत के जरिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि BGB अपनी तरफ से घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे. अपनी धरती का इस्तेमाल भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए न होने दे। 

    भारत-बांग्लादेश सीमा का यह 600 किलोमीटर का डार्क जोन हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे कमजोर कड़ी है. जब तक इस खुली खिड़की को तकनीक, बुनियादी ढांचे और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के जरिए पूरी तरह से बंद नहीं किया जाता, तब तक घुसपैठ और तस्करी की चुनौतियों से पार पाना नामुमकिन होगा। 

     

     

    News Desk

    Related Posts

    पीएम किसान की अगली किस्त पर बड़ा अपडेट, जानें कब खाते में आएंगे पैसे

    July 27, 2026

    IMD अलर्ट: 27 जुलाई को 10 राज्यों में भारी बारिश, आंधी और वज्रपात की चेतावनी

    July 27, 2026

    भारत बना वैश्विक रक्षा साझेदार, मोदी ने पिनाका और कुशा मिसाइलों की सफलता गिनाई

    July 27, 2026

    सरकार का बड़ा फैसला, न्यायिक ढांचे और ई-कोर्ट के लिए 2010 करोड़

    July 27, 2026

    पीएम मोदी ने मांगे 15 अगस्त भाषण के लिए देशवासियों से सुझाव

    July 26, 2026

    सिद्धारमैया का बड़ा ऐलान, 2028 कर्नाटक चुनाव नहीं लड़ेंगे पूर्व सीएम

    July 26, 2026
    GAM
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    श्रेयस अय्यर ने निभाई धोनी की परंपरा, जिम्बाब्वे पर सीरीज जीत के बाद इस खिलाड़ी को सौंपी ट्रॉफी

    July 27, 2026

    Stock Market Rally: विदेशी खबर से शेयर बाजार में तूफानी उछाल, खुलते ही निवेशकों की हुई चांदी

    July 27, 2026

    Commonwealth Games 2026: राजा मुथुपंडी ने जीता सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में भारत को मिला एक और पदक

    July 27, 2026

    रूसी तेल से भारत मजबूत, ऊर्जा सुरक्षा पर बढ़ा भरोसा

    July 27, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    Owner - Rakhi Roy
    Editor - Rahul Shende
    Mobile - 7089782411
    Email - cgnewsllive24@gmail.com
    Office - F 188, Aakash Ganga, Supela, Bhilai, Chhattisgarh
    July 2026
    M T W T F S S
     12345
    6789101112
    13141516171819
    20212223242526
    2728293031  
    « Jun    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.