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    ISI समर्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी पर बड़ा एक्शन, पाकिस्तान बॉर्डर से दिल्ली तक नेटवर्क ध्वस्त

    News DeskBy News DeskMay 14, 2026No Comments6 Mins Read
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    ISI समर्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी पर बड़ा एक्शन, पाकिस्तान बॉर्डर से दिल्ली तक नेटवर्क ध्वस्त
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    नई दिल्ली
     पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से कथित तौर पर जुड़े गैंगस्टर शहजाद भट्टी के नेटवर्क को लेकर देशभर में सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है. महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) समेत कई केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में व्यापक छापेमारी कर एक ऐसे कथित स्लीपर सेल मॉड्यूल का खुलासा किया है, जिसमें सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और डार्क वेब के जरिए भारतीय युवाओं को जोड़ने की साजिश सामने आई है. पाकिस्‍तान बॉर्डर से लेकर दिल्‍ली, हरियाणा, मध्‍य प्रदेश , उत्‍तर प्रदेश समेत अन्‍य जगहों पर एक्‍शन लिया गया है। 

    पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी गई है.
    सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र ATS ने मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, नवी मुंबई, कल्याण, भंडारा और चंद्रपुर समेत राज्य के 9 जिलों में 50 से अधिक ठिकानों पर एक साथ दबिश दी. इस कार्रवाई में अब तक 57 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियों का दावा है कि ये सभी युवक इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए शहजाद भट्टी गैंग के संपर्क में आए थे और कथित तौर पर उन्हें भारत के संवेदनशील ठिकानों से जुड़ी सूचनाएं जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था. जांच एजेंसियों के अनुसार, संदिग्धों को सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों, सार्वजनिक स्थलों और अन्य संवेदनशील इंफ्रास्ट्रक्चर की फोटो और वीडियो जुटाने के टास्क दिए जाते थे. सूत्रों का कहना है कि इन सूचनाओं को सीमा पार बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाने के बदले पैसे दिए जाते थे. एजेंसियों का दावा है कि कुछ युवाओं को भविष्य में युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश भी दिए गए थे। 

    सुरक्षा एजेंसियों से बचने का गजब तरीका
    खुफिया सूत्रों के मुताबिक, यह नेटवर्क छोटे-छोटे मॉड्यूलर सेल्स में काम करता था. यानी एक समूह को दूसरे समूह की गतिविधियों या पहचान की जानकारी नहीं दी जाती थी, ताकि किसी एक सदस्य के पकड़े जाने पर पूरा नेटवर्क उजागर न हो सके. जांचकर्ताओं का मानना है कि इस स्‍ट्रक्‍चर का इस्तेमाल सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए किया गया. ATS की जांच में यह भी सामने आया है कि डार्क वेब ब्राउजर और ऑटो-डिलीट मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर बातचीत को छिपाया जाता था. कार्रवाई के दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए हैं. शुरुआती फॉरेंसिक जांच में कुछ उपकरणों में ऐसे ऐप्स मिले हैं, जिनमें संदेश पढ़ने के बाद खुद ही डिलीट हो जाते थे. अधिकारियों का मानना है कि इन तकनीकों का इस्तेमाल एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए किया जा रहा था। 

    युवाओं को ऐसे करते थे ट्रेन
    जांच एजेंसियों को यह भी जानकारी मिली है कि ऑनलाइन गेमिंग सर्वरों के भीतर निजी चैट रूम बनाए गए थे. आरोप है कि इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को सुरक्षा व्यवस्था से बचने, मूवमेंट प्लानिंग और हथियारों के इस्तेमाल जैसी जानकारियां दी जा रही थीं. एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का विस्तार महाराष्ट्र से बाहर किन राज्यों तक था और कितने लोग इसके संपर्क में आए थे. विदर्भ क्षेत्र के भंडारा और चंद्रपुर जिलों में कथित भर्ती अभियान चलाए जाने की बात भी सामने आई है. सूत्रों के अनुसार, भंडारा में एक मोबाइल दुकान के जरिए युवा लड़कों को इस नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी. सोशल मीडिया के माध्यम से पहले संपर्क बनाया जाता था और फिर धीरे-धीरे उन्हें कथित तौर पर देश विरोधी गतिविधियों के लिए प्रेरित किया जाता था। 

    हवाला नेटवर्क का इस्‍तेमाल
    सूत्रों के मुताबिक, पैसों के लेन-देन के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया. जांच एजेंसियों को शक है कि कुछ स्थानीय व्यापारियों और कमीशन एजेंटों के बैंक खातों का उपयोग धन पहुंचाने के लिए किया गया. अब इन खातों की विस्तृत जांच की जा रही है. जांच में यह भी सामने आया है कि महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों की जनसंख्या, संवेदनशील इलाकों और स्थानीय गतिविधियों से जुड़ी जानकारियां भी साझा की जा रही थीं. एजेंसियों का कहना है कि नेटवर्क का एक हिस्सा लॉजिस्टिक सपोर्ट देने में लगा था. सूत्रों के अनुसार, डोगरा गैंग नाम से पहचाने जा रहे एक समूह पर संदिग्धों के ठिकाने तैयार करने, यात्रा की व्यवस्था करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें राज्य से बाहर निकालने की जिम्मेदारी होने का संदेह है। 

    पाकिस्‍तान बॉर्डर के आसपास भी एक्‍शन
    देशभर में चल रही कार्रवाई के तहत केंद्रीय एजेंसियों ने महाराष्ट्र के अलावा मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में भी छापेमारी की है. सूत्रों के मुताबिक, 300 से अधिक संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया या राउंड-अप किया गया है. पंजाब में पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों से 40 से ज्यादा संदिग्धों को पकड़ा गया है. वहीं हरियाणा STF ने करीब 90 युवकों को हिरासत में लेकर उनके सोशल मीडिया अकाउंट हटवाए हैं और उनकी काउंसलिंग की जा रही है. दिल्ली पुलिस ने भी करीब 20 युवकों को राउंड-अप किया है. अधिकारियों का कहना है कि इन युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए भड़काने और पैसों का लालच देकर कथित तौर पर नेटवर्क से जोड़ा गया था. कुछ मामलों में महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग जैसे टास्क दिए जाने की भी आशंका जताई जा रही है। 

    500 से ज्‍यादा डिजिटल प्रोफाइल
    सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय एजेंसियों को 500 से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबर और डिजिटल प्रोफाइल मिले थे, जिसके बाद यह बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया. जांच एजेंसियों का दावा है कि पाकिस्तान में बैठे आईएसआई से जुड़े कथित ऑपरेटिव आबिद जट्ट और अजमल गुजर सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं से संपर्क करते थे. शुरुआती बातचीत के बाद उन्हें गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जोड़ा जाता था, जो कथित तौर पर उन्हें पैसों और दूसरे लालच देकर अलग-अलग टास्क सौंपता था। 

    महत्‍वपूर्ण जगहों को निशाना बनाने की साजिश
    ATS की तकनीकी टीम को कुछ ऐसे डिजिटल संकेत भी मिले हैं, जिनसे आशंका जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही थी. हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक आधिकारिक तौर पर सभी जानकारियां सार्वजनिक नहीं की हैं. कई डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। 

    News Desk

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