नई दिल्ली
अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी श्रम विभाग ने एच1बी वीजा धारकों के न्यूनतम वेतन में 30 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव पेश किया है।
प्रशासन का तर्क है कि यह कदम अमेरिकी नागरिकों के रोजगार और उनके वेतन हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है, ताकि विदेशी कामगार कम वेतन पर उनकी जगह न ले सकें।
श्रम विभाग के अनुसार, मौजूदा वेतन स्तर लगभग 20 साल पहले तय किए गए थे, जो आज के समय में प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। नए प्रस्ताव 'इम्प्रू¨वग वेज प्रोटेक्शन' के तहत एंट्री-लेवल से लेकर अनुभवी पेशेवरों तक, सभी चार श्रेणियों के वेतन में वृद्धि की जाएगी। जहां पहले एंट्री-लेवल (लेवल-1) के लिए न्यूनतम वेतन 73,279 डालर था, उसे बढ़ाकर 97,746 डालर करने का प्रस्ताव है।
इसी तरह, सबसे अनुभवी पेशेवरों (लेवल-4) का वेतन 1,44,202 डालर से बढ़कर 1,75,464 डालर हो सकता है। यह बदलाव न केवल एच1बी बल्कि एच1बी1, ई-3 और प्रोग्राम इलेक्ट्रानिक रिव्यू मैनेजमेंट (पीईआरएम) जैसे प्रोग्राम्स पर भी लागू होगा।
इस प्रस्ताव ने उद्योग जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन में इस भारी बढ़ोतरी से छोटी कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं, खासकर फ्रेशर्स को नियुक्त करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। इस प्रस्ताव पर 26 मई तक आम जनता की राय मांगी गई है, जिसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
गौरतलब है कि 2020 में भी ट्रंप प्रशासन ने बिना किसी पूर्व सूचना के ऐसे बदलाव की कोशिश की थी, जिसे कानूनी चुनौतियों के कारण रोकना पड़ा था। हाल ही में, सितंबर 2025 में एक राष्ट्रपति आदेश के जरिये एच1बी उम्मीदवारों पर एक लाख डालर का शुल्क भी लगाया गया था। अब वेतन वृद्धि का यह नया प्रस्ताव विदेशी पेशेवरों के लिए अमेरिका की राह को और भी चुनौतीपूर्ण बनाने वाला साबित हो सकता है।
