Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    CG News
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    CG News
    Home»देश»‘तारीख पर तारीख’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्ट मामलों के लिए तय की नई टाइम लिमिट
    देश

    ‘तारीख पर तारीख’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्ट मामलों के लिए तय की नई टाइम लिमिट

    News DeskBy News DeskMay 29, 2026No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    ‘तारीख पर तारीख’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, हाईकोर्ट मामलों के लिए तय की नई टाइम लिमिट
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

     नई दिल्ली

    देश की न्यायपालिका में सुधार की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक कड़ा कदम उठाया है। अब देश के सभी हाईकोर्ट्स को किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद उसे अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाना होगा। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपिन एम पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया है कि अदालती कार्यवाही में बेवजह की देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
    अदालतों में लंबित मामलों और फैसलों में होने वाली देरी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं. शीर्ष अदालत ने आरक्षित फैसलों, जमानत आदेशों और उनके कारणों को सार्वजनिक करने के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की है। 

    सुरक्षित फैसलों को अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाना होगा
    सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित (Reserved Judgment) रखे जाने के बाद उसे अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाया जाना चाहिए. वहीं जमानत से जुड़े मामलों में आदेश आदर्श रूप से अगले दिन जारी किया जाए और उसी दिन जेल प्रशासन तक पहुंचाया जाए। 

    जमानत के मामलों में ‘इमीडिएट’ कार्रवाई
    सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हुए जमानत (Bail) के मामलों में बेहद सख्त निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि:

        जमानत की अर्जी पर फैसला उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनाया जाना चाहिए।
        आदेश को तुरंत जेल अधिकारियों को भेजा जाए ताकि 24 से 48 घंटे के भीतर आरोपी की रिहाई सुनिश्चित हो सके।

        ट्रायल कोर्ट्स को अब इन मामलों में अपनी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) संबंधित हाईकोर्ट को सौंपनी होगी।

    फैसला न आने पर अब केस हो सकेगा ट्रांसफर
    सुप्रीम कोर्ट ने इन दिशानिर्देशों को सिर्फ एक सुझाव नहीं, बल्कि अनिवार्य नियम बनाया है। यदि किसी मामले में फैसला तीन महीने की समय सीमा के भीतर नहीं आता है, तो प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रार जनरल को मामले को तुरंत हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के संज्ञान में लाना होगा।

    यदि इसके बाद भी देरी होती है, तो मामला किसी दूसरी बेंच को सौंप दिया जाएगा। इतना ही नहीं, यदि फैसला आने के 15 दिनों के भीतर विस्तृत आदेश वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया जाता, तो संबंधित पक्ष इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। देरी के 30 दिन पूरे होने पर केस को दूसरी बेंच में स्थानांतरित (Transfer) करने का विकल्प भी खुला रहेगा।

    पारदर्शिता के लिए डिजिटल बदलाव
    न्यायालय ने यह भी अनिवार्य किया है कि अब हर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर यह स्पष्ट रूप से दिखेगा कि किस तारीख को फैसला सुरक्षित रखा गया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पोर्टल्स पर जरूरी तकनीकी बदलाव करें ताकि फैसले सुरक्षित रखने, सुनाने और अपलोड करने की तारीखें जनता के लिए पारदर्शी हों।

    क्यों पड़ी इस कदम की जरूरत?
    यह फैसला झारखंड हाईकोर्ट से जुड़े एक मामले के बाद आया है, जिसमें दिसंबर 2025 में फैसला होने के बावजूद वह महीनों तक न तो अपलोड हुआ और न ही वादी को मिल सका। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने अपने 15 साल के अनुभव का उदाहरण देते हुए कहा कि वह अपने कार्यकाल में हमेशा तीन महीने के भीतर निर्णय देने के मानक का पालन करते रहे हैं।

    सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ये निर्देश किसी जज या कोर्ट के खिलाफ नहीं, बल्कि न्यायिक कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए हैं। इससे पहले नवंबर 2025 से ही सुप्रीम कोर्ट सभी हाईकोर्ट्स से लंबित मामलों और उनके डेटा की रिपोर्ट मांग रहा था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि न्याय मिलने में देरी न हो।

    जमानत पाए कैदियों कि रिहाई उसी दिन हो सुनिश्चित
    अदालत ने यह भी कहा कि जिन अंडरट्रायल कैदियों को जमानत मिल चुकी है, उनकी रिहाई उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनिश्चित की जानी चाहिए. नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अदालत पहले आदेश का प्रभावी हिस्सा (Operative Part) खुले कोर्ट में सुनाएगी और उसके विस्तृत कारण सात दिनों के भीतर वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे. साथ ही, जिस दिन फैसला सुरक्षित रखा गया हो, उसकी जानकारी भी संबंधित हाईकोर्ट की वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाएगी। 

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया जाता है तो मामला किसी अन्य पीठ को सौंपा जा सकता है. वहीं, यदि फैसले के कारण 30 दिनों के भीतर अपलोड नहीं किए जाते हैं तो मामला वापस लेकर नई पीठ के समक्ष भेजा जा सकता है. शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे इन दिशानिर्देशों को संबंधित मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। 

    News Desk

    Related Posts

    माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पांच राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया, द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया

    May 29, 2026

    क्या भारत में शुरू होने वाले हैं प्लास्टिक के नोट? RBI की तैयारी ने बढ़ाई हलचल

    May 29, 2026

    NEET पेपर अब एयरफोर्स की निगरानी में! प्रश्नपत्र पहुंचाने के लिए सरकार का बड़ा प्लान

    May 29, 2026

    ‘पुष्पा’ स्टाइल में भारत पहुंचनी थी अरबों की ड्रग्स, 196 दिन तक 7 देशों में घूमता रहा जहाज

    May 29, 2026

    महाराष्ट्र में जहरीली शराब का कहर! 15 लोगों की मौत, कई जिंदगी और मौत के बीच

    May 29, 2026

    ED को मिला बड़ा पावर बूस्ट, सरकार ने बढ़ाई मैनपावर; घोटालेबाजों पर कसेगा शिकंजा

    May 29, 2026
    GAM
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    विनेश फोगाट की होगी मैट पर वापसी! सुप्रीम कोर्ट ने WFI को दिया बड़ा झटका

    May 29, 2026

    माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने पांच राष्ट्रीय पहलों का शुभारंभ किया, द आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे होने पर स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया

    May 29, 2026

    बस्तर में चिकित्सा की अलख जगाने वाले पद्मश्री डॉ. गोडबोले दंपति का वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने किया आत्मीय अभिनंदन

    May 29, 2026

    जनदर्शन में मंत्री राजेश अग्रवाल ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं, ग्राम हरिहरपुर में जनता से सीधा संवाद, त्वरित निराकरण के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश….

    May 29, 2026
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    Owner - Rakhi Roy
    Editor - Rahul Shende
    Mobile - 7089782411
    Email - cgnewsllive24@gmail.com
    Office - F 188, Aakash Ganga, Supela, Bhilai, Chhattisgarh
    May 2026
    M T W T F S S
     123
    45678910
    11121314151617
    18192021222324
    25262728293031
    « Apr    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.